AIN NEWS 1: दिल्ली से मेरठ की ओर जाने वाले रास्ते पर बसा मोदीनगर आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। लेकिन इस शहर की पहचान केवल चीनी मिलों और उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक ऐसे कारोबारी की कहानी है, जिसने सीमित पूंजी और कई शुरुआती मुश्किलों के बावजूद एक पूरे औद्योगिक नगर की नींव रख दी।
यह कहानी है राय बहादुर गूजरमल मोदी की। उपलब्ध ऐतिहासिक और आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, गूजरमल मोदी ने 1933 में तत्कालीन बेगमाबाद में चीनी मिल स्थापित की। आगे चलकर यही इलाका औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित हुआ और 1945 में आधिकारिक तौर पर मोदीनगर कहलाया।

₹400 लेकर निकले थे गूजरमल मोदी
गूजरमल मोदी का जन्म 9 अगस्त 1902 को हुआ था। उनके शुरुआती जीवन में कारोबारी संघर्ष भी रहा। उपलब्ध जीवनी संबंधी स्रोतों के अनुसार उन्होंने कम उम्र में अपने पिता के कारोबार में काम किया और 1919 के आसपास अनाज मिल में कैशियर के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
लेकिन उनके मन में अपना कारोबार खड़ा करने की इच्छा थी। वर्ष 1932 में करीब ₹400 लेकर वह दिल्ली की ओर निकले, ताकि कारोबार के लिए नई जगह और नया अवसर तलाश सकें। इसी तलाश में उनकी नजर दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित बेगमाबाद पर पड़ी।
यह फैसला आगे चलकर भारतीय उद्योग जगत के इतिहास में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
1933 में चीनी मिल से हुई औद्योगिक यात्रा की शुरुआत
गूजरमल मोदी ने बेगमाबाद में करीब 100 बीघा जमीन पर चीनी मिल लगाने की योजना बनाई। केके मोदी यूनिवर्सिटी के इतिहास विवरण के अनुसार इंग्लैंड से मशीनरी मंगाकर 1933 में यहां चीनी मिल स्थापित की गई। इसे मोदीनगर के औद्योगिक विकास की शुरुआत माना जाता है।
मोदी इंडस्ट्रीज की आधिकारिक वेबसाइट भी स्पष्ट करती है कि कंपनी 1932 में अस्तित्व में आई, जबकि मोदी शुगर मिल 1933 में मोदीनगर में स्थापित हुई। इसलिए 1932 और 1933 को लेकर अक्सर होने वाला भ्रम दूर करना जरूरी है।
यानी सरल शब्दों में कहें तो 1932 में कारोबारी विस्तार का दौर शुरू हुआ और 1933 में बेगमाबाद में चीनी मिल के साथ मोदीनगर की औद्योगिक कहानी ने वास्तविक आकार लिया।
शुरुआत आसान नहीं थी
चीनी मिल लगाना जितना बड़ा सपना था, उसे सफल बनाना उतना ही मुश्किल। मिल की शुरुआत के समय चीनी के उत्पादन और बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। 1933 में मिल शुरू हुई और कुछ ही वर्षों बाद चीनी उद्योग को उत्पादन अधिक होने की समस्या से जूझना पड़ा।
लेकिन गूजरमल मोदी ने मुश्किलों के सामने कारोबार बंद नहीं किया। उन्होंने उत्पादन, बाजार और कीमतों से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश की और धीरे-धीरे मिल को स्थिर किया।
यही उनकी कारोबारी सोच की खासियत थी—एक कारोबार पर निर्भर रहने के बजाय लगातार नए क्षेत्रों में कदम रखना।
चीनी से साबुन तक पहुंचा कारोबार
1939 में गूजरमल मोदी ने वनस्पति उत्पादन की इकाई शुरू की। इसके बाद उन्होंने वनस्पति उत्पादन से निकलने वाले पदार्थों के उपयोग और नए बाजार की संभावनाओं को देखते हुए साबुन के क्षेत्र में प्रवेश किया।
1940 में वॉशिंग सोप और 1941 में टॉयलेट सोप का कारोबार शुरू हुआ। टॉयलेट सोप में पशु वसा यानी टैलो के बजाय वनस्पति आधारित सामग्री के इस्तेमाल का प्रयोग उनकी बड़ी कारोबारी उपलब्धियों में माना जाता है। इससे ऐसा उत्पाद तैयार हुआ जिसे उस समय भारतीय बाजार में आसानी से स्वीकार किया गया।
इसके बाद उन्होंने साबुन की पैकिंग के लिए टिन निर्माण से लेकर खाद्य उत्पादों, बिस्किट, कन्फेक्शनरी, पेंट, टेक्सटाइल और दूसरे उद्योगों तक कारोबार फैलाया।
एक फैक्ट्री नहीं, पूरा औद्योगिक शहर
गूजरमल मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ उद्योग खड़े करना नहीं थी। उन्होंने फैक्ट्रियों के साथ-साथ कर्मचारियों और स्थानीय आबादी के लिए सड़क, पानी, चिकित्सा, आवास, स्कूल और अन्य सुविधाओं का विकास कराया।
केके मोदी यूनिवर्सिटी के इतिहास विवरण के अनुसार उन्होंने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम किया। समय के साथ बेगमाबाद में फैक्ट्रियों के साथ स्कूल, कॉलेज, मेडिकल सुविधाएं, आवासीय क्षेत्र और धार्मिक स्थल विकसित हुए।
यही कारण है कि गूजरमल मोदी की कहानी को केवल एक सफल उद्योगपति की कहानी नहीं माना जाता, बल्कि इसे एक औद्योगिक टाउनशिप के निर्माण की कहानी भी कहा जाता है।
बेगमाबाद से मोदीनगर कब बना?
