AIN NEWS 1 बुलंदशहर। बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव से जुड़े विवाद में अब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सामने आया घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है। पप्पू यादव पर चप्पल फेंकने और कथित तौर पर हमला करने के मामले में आरोपी बताए जा रहे सुमित गिरी और हैप्पी शर्मा जमानत पर रिहा होने के बाद बुलंदशहर पहुंचे। यहां समर्थकों और स्थानीय लोगों ने दोनों का जोरदार स्वागत किया। उनके स्वागत के दौरान फूल बरसाए गए, मालाएं पहनाई गईं और खुली गाड़ी में रोड शो निकाला गया।
ताजा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार 7 अगस्त को दोनों युवकों के बुलंदशहर पहुंचने के बाद जिला मुख्यालय से उनके गांव नैथला तक करीब 7 किलोमीटर का रोड शो निकाला गया। रास्ते में कई स्थानों पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। खुली थार में सवार दोनों युवकों के साथ बड़ी संख्या में लोग दिखाई दिए। इस दौरान नारेबाजी और फूल-मालाओं के जरिए उनका स्वागत किया गया।

बुलंदशहर में जगह-जगह स्वागत
रिपोर्टों के मुताबिक बुलंदशहर से नैथला गांव जाने के दौरान रास्ते में कई स्थानों पर सुमित गिरी और हैप्पी शर्मा के स्वागत की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। गंगेरूवा गांव में हिंदू रक्षा दल से जुड़े लोगों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद नैथला गांव में भी स्थानीय लोगों ने दोनों को माला पहनाकर स्वागत किया।
सिखेड़ा गांव में भी स्थानीय लोगों के स्वागत की जानकारी सामने आई है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों को खुली गाड़ी में लोगों के बीच जाते हुए देखा जा सकता है।
हालांकि, स्वागत में शामिल सभी लोगों और राजनीतिक पदाधिकारियों के नामों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। इसलिए इस हिस्से को स्थानीय दावों और सामने आए वीडियो के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
आखिर किस मामले में चर्चा में आए सुमित और हैप्पी?
सुमित गिरी और हैप्पी शर्मा उस समय चर्चा में आए, जब सांसद पप्पू यादव से जुड़ा एक विवाद दिल्ली में सामने आया। पप्पू यादव ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ हमला करने की कोशिश की गई और उन्हें चप्पल भी मारी गई। इस मामले में दोनों युवकों के नाम सामने आए और बाद में उनकी गिरफ्तारी की खबरें आईं।
मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं। पप्पू यादव की ओर से घटना को गंभीर हमला और सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया गया, जबकि आरोपी पक्ष ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया।
हैप्पी शर्मा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि उनके पास घटना के समय चाकू नहीं था और उन पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवाद की शुरुआत अलग परिस्थितियों में हुई थी।
इस वजह से पूरे मामले में अभी यह जरूरी है कि दोनों पक्षों के आरोपों को अलग-अलग रखा जाए और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाए।
सुमित गिरी के परिवार ने भी उठाए सवाल
घटना के बाद सुमित गिरी के परिवार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों में उनकी मां का पक्ष प्रकाशित हुआ, जिसमें उन्होंने अपने बेटे पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया और सवाल उठाया कि वह दिल्ली कैसे पहुंचा। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।
यानी इस पूरे विवाद में एक तरफ पप्पू यादव की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी तरफ आरोपी पक्ष खुद को निर्दोष बता रहा है। ऐसे में किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले जांच और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।
संसद में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद का दूसरा पहलू
इस विवाद की पृष्ठभूमि में संसद परिसर में हुआ पप्पू यादव का एक अनोखा प्रदर्शन भी रहा। जुलाई 2026 में पप्पू यादव अलग अंदाज में संसद पहुंचे थे। उन्होंने अपने कपड़ों पर विभिन्न मुद्दों से जुड़े संदेश लिखे थे। बाद में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मुद्दे को लेकर भी उन्होंने प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पप्पू यादव भगवा वस्त्रों में दानपात्र लेकर संसद परिसर में बैठे और प्रदर्शन के दौरान दान और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को प्रतीकात्मक तरीके से उठाया गया। इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद भी पैदा हुआ।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह प्रतीकात्मक राजनीतिक प्रदर्शन था। इसे वास्तविक धार्मिक अनुष्ठान या किसी व्यक्ति की वास्तविक पुजारी की भूमिका के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा पहले से जांच के घेरे में
राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा अलग मामला भी पहले से जांच में रहा है। जून 2026 में राम जन्मभूमि क्षेत्र से जुड़े चढ़ावे के कथित गबन के मामले में एसआईटी की जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
जुलाई में जांच के दौरान कथित रूप से चढ़ावे के पैसे से खरीदी गई संपत्तियों और वाहनों की जांच की खबरें भी सामने आईं।
इसी व्यापक मुद्दे को लेकर संसद में पप्पू यादव का प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और विवाद और बढ़ गया।
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क्या भाजपा समर्थकों ने किया स्वागत?
बुलंदशहर में हुए स्वागत को लेकर कुछ रिपोर्टों में स्थानीय समर्थकों और भाजपा से जुड़े लोगों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, भाजपा के आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे खबर में लिखते समय यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्वागत में भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी का दावा स्थानीय स्तर पर किया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों की भीड़, फूल-मालाएं और खुली गाड़ी में रोड शो दिखाई दे रहा है। इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि दोनों युवकों के बुलंदशहर पहुंचने पर समर्थकों के एक समूह ने उनका सार्वजनिक स्वागत किया।
जमानत के बाद स्वागत क्यों बना चर्चा का विषय?
आरोपों से जुड़े किसी व्यक्ति के जेल से बाहर आने के बाद इस तरह सार्वजनिक स्वागत किए जाने पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होना स्वाभाविक है। समर्थकों की नजर में यह स्वागत उनके पक्ष का समर्थन है, जबकि विरोध करने वाले लोग इसे कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं।
यहां यह बात भी समझना जरूरी है कि जमानत मिलना किसी व्यक्ति के दोषमुक्त होने के बराबर नहीं होता। जमानत न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपी को कुछ शर्तों के साथ बाहर रहने की अनुमति होती है। मामले का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सुमित गिरी और हैप्पी शर्मा जमानत के बाद बुलंदशहर पहुंचे हैं और उनके स्वागत का वीडियो सामने आया है। करीब 7 किलोमीटर के रोड शो की भी रिपोर्ट सामने आई है।
वहीं, पप्पू यादव से जुड़े हमले और चप्पल फेंकने के मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। आरोपी पक्ष ने कई आरोपों से इनकार किया है। इसलिए मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
AIN NEWS 1 की फैक्ट-चेक आधारित रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम को “आरोप”, “रिपोर्ट” और “दावे” के रूप में प्रस्तुत करना उचित है। किसी भी पक्ष पर लगे आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में पेश करना अभी उचित नहीं होगा।
Pappu Yadav shoe attack case has taken a new turn after accused Sumit Giri and Happy Sharma were reportedly released on bail and received a grand welcome in Bulandshahr. Supporters organized a roadshow of around 7 kilometers, while videos of the welcome surfaced online. The case is linked to the controversy surrounding Pappu Yadav and a Parliament protest over the Ram Mandir donation issue. Both sides have made allegations, and the final facts will depend on the ongoing legal proceedings and investigation.



















