AIN NEWS 1 | मोदीनगर के गोविंदपुरी-सारा रोड स्थित मानवतापुरी कॉलोनी नंबर-4 के एक मंदिर में पुजारी पर महिलाओं ने बदसलूकी और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाली महिलाओं के साथ पुजारी का व्यवहार लगातार आपत्तिजनक और असम्मानजनक रहा है।
महिलाओं का कहना है कि पुजारी पूजा के दौरान बार-बार टोका-टाकी करते हैं और कई बार पूजा-अर्चना में भी व्यवधान डालते हैं। इससे स्थानीय श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ रही है।
महिलाओं ने पुजारी को मंदिर से हटाने की मांग की
स्थानीय महिलाओं के मुताबिक, मंदिर पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उनका कहना है कि मंदिर में सभी श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक पूजा करने का अधिकार होना चाहिए, लेकिन पुजारी के कथित व्यवहार के कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पुजारी पंडित नरेंद्र को मंदिर से नहीं हटाया गया तो वे मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जाना बंद कर देंगी।
पहले भी इसी तरह के आरोप लगने का दावा
महिलाओं का दावा है कि पंडित नरेंद्र के खिलाफ इससे पहले भी श्रद्धालुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पहले मोदीनगर के एक अन्य मंदिर में भी पुजारी के व्यवहार को लेकर शिकायतें हुई थीं, जिसके बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने डबल स्टोरी क्षेत्र स्थित एक मंदिर में सेवा की, जहां भी महिलाओं के साथ कथित व्यवहार को लेकर विवाद सामने आने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, इन पुराने मामलों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विरोध के बाद एसडीएम से शिकायत का आरोप
महिलाओं के विरोध के बाद मामले ने एक और मोड़ ले लिया। आरोप है कि अपने खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच पुजारी पंडित नरेंद्र ने कुछ लोगों को मामले को लेकर गुमराह किया और मोदीनगर तहसील में एसडीएम के समक्ष शिकायत देकर अपने ऊपर लगे आरोपों से बचने का प्रयास किया।
महिलाओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय महिलाओं ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन से मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पुजारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें मंदिर से हटाया जाना चाहिए।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और सभी पक्षों का बयान सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।



















