उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से, चार दिन तक चलेगी सदन की कार्यवाही
AIN NEWS 1 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमाने जा रही है। राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से शुरू होगा। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से प्रारंभ होगी। यह सत्र फिलहाल चार दिनों के लिए प्रस्तावित है, लेकिन इसके दौरान होने वाली राजनीतिक बहस और सरकार-विपक्ष के बीच तीखे टकराव को देखते हुए इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र के पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी। विशेष रूप से आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे आलम बदी के निधन पर शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद सदन की नियमित कार्यवाही शुरू होगी।

अनुपूरक बजट पर रहेगी सबकी नजर
मानसून सत्र का सबसे अहम एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार इस बजट के माध्यम से विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान करेगी। माना जा रहा है कि विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और कानून व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया जा सकता है।
सरकार कुछ नए विधेयक भी सदन में पेश कर सकती है। इनमें पहले जारी किए गए अध्यादेशों को विधेयक के रूप में पारित कराने का प्रयास भी शामिल रहेगा।
विपक्ष ने पहले ही बना ली है रणनीति
हालांकि सत्र केवल चार दिन का है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह काफी हंगामेदार रहने वाला है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर चुके हैं।
सबसे प्रमुख मुद्दा भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक का रहेगा। विपक्ष का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इस विषय पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी की जा रही है।
इसके अलावा दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और प्रदेश की कानून व्यवस्था भी विपक्ष के निशाने पर रह सकती हैं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला भी बन सकता है बड़ा मुद्दा
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी का मामला भी विपक्ष द्वारा सदन में उठाया जा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकता है और पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से इस विषय पर पहले ही जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी जा चुकी है। ऐसे में सदन के भीतर इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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कानून व्यवस्था और जनता से जुड़े मुद्दे भी उठेंगे
विपक्ष केवल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश में अपराध, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की समस्याएं, बिजली व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का प्रयास रहेगा कि आम जनता से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सदन में रखा जाए, ताकि सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया जा सके।
सरकार विकास कार्यों का देगी ब्यौरा
दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को सदन में प्रमुखता से रखेगी। सरकार का दावा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है, निवेश बढ़ा है, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट और औद्योगिक परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।
सरकार रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, महिला सुरक्षा, किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं और गरीब कल्याण कार्यक्रमों का भी विस्तृत विवरण सदन में प्रस्तुत कर सकती है।
संभल मामले की जांच रिपोर्ट पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि संभल मामले से संबंधित न्यायिक जांच रिपोर्ट भी मानसून सत्र के दौरान सदन में रखी जा सकती है। हालांकि विधानसभा सचिवालय या राज्य सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसलिए फिलहाल इसे संभावित एजेंडे के रूप में ही देखा जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम होगा यह सत्र
राजनीतिक दृष्टि से यह मानसून सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अब ज्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जनता के सामने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
सरकार विकास और सुशासन के मुद्दे पर जनता का भरोसा मजबूत करना चाहेगी, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कमियों को उजागर करने का प्रयास करेगा।
संवैधानिक दृष्टि से भी जरूरी था सत्र
भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी राज्य विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। इसी संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मानसून सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया था।
इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने 3 अगस्त से सत्र शुरू करने की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी।
सदन में तीखी बहस की पूरी संभावना
चार दिन का यह सत्र भले ही अवधि में छोटा हो, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। एक ओर सरकार अपने विकास कार्यों और योजनाओं का लेखा-जोखा पेश करेगी, वहीं विपक्ष पेपर लीक, कानून व्यवस्था, युवाओं के भविष्य, किसानों की समस्याओं और राम मंदिर से जुड़े विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की पूरी कोशिश करेगा।
प्रदेश की जनता की नजर भी इस बात पर रहेगी कि सत्ता पक्ष और विपक्ष जनहित के मुद्दों पर कितनी गंभीरता से चर्चा करते हैं और किन विषयों पर ठोस निर्णय सामने आते हैं।
The UP Assembly Monsoon Session 2026 will commence on August 3, with the Yogi Adityanath government scheduled to present the Supplementary Budget 2026. The Uttar Pradesh Assembly is expected to witness intense debates as the opposition plans to raise issues such as the paper leak controversy, Ram Temple donation theft allegations, law and order, unemployment, and public welfare. The session is considered politically significant ahead of the 2027 Uttar Pradesh Assembly Elections, making it one of the most closely watched legislative events in the state.



















