टैटू का बढ़ता क्रेज बन रहा खतरा: संक्रमण, केलॉइड और हेपेटाइटिस का बढ़ रहा जोखिम, विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी
AIN NEWS 1: देश के समय में टैटू केवल फैशन या स्टाइल का प्रतीक नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं के बीच अपनी पहचान और व्यक्तित्व को दर्शाने का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। हाथ, गर्दन, कंधे, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर स्थायी टैटू बनवाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टैटू पूरी सावधानी और स्वच्छता के साथ नहीं बनवाया जाए तो यह सुंदरता बढ़ाने के बजाय गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
चर्म रोग विशेषज्ञों और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार हाल के वर्षों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जिन्हें टैटू बनवाने के बाद संक्रमण, एलर्जी, त्वचा पर स्थायी निशान और कुछ मामलों में हेपेटाइटिस-बी जैसे गंभीर संक्रमण का सामना करना पड़ा है। अस्पतालों में टैटू हटवाने वाले युवाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि टैटू बनवाने के दौरान त्वचा में सुई के माध्यम से रंग डाला जाता है। यदि सुई, उपकरण या इंक पूरी तरह से स्टरलाइज न हो, या सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाए, तो संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। कई छोटे और बिना लाइसेंस वाले टैटू स्टूडियो में स्वच्छता संबंधी नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।

कम गुणवत्ता वाली इंक भी कई लोगों में एलर्जी और त्वचा संबंधी गंभीर प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकती है। यही कारण है कि डॉक्टर टैटू बनवाने से पहले स्टूडियो की विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों की जांच करने की सलाह देते हैं।
टैटू के बाद हो सकती हैं ये समस्याएं
टैटू बनवाने के बाद हर व्यक्ति को परेशानी नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों में निम्न समस्याएं देखने को मिल सकती हैं—
त्वचा पर लालिमा और सूजन
लगातार दर्द या जलन
मवाद बनना या बैक्टीरियल संक्रमण
एलर्जी और तेज खुजली
केलॉइड (उभरा हुआ स्थायी निशान)
ग्रेन्युलोमा जैसी गांठें
घाव का लंबे समय तक न भरना
सोरायसिस या एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों का दोबारा सक्रिय होना
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है।
हेपेटाइटिस-बी और लिवर पर असर
चिकित्सकों के अनुसार टैटू स्वयं लिवर को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन यदि टैटू बनाते समय संक्रमित सुई या दूषित उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए तो हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
ये वायरस धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं और लंबे समय में सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। इसलिए टैटू बनवाने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरण पूरी तरह सुरक्षित और डिस्पोजेबल हों।
टैटू हटवाने वालों की संख्या बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार अब बड़ी संख्या में युवा टैटू हटवाने के लिए भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों से टैटू हटवाना चाहते हैं, जबकि कई युवा सेना, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस जैसी सरकारी नौकरियों की तैयारी के दौरान टैटू हटवाने का निर्णय लेते हैं।
आजकल लेजर तकनीक से टैटू हटाया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया समय लेने वाली और कई बार महंगी भी होती है। कई मामलों में टैटू पूरी तरह हटाने के लिए कई सिटिंग की आवश्यकता पड़ती है।
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अस्पतालों में बढ़ रहे मामले
राजस्थान के प्रमुख सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू से जुड़ी त्वचा संबंधी समस्याओं वाले मरीज पहले की तुलना में अधिक संख्या में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में संक्रमण, एलर्जी और टैटू हटाने से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। हालांकि अलग-अलग अस्पतालों के आंकड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि टैटू से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनती जा रही हैं।
रक्तदान और सरकारी नौकरियों पर भी असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि टैटू बनवाने के बाद रक्तदान से पहले कुछ समय तक प्रतीक्षा करने की सलाह दी जाती है, ताकि संभावित रक्तजनित संक्रमण के जोखिम का उचित मूल्यांकन किया जा सके।
इसके अलावा भारतीय सेना और कुछ अन्य सुरक्षा बलों में टैटू को लेकर निर्धारित नियम लागू हैं। शरीर के कुछ हिस्सों पर स्थायी टैटू होने पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए टैटू बनवाने से पहले संबंधित नियमों की जानकारी लेना आवश्यक है।
टैटू बनवाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
यदि आप टैटू बनवाने की योजना बना रहे हैं तो इन सावधानियों का पालन जरूर करें—
केवल लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद टैटू स्टूडियो का चयन करें।
नई और डिस्पोजेबल सुई का उपयोग होते हुए स्वयं देखें।
स्टरलाइज्ड उपकरण और अच्छी गुणवत्ता की इंक का ही इस्तेमाल कराया जाए।
टैटू बनवाने वाले कलाकार के हाथों में दस्ताने होने चाहिए।
टैटू बनवाने के बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए आफ्टर-केयर निर्देशों का पालन करें।
यदि पहले से त्वचा संबंधी बीमारी है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण करवाना अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
चर्म रोग विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाना पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन इसे केवल फैशन समझकर जल्दबाजी में नहीं करवाना चाहिए। टैटू बनवाने के बाद यदि तेज दर्द, लगातार सूजन, पस, बुखार या एलर्जी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
टैटू आज की युवा पीढ़ी में लोकप्रिय फैशन का हिस्सा जरूर बन चुका है, लेकिन इसके साथ जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुरक्षित स्टूडियो, स्वच्छ उपकरण, उच्च गुणवत्ता वाली इंक और सही देखभाल अपनाकर अधिकांश जोखिमों को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। इसलिए टैटू बनवाने से पहले पूरी जानकारी लें, सुरक्षा मानकों की जांच करें और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
फैक्ट नोट: टैटू से संक्रमण, एलर्जी, केलॉइड और हेपेटाइटिस-बी/सी का जोखिम चिकित्सकीय रूप से मान्य है। हालांकि विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या और मामलों के आंकड़े संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए उन्हें संबंधित अस्पतालों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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