AIN NEWS 1 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश: कांवड़ यात्रा को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के मामले में दिल्ली के मौलाना और ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी के खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित शिकायत के आधार पर की गई है। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है।
मौलाना साजिद रशीदी के बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसमें उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आई कुछ कथित हिंसक और तोड़फोड़ की घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाए थे। उनके बयान में कथित तौर पर ऐसे लोगों के लिए “terrorists” शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इसी बयान को लेकर हिंदू संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।
हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रशीदी का कहना था कि उनकी टिप्पणी हर कांवड़िये या पूरे कांवड़ समुदाय के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के संदर्भ में थी जिन पर हिंसा या उपद्रव करने के आरोप लगे हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे इस दावे को कि उन्होंने “सभी कांवड़ियों को आतंकी बताया”, बिना संदर्भ के प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

मुजफ्फरनगर में किस आधार पर दर्ज हुई FIR?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हिंदू संघर्ष समिति से जुड़े नरेंद्र पवार की शिकायत के आधार पर मुजफ्फरनगर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी है।
BNS की धारा 299 ऐसे कृत्यों से संबंधित है जिनमें किसी धर्म या धार्मिक मान्यताओं के प्रति जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप हो सकता है।
पुलिस की ओर से FIR दर्ज किए जाने की खबर सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश की राजनीति और सोशल मीडिया चर्चा का विषय बन गया है।
क्या कहा था मौलाना साजिद रशीदी ने?
विवाद की शुरुआत कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आए कुछ वीडियो और घटनाओं को लेकर हुई। रशीदी ने कथित तौर पर ऐसी घटनाओं का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति पुलिसकर्मियों पर हमला करता है या किसी वाहन को नुकसान पहुंचाता है तो क्या उसे भगवान शिव का भक्त कहा जा सकता है।
इसी संदर्भ में उनके बयान में “terrorists” शब्द का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। इस शब्द को लेकर कांवड़ियों और हिंदू संगठनों में नाराजगी देखने को मिली।
हालांकि, बयान के पूरे संदर्भ को देखने पर यह दावा अलग तरीके से सामने आता है कि रशीदी ने सभी कांवड़ियों को आतंकवादी कहा था। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपने बयान को कथित हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों तक सीमित बताया था।
यही वजह है कि इस मामले में FIR और आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
किन घटनाओं का दिया गया था हवाला?
कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से विवाद और झड़प से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इनमें लखनऊ में एक स्कूल वैन को नुकसान पहुंचाने का मामला भी चर्चा में रहा।
रिपोर्टों के मुताबिक, एक स्कूल वैन की कांवड़ियों के वाहन से मामूली टक्कर के बाद विवाद हुआ था। इसके बाद कुछ लोगों ने कथित तौर पर वाहन के शीशे और साइड मिरर को नुकसान पहुंचाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इसी तरह मेरठ में पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट की घटना भी चर्चा में आई। इन घटनाओं को लेकर यह बहस शुरू हुई कि धार्मिक यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था और अनुशासन को किस तरह बनाए रखा जाना चाहिए।
मौलाना रशीदी ने इन्हीं घटनाओं का हवाला देते हुए कांवड़ यात्रा और उसमें शामिल लोगों के व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
लखनऊ में भी हुई थी शिकायत
मुजफ्फरनगर में FIR दर्ज होने से पहले इस बयान को लेकर लखनऊ में भी शिकायत की गई थी। लोनी से बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने हजरतगंज थाने में शिकायत देकर मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उस समय लखनऊ में FIR दर्ज होने की पुष्टि सामने नहीं आई थी। इसके बाद मुजफ्फरनगर में शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
इस घटनाक्रम के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी जताई नाराजगी
मुजफ्फरनगर से जुड़े उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी मौलाना साजिद रशीदी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं और श्रद्धालुओं को लेकर इस तरह की टिप्पणियां समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं।
मंत्री की ओर से भी रशीदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने का सिलसिला जारी रहा।
FIR दर्ज होना और दोष साबित होना अलग बातें
इस पूरे मामले में यह समझना बेहद जरूरी है कि पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी पर लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं।
FIR किसी शिकायत के आधार पर आपराधिक जांच की शुरुआत होती है। अब पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, बयान के वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य तथ्यों की जांच कर सकती है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
इसलिए फिलहाल मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ FIR दर्ज होने की बात तथ्य है, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध मानना सही नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर दावे को लेकर सावधानी जरूरी
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे तेजी से फैल रहे हैं। कुछ पोस्ट में यह कहा जा रहा है कि मौलाना साजिद रशीदी ने सभी कांवड़ियों को “आतंकी” कहा। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों में उनके बयान का संदर्भ कथित हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों से जुड़ा बताया गया है।
ऐसे में खबर को साझा करते समय पूरे बयान और उसके संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है। धार्मिक और संवेदनशील मामलों में अधूरी जानकारी समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकती है।
आगे क्या होगा?
मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस बयान की वास्तविक वीडियो रिकॉर्डिंग, शिकायत में लगाए गए आरोपों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
फिलहाल इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण पुष्टि यही है कि मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ मुजफ्फरनगर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज की गई है। FIR में BNS की धारा 299 लगाए जाने की बात सामने आई है।
मामले में आगे पुलिस जांच, संभावित बयान और कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।
Maulana Sajid Rashidi has been booked in Muzaffarnagar over alleged objectionable remarks related to the Kanwar Yatra and Kanwariyas. The FIR was registered under BNS Section 299 following a complaint concerning his remarks. The controversy gained attention after Rashidi reportedly referred to people accused of violence during the Kanwar Yatra as “terrorists,” while reports also indicate that he clarified that his statement was not directed at all Kanwariyas. The latest Muzaffarnagar FIR, Kanwar Yatra controversy, Uttar Pradesh police action and legal developments are being closely watched.



















