रहेजा डेवलपर्स पर ईडी का बड़ा एक्शन: 782 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त, अब तक करीब 2400 करोड़ की संपत्तियां अटैच
AIN NEWS 1 नई दिल्ली/गुरुग्राम: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश की चर्चित रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (Raheja Developers Limited) के खिलाफ धन शोधन (Money Laundering) मामले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने कंपनी और उससे जुड़े लोगों की करीब 782 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (जब्त) कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद अब तक इस मामले में ईडी द्वारा अटैच की गई कुल संपत्तियों का मूल्य करीब 2400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जांच में कंपनी, उसके निदेशक नवीन एम. रहेजा तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड पर आरोप है कि उसने अपनी कई आवासीय परियोजनाओं के नाम पर हजारों लोगों से बड़ी रकम जुटाई, लेकिन तय समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए। जांच एजेंसियों के अनुसार कंपनी ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए करीब 4,600 फ्लैट खरीदारों से लगभग 2,426 करोड़ रुपये एकत्र किए थे।

ईडी का आरोप है कि खरीदारों से प्राप्त इस राशि का बड़ा हिस्सा संबंधित परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय अन्य कंपनियों, निजी निवेश और दूसरे वित्तीय लेन-देन में लगाया गया। इसके कारण कई परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहीं और हजारों परिवार अपने घर मिलने का इंतजार करते रहे।
कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत फ्लैट खरीदारों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों से हुई। अलग-अलग परियोजनाओं में देरी और धन के कथित दुरुपयोग को लेकर हरियाणा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं।
इन्हीं एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज किया और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई बैंक खातों, कंपनियों और संपत्तियों की जांच की गई।
ईडी ने क्या पाया?
प्रारंभिक जांच में ईडी को कई ऐसे वित्तीय लेन-देन मिले जिनमें परियोजनाओं के लिए जुटाई गई राशि को दूसरी कंपनियों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है।
एजेंसी का कहना है कि जिन परियोजनाओं के लिए खरीदारों से पैसे लिए गए थे, उन पर अपेक्षित निवेश नहीं किया गया। इससे परियोजनाओं का निर्माण प्रभावित हुआ और हजारों खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
782 करोड़ रुपये की किन संपत्तियों पर कार्रवाई?
ईडी द्वारा अटैच की गई नई संपत्तियों में विभिन्न स्थानों पर स्थित जमीन, व्यावसायिक संपत्तियां और अन्य अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 782 करोड़ रुपये बताया गया है।
ये सभी संपत्तियां जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से अटैच रहेंगी। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो इन पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अब तक करीब 2400 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
ईडी इससे पहले भी रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ कई चरणों में कार्रवाई कर चुकी है।
अप्रैल 2026 में लगभग 1,113.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
जून 2026 में करीब 503.48 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच की गईं।
अब अगस्त 2026 में 782 करोड़ रुपये की नई कार्रवाई के बाद कुल अटैचमेंट करीब 2400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े धन शोधन मामलों में अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
हजारों खरीदारों को अब भी न्याय का इंतजार
रहेजा डेवलपर्स की कई परियोजनाओं में निवेश करने वाले हजारों परिवार वर्षों से अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत या बैंक से होम लोन लेकर फ्लैट बुक किए थे, लेकिन समय पर कब्जा नहीं मिल पाया।
कई खरीदारों का कहना है कि उन्हें एक साथ बैंक की ईएमआई और किराया दोनों का बोझ उठाना पड़ा। इसी कारण बड़ी संख्या में लोगों ने कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया।
ईडी की जांच अभी जारी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। एजेंसी धन के प्रवाह, संबंधित कंपनियों, सहयोगी संस्थाओं और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आने वाले समय में और संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि खरीदारों से प्राप्त धन किन-किन माध्यमों से दूसरी जगह भेजा गया।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक मजबूत संदेश है। यदि किसी परियोजना के नाम पर जुटाए गए धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य जगह किया जाता है, तो संबंधित एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर सकती हैं।
सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि घर खरीदारों के हितों की रक्षा हो और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़े। ऐसे मामलों में ईडी, आर्थिक अपराध शाखा और अन्य एजेंसियां मिलकर वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही हैं।
आगे क्या होगा?
अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों की पुष्टि के लिए संबंधित प्राधिकरणों और अदालतों में प्रक्रिया चलेगी। यदि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होती है, तो संपत्तियों की जब्ती स्थायी भी हो सकती है।
दूसरी ओर, हजारों फ्लैट खरीदारों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें उनका घर या निवेश की भरपाई कब और कैसे मिलेगी।
रहेजा डेवलपर्स के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। 782 करोड़ रुपये की नई अटैचमेंट के साथ इस मामले में अब तक करीब 2400 करोड़ रुपये की संपत्तियां जांच के दायरे में आ चुकी हैं। आने वाले समय में जांच के परिणाम और अदालतों के फैसले इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल हजारों घर खरीदारों को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित उनके मामलों में जल्द न्याय मिलेगा।
The Enforcement Directorate (ED) has attached assets worth Rs 782 crore belonging to Raheja Developers Limited under the Prevention of Money Laundering Act (PMLA). With this latest action, the total value of attached assets has reached nearly Rs 2400 crore. The investigation is based on multiple EOW FIRs alleging diversion of funds collected from over 4,600 homebuyers. Read the latest Raheja Developers news, ED action, money laundering case updates, property attachment details, and the impact on thousands of affected homebuyers across India.



















