AIN NEWS 1 नई दिल्ली/चंडीगढ़/रांची/नासिक। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। एक ओर लाल किले से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कई जगहों पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर विवाद भी सामने आए। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर ‘वंदे मातरम’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। चंडीगढ़ में बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन और पुलिस की सख्ती चर्चा में है। वहीं रांची में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने के दौरान पुलिस के साथ कथित धक्का-मुक्की हुई। इन सबके बीच नासिक से आई तीन नवजात बच्चों की तस्वीर ने स्वतंत्रता दिवस के माहौल को भावुक और खुशनुमा बना दिया।
कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ पर विवाद
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से गीत को बीच में रोकने के संकेत दिए गए।
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन को लेकर सहज नहीं था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।
हालांकि, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी की ओर से कहा गया कि सोनिया गांधी ‘वंदे मातरम’ को रोकने के लिए नहीं कह रही थीं। कांग्रेस के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे कुछ देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था कराने की बात कर रही थीं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस विवाद पर सफाई देते हुए ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया। उन्होंने महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े पुराने संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत की शुरुआती पंक्तियों के सार्वजनिक उपयोग को लेकर ऐतिहासिक रूप से भी चर्चा होती रही है। इस तरह फिलहाल मामला बीजेपी के आरोप और कांग्रेस की सफाई के बीच राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
चंडीगढ़ में बंदी सिखों की रिहाई को लेकर प्रदर्शन
स्वतंत्रता दिवस के दिन चंडीगढ़ और मोहाली क्षेत्र में बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। ‘बंदी सिंह’ के नाम से चर्चित मुद्दे पर सिख संगठनों की ओर से लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि जिन सिख कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उनकी रिहाई के मामले में सरकार कार्रवाई करे।
इस मुद्दे को लेकर पिछले वर्षों में मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो चुका है। जनवरी 2025 में भी कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था।
वहीं जुलाई 2026 में ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े समर्थकों ने अमृतपाल सिंह और अन्य बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर चंडीगढ़ की ओर मार्च किया था। उस दौरान भी बैरिकेडिंग तोड़ने और पुलिस के साथ टकराव की खबरें सामने आई थीं।
स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही मजबूत की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक शहर में हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी गई।
रांची में देवेंद्र महतो को तिरंगा यात्रा से रोकने पर विवाद
झारखंड की राजधानी रांची में भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तनाव की स्थिति देखने को मिली। छात्र आंदोलनकारी और JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने से पुलिस ने कथित तौर पर रोक दिया।
महतो पहले से ही JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन का हिस्सा हैं और हाल के दिनों में उन्होंने भूख हड़ताल भी की थी। स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
15 अगस्त को जब उन्होंने अस्पताल से निकलकर तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश की तो पुलिस के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की हुई। महतो ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन रोका गया और इस दौरान उन्हें चोट भी लगी।
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महतो ने सवाल उठाया कि स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा में शामिल होने से उन्हें क्यों रोका गया। दूसरी ओर, प्रशासन की कार्रवाई को चल रहे आंदोलन और कानून-व्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में है।
नासिक में तीन नवजातों ने बनाया ‘तिरंगा’
राजनीतिक विवादों और प्रदर्शनों के बीच महाराष्ट्र के नासिक से आई एक तस्वीर ने स्वतंत्रता दिवस के माहौल में अलग रंग भर दिया। नासिक जिला अस्पताल की न्यूबॉर्न बेबी केयर यूनिट में नर्सों ने तीन नवजात बच्चों को तिरंगे के तीन रंगों के रूप में सजाकर स्वतंत्रता दिवस मनाया।
तस्वीर में एक बच्चा केसरिया रंग में, दूसरा सफेद रंग में और तीसरा हरे रंग में लिपटा नजर आया। तीनों बच्चों को एक साथ इस तरह रखा गया कि पूरा दृश्य तिरंगे जैसा दिखाई देने लगा।
न कोई बड़ा मंच था, न कोई भव्य आयोजन और न ही लंबी परेड। अस्पताल के स्टाफ ने बेहद सरल तरीके से देशभक्ति का संदेश देने की कोशिश की। नवजातों की मासूमियत और तिरंगे के रंगों का यह मेल सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
यह तस्वीर स्वतंत्रता दिवस के उस भाव को सामने लाती है, जिसमें देशभक्ति केवल बड़े समारोहों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आम लोगों के छोटे-छोटे प्रयासों में भी दिखाई देती है।
स्वतंत्रता दिवस पर अलग-अलग तस्वीरें, एक ही संदेश
15 अगस्त 2026 को देश में एक तरफ राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और उत्साह दिखाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद और विरोध-प्रदर्शन भी सुर्खियों में हैं। कांग्रेस मुख्यालय का ‘वंदे मातरम’ विवाद राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन गया है, जबकि चंडीगढ़ में बंदी सिखों की रिहाई की मांग और रांची में देवेंद्र महतो को रोके जाने की घटना ने कानून-व्यवस्था तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच नासिक के अस्पताल की नवजात बच्चों वाली तस्वीर एक बिल्कुल अलग संदेश देती है। तीन मासूम बच्चों को तिरंगे के रंगों में सजाने का यह प्रयास स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को संवेदनशील और मानवीय अंदाज में सामने लाता है।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस 2026 की तस्वीरें भारत के लोकतांत्रिक जीवन के कई पहलुओं को एक साथ दिखा रही हैं—राजनीतिक बहस, विरोध का अधिकार, प्रशासनिक कार्रवाई और देश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव। इन घटनाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि राष्ट्रीय पर्व देश की एकता, लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर बने।
Independence Day 2026 witnessed several major developments across India, including the Vande Mataram controversy at the Congress headquarters, BJP allegations involving Sonia Gandhi, Congress’s clarification, the Chandigarh protest demanding the release of Bandi Sikh prisoners, the Devendra Mahto incident during a Tiranga Yatra in Ranchi, and an emotional Independence Day celebration involving three newborn babies at a Nashik hospital. These developments highlight political debate, public protests, national pride and the diverse ways Indians celebrated the 80th Independence Day.



















