AIN NEWS 1 | संसद का मानसून सत्र आखिरकार हंगामे और नारेबाजी के बीच खत्म हो गया। गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। पूरे सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला।
विपक्ष मुख्य रूप से दो मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगता रहा। पहला, दिल्ली में Gen-Z आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मामला और दूसरा, राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर संसद में चर्चा की मांग।
वहीं, सरकार का आरोप रहा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और सदन की कार्यवाही चलने नहीं दे रहा।
अमित शाह ने चर्चा के लिए दिया था प्रस्ताव
संसद का गतिरोध खत्म करने की कोशिश के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सत्र के आखिरी दिनों में कहा था कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
अमित शाह ने विपक्ष से कहा था कि वह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखकर दे कि वह चर्चा चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह खुद चर्चा में बैठेंगे और सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
हालांकि, विपक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्ष को अमित शाह के भाषण में दिलचस्पी नहीं है। उनका कहना था कि विपक्ष यह जानना चाहता है कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया।
आखिरी दिन सदन में पहुंचे पीएम मोदी और अमित शाह
सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहे।
वंदे मातरम् का गायन पूरा होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
संसद के बाहर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। कई मौकों पर NDA और विपक्षी सांसद आमने-सामने आ गए और सुरक्षाकर्मियों को दोनों पक्षों के बीच आना पड़ा।
कांग्रेस ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार
कांग्रेस के संगठन महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर मानसून सत्र को वॉशआउट कराने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग थी कि छात्रों पर बल प्रयोग के मामले में सरकार संसद में जवाब दे और राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर चर्चा हो। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुई।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे सत्र के दौरान सदन में नहीं आए और केवल सत्र के आखिरी दिन वंदे मातरम् के दौरान सदन में पहुंचे।
सरकार बोली- बिजनेस के लिहाज से सत्र अच्छा रहा
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के प्रदर्शन को दो अलग-अलग नजरिए से बताया।
उन्होंने कहा कि बिजनेस के लिहाज से सत्र अच्छा रहा और कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, चर्चा के लिहाज से उन्होंने सत्र को खराब बताया।
रिजिजू के मुताबिक, लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत और राज्यसभा की करीब 39 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में नकल रोकने से जुड़े विधेयक को छोड़कर अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाया चर्चा से भागने का आरोप
किरण रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके करीब तीन दशक के राजनीतिक अनुभव में यह पहली बार है जब सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से पीछे हट गया।
उन्होंने कांग्रेस सांसदों पर नारेबाजी और पोस्टर लेकर हंगामा करने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष को संसद में चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन उसने सदन की कार्यवाही बाधित करने का रास्ता चुना।
संसद के बाहर भी हुई नारेबाजी
सत्र के आखिरी सप्ताह में संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आमने-सामने की स्थिति कई बार बनी।
विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर “अमित शाह सदन में आओ” और “अमित शाह जवाब दो” जैसे नारे लगाए।
इसके जवाब में NDA सांसदों ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया और राहुल गांधी के खिलाफ “राहुल गांधी जवाब दो” जैसे नारे लगाए।
इस तरह पूरे सत्र के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे के मुद्दों को लेकर राजनीतिक दबाव बनाते रहे।
FCRA और परिसीमन पर सरकार की योजना टली
मानसून सत्र शुरू होने से पहले सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की चर्चा थी। इनमें FCRA संशोधन और परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव प्रमुख था।
लेकिन संसद में लगातार जारी गतिरोध के बीच इन योजनाओं को आगे बढ़ाने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
FCRA संशोधन विधेयक को बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया गया। वहीं, परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की कोशिश की थी। इस दौरान अलग-अलग विपक्षी दलों के साथ समर्थन को लेकर संपर्क किए जाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं।
अब क्या है बड़ा सवाल?
संसद का मानसून सत्र खत्म होने के साथ सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। सरकार का दावा है कि वह चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने सदन नहीं चलने दिया।
वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने उसके प्रमुख मुद्दों पर जवाब देने और चर्चा कराने की इच्छा नहीं दिखाई।
ऐसे में मानसून सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही रहा कि सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे की कमी और बढ़ी है। अब नजर इस बात पर होगी कि अगले सत्र में दोनों पक्ष किसी समझौते या चर्चा के रास्ते पर पहुंचते हैं या फिर संसद में टकराव का सिलसिला जारी रहता है।



