यह सवाल आज भी लोगों की दिलचस्पी का विषय है।
गाजियाबाद जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, वर्तमान मोदीनगर की स्थापना 1933 में उद्योगपति गूजरमल मोदी ने की और उस समय क्षेत्र को बेगमाबाद के नाम से जाना जाता था।
इसके बाद 1945 में इस औद्योगिक कॉलोनी का आधिकारिक नाम मोदीनगर रखा गया। गूजरमल मोदी की जीवनी में दर्ज विवरण के अनुसार उस समय पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन और पुलिस स्टेशन के नाम भी बेगमाबाद से बदलकर मोदीनगर कर दिए गए।
इसलिए यह कहना अधिक सटीक है कि गूजरमल मोदी ने बेगमाबाद को औद्योगिक नगर के रूप में विकसित किया और 1945 में यह आधिकारिक रूप से मोदीनगर के नाम से पहचाना जाने लगा।
कारोबार लगातार फैलता गया
गूजरमल मोदी का कारोबार चीनी से आगे बढ़कर वनस्पति, साबुन, टिन, खाद्य उत्पाद, तेल, बिस्किट, कन्फेक्शनरी, पेंट-वार्निश, टेक्सटाइल, स्पिनिंग, आटा, डिस्टिलरी, टॉर्च, स्टील और रबर जैसे क्षेत्रों तक पहुंचा। मोदी इंडस्ट्रीज की आधिकारिक जानकारी भी बताती है कि उनकी अगुवाई में कई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं।
इस विस्तार ने मोदीनगर को धीरे-धीरे देश के औद्योगिक नक्शे पर एक अलग पहचान दिलाई।
गूजरमल मोदी को मिले सम्मान
गूजरमल मोदी के औद्योगिक और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें राय बहादुर की उपाधि मिली। केके मोदी यूनिवर्सिटी के इतिहास विवरण में उनके उद्योग, सामाजिक सेवा और औद्योगिक टाउनशिप के विकास में योगदान का उल्लेख है।
बाद में भारत सरकार ने उन्हें 1968 में पद्म भूषण
1976 में निधन, बाद में परिवार में बंटा कारोबार
गूजरमल मोदी का निधन 22 जनवरी 1976 को हुआ। उनकी मृत्यु के बाद भी परिवार ने कारोबार को आगे बढ़ाया। उनके पांच बेटे थे और उनके सौतेले भाई केदार नाथ मोदी के भी तीन बेटे थे।
आगे चलकर 1989 में मोदी परिवार के कारोबार का बड़ा बंटवारा हुआ और अलग-अलग कारोबारी शाखाएं परिवार के विभिन्न सदस्यों के पास चली गईं।
हालांकि समय के साथ मोदी समूह के कारोबार और कंपनियों में कई बदलाव हुए, लेकिन मोदीनगर के इतिहास में गूजरमल मोदी का योगदान आज भी सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है।
आज भी दिखाई देती है गूजरमल मोदी की छाप
मोदीनगर अब एक आधुनिक शहर है, लेकिन शहर की पुरानी पहचान में मोदी परिवार की छाप आज भी नजर आती है। मोदी शुगर मिल, मोदी मंदिर, मोदी भवन, मोदी गार्डन और पुराने औद्योगिक परिसर इस शहर के इतिहास से जुड़े प्रमुख स्थल हैं। गाजियाबाद जिला प्रशासन भी लक्ष्मी नारायण मंदिर, मोदी उद्यान, शीतला देवी मंदिर और मोदी भवन को क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में गिनाता है।
एक तरफ यह कहानी बताती है कि कैसे करीब ₹400 से शुरू हुआ सफर विशाल कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, वहीं दूसरी तरफ यह भी दिखाता है कि उद्योग केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहता। सही योजना और निवेश के साथ वह पूरे शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक ढांचे को बदल सकता है।
आज जब मोदीनगर का नाम लिया जाता है तो उसके पीछे सिर्फ एक उद्योगपति का नाम नहीं, बल्कि बेगमाबाद से एक औद्योगिक नगर बनने की करीब नौ दशक पुरानी कहानी भी जुड़ी हुई है।
Gujarmal Modi was a pioneering Indian industrialist who played a major role in transforming Begumabad into the industrial city of Modinagar. Starting his independent business journey with around Rs 400 in 1932, Gujarmal Modi established a sugar mill in 1933 and gradually expanded into vanaspati, soaps, food products, textiles, paints, steel and other industries. The official renaming of the industrial township as Modinagar in 1945 became an important milestone in the history of Modinagar and the Modi Group. His legacy continues to remain an important part of the industrial history of Uttar Pradesh.



















