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25 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद जूस पीकर तोड़ा उपवास

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25 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार के आश्वासन के बाद जूस पीकर तोड़ा उपवास

AIN NEWS 1 नई दिल्ली। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने आखिरकार 25 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर अपना उपवास तोड़ा। यह घटनाक्रम सरकार और सोनम वांगचुक के बीच हुई विस्तृत बातचीत के बाद सामने आया, जिसमें सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए।

सोनम वांगचुक का यह अनशन देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्रों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी उनकी मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई थी। कई दिनों तक चली बातचीत के बाद जब सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले, तब उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

सरकार और सोनम वांगचुक के बीच बनी सहमति

सरकारी प्रतिनिधियों और सोनम वांगचुक के बीच हुई बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया। इसी आश्वासन के बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया।

बताया गया कि सरकार ने सभी संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार करने और संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ने का भरोसा दिया है।

20 मार्च की घटना पर नहीं होगी कार्रवाई

बैठक के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि 20 मार्च को हुए घटनाक्रम के संबंध में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

यह आश्वासन प्रदर्शन में शामिल लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई प्रदर्शनकारी संभावित कानूनी कार्रवाई को लेकर चिंतित थे। सरकार के इस फैसले से आंदोलन से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

छात्रों के परिवारों को मुआवजे पर संसद में होगी चर्चा

बातचीत के दौरान उन छात्रों का मुद्दा भी उठाया गया, जिन्होंने कथित रूप से आत्महत्या की। सरकार ने आश्वासन दिया कि इस संवेदनशील विषय पर संसद में चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा और चर्चा के बाद प्रभावित परिवारों को उपयुक्त मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।

हालांकि मुआवजे की राशि या समयसीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने कहा है कि संसद में चर्चा और संबंधित प्रक्रियाओं के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विपक्ष से भी की सहयोग की अपील

अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने केवल सरकार का ही नहीं बल्कि विपक्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय संसद के भीतर शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से उठाया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि सभी पक्ष मिलकर गंभीरता से चर्चा करेंगे तो समाधान निकालना आसान होगा। उनका मानना है कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिए जाने चाहिए।

25 दिनों तक चला आंदोलन

सोनम वांगचुक का अनशन लगातार 25 दिनों तक चला। इस दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण उन्हें गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां नियमित चिकित्सकीय जांच भी होती रही।

अनशन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर भी उनकी मांगों को लेकर व्यापक चर्चा होती रही।

सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार की ओर से अंतिम दौर की बातचीत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों नेताओं ने वांगचुक से मुलाकात कर उनकी चिंताओं को सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी।

इसी बातचीत के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया।

अब आगे क्या होगा?

अनशन समाप्त होने के बाद अब सभी की नजर सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर रहेगी। जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन पर संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई होने की उम्मीद है।

विशेष रूप से तीन बिंदुओं पर लोगों की नजर रहेगी—

20 मार्च की घटना में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

छात्रों के परिवारों को मुआवजे के मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी।

सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद आगे भी जारी रहेगा।

यदि इन आश्वासनों पर समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो लंबे समय से चल रहे इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जाएगी।

देशभर में रही नजर

सोनम वांगचुक के अनशन पर देशभर के लोगों की नजर बनी हुई थी। सामाजिक संगठनों, छात्रों, शिक्षाविदों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने समय-समय पर उनका समर्थन किया। वहीं सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद शुरू होने के बाद समाधान की उम्मीद भी बढ़ गई थी।

25 दिनों बाद अनशन समाप्त होने के साथ फिलहाल आंदोलन का यह चरण खत्म हो गया है, लेकिन अब असली परीक्षा सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की होगी। आने वाले दिनों में संसद और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि इस समझौते का अंतिम परिणाम क्या निकलता है।

नोट: यह खबर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और सामने आए दावों के आधार पर तैयार की गई है। सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक दस्तावेज़ों या विस्तृत बयान के बाद अतिरिक्त जानकारी सामने आने पर तथ्यों में बदलाव संभव है।

**Sonam Wangchuk ended his 25-day hunger strike after receiving assurances from the Central Government during a meeting with Union Health Minister JP Nadda and Union Minister Jitendra Singh at a private hospital in Gurugram. The government assured that no new cases would be registered against protesters linked to the March 20 incident, while the issue of compensation for families of deceased students would be discussed in Parliament. Sonam Wangchuk also appealed to opposition parties to hold a peaceful debate in Parliament. This latest Sonam Wangchuk news marks a significant development in the ongoing protest and government dialogue, making it one of the top breaking news stories in India.

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