AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में दूध और उससे बने उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसके दायरे में एनालॉग पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा समेत ऐसे अन्य उत्पाद शामिल हैं, जो पारंपरिक दूध से बने उत्पादों की तरह दिखते हैं, लेकिन उनमें दूध की जगह या दूध के किसी घटक की जगह दूसरे पदार्थों, खासकर वनस्पति वसा आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में मिलावटी और संदिग्ध डेयरी उत्पादों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज हुई है। हालिया जांच और छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध डेयरी सामग्री पकड़े जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को दूध और दूध से बने उत्पादों के नाम पर ऐसे विकल्प नहीं बेचे जाने चाहिए, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

क्या होता है एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एनालॉग उत्पाद को सीधे-सीधे ‘जहरीला’ या ‘नकली’ कहना सही नहीं है। खाद्य नियमों में डेयरी एनालॉग एक अलग अवधारणा है। FSSAI के दस्तावेजों के मुताबिक, ऐसे उत्पादों में दूध के फैट या प्रोटीन को आंशिक या पूरी तरह गैर-दुग्ध स्रोतों, जैसे वनस्पति तेल, वनस्पति फैट या प्लांट प्रोटीन से बदला जा सकता है।
मसलन, एनालॉग पनीर में वनस्पति तेल या फैट, स्टार्च, सोया या अन्य प्लांट प्रोटीन और कुछ अन्य सामग्री का इस्तेमाल करके पनीर जैसी बनावट तैयार की जा सकती है। FSSAI के हालिया प्रकाशन में भी एनालॉग पनीर की इसी तरह की संरचना का उल्लेख किया गया है।
समस्या तब पैदा होती है, जब ऐसे उत्पाद को ग्राहक के सामने इस तरह पेश किया जाए कि उसे वह असली दूध से बना पनीर, चीज या कोई अन्य मानक डेयरी उत्पाद समझे।
पनीर के नाम पर एनालॉग उत्पाद बेचने पर क्यों आपत्ति?
FSSAI के मौजूदा मानकों के अनुसार पनीर या छेना दूध से प्राप्त उत्पाद है। निर्धारित मानक में दूध और दूध से बने ठोस पदार्थ इसके कच्चे माल के रूप में बताए गए हैं।
यही वजह है कि दूध से बने वास्तविक उत्पाद और एनालॉग उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है। FSSAI के अनुसार डेयरी एनालॉग को डेयरी उत्पाद के रूप में पेश करने से उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है। उसके दस्तावेजों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन डेयरी एनालॉग उत्पादों के लिए पहचान संबंधी मानक निर्धारित नहीं हैं, उनके लेबल पर ‘Analogue’ शब्द का उल्लेख होना चाहिए और ऐसे उत्पाद दूध या दूध उत्पादों वाली nomenclature का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
यूपी सरकार के फैसले का असर किन उत्पादों पर?
सरकार के ताजा आदेश के बाद एनालॉग पनीर, एनालॉग क्रीम, एनालॉग घी, एनालॉग छेना और एनालॉग खोवा समेत अन्य एनालॉग डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध केवल दुकान पर बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण और भंडारण पर भी सख्ती की गई है।
यहां एक जरूरी बात फिर समझना जरूरी है—उत्तर प्रदेश में सामान्य पनीर, घी, क्रीम, छेना या खोवा पर प्रतिबंध नहीं लगा है। यानी जो उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुसार दूध या दूध के अनुमत घटकों से बनाए जाते हैं, उनकी बिक्री जारी रहेगी। कार्रवाई उन उत्पादों के खिलाफ है जिन्हें डेयरी उत्पाद के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है या जो सरकार के आदेश के दायरे में आने वाले एनालॉग उत्पाद हैं।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध और उससे बने उत्पादों को लेकर कई जिलों में जांच अभियान चलाया। छापेमारी और नमूना जांच के दौरान मिलावट तथा संदिग्ध सामग्री से जुड़े मामले सामने आने की रिपोर्ट है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य विभाग ने लगभग 7,686 किलोग्राम संदिग्ध या मिलावटी डेयरी सामग्री नष्ट कराई, जबकि करीब 2,131 किलोग्राम पनीर जब्त किया गया। छह मामलों में FIR दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। कई नमूनों की प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया भी चल रही है।
बाबा रामदेव का सरकारी नौकरियों पर बड़ा दावा, बोले- सुधर जाओ नहीं तो फिर आंदोलन करना पड़ेगा
दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और बड़ी मात्रा में संदिग्ध डेयरी सामग्री को नष्ट कराया गया है।
मिलावट में किन चीजों का इस्तेमाल होने की शिकायत?
रिपोर्टों में कुछ संदिग्ध डेयरी उत्पादों में वनस्पति वसा, तेल, सोया आधारित सामग्री और अन्य गैर-दुग्ध पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में टैल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, तरल ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसी सामग्री का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी खास जब्त उत्पाद में इनमें से कौन-सा पदार्थ मिला, इसका अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही माना जाना चाहिए।
इसलिए हर एनालॉग उत्पाद को एक जैसा मानना भी सही नहीं होगा। कानूनी रूप से घोषित और सही लेबल वाला एनालॉग उत्पाद अलग विषय है, जबकि मिलावटी या गलत नाम से बेचा जा रहा उत्पाद अलग।
देश के दूसरे राज्यों में भी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य नहीं है जहां एनालॉग डेयरी उत्पादों को लेकर सख्ती की गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कुछ अन्य राज्यों में भी एनालॉग पनीर और इसी तरह के उत्पादों को लेकर कार्रवाई की गई है।
वहीं FSSAI के स्तर पर भी डेयरी एनालॉग को लेकर नियामकीय व्यवस्था और मानकों पर काम जारी है। FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर डेयरी एनालॉग्स के लिए मानकों का अलग उल्लेख है और 2026 के सार्वजनिक नोटिसों में चीज एनालॉग निर्माताओं से जुड़े निर्देश भी सूचीबद्ध हैं।
ग्राहकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
दूध से बने उत्पाद खरीदते समय ग्राहक को केवल कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पैकेट वाले उत्पाद पर लेबल, सामग्री, FSSAI लाइसेंस संबंधी जानकारी और उत्पाद की सही श्रेणी जरूर देखनी चाहिए।
खुले में बिकने वाले पनीर, खोवा या अन्य डेयरी उत्पादों के मामले में भी अत्यधिक सस्ती कीमत, असामान्य रंग, गंध या बनावट संदेह पैदा कर सकती है। हालांकि केवल देखकर किसी उत्पाद को मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। वास्तविक पुष्टि के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी है।
सरकार की कार्रवाई का मकसद
योगी सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य डेयरी उत्पादों के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली बिक्री पर रोक लगाना और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। FSSAI के दस्तावेज भी इस बात पर जोर देते हैं कि एनालॉग उत्पादों की सही पहचान और लेबलिंग होनी चाहिए, ताकि ग्राहक को यह पता रहे कि वह वास्तव में क्या खरीद रहा है।
इसलिए इस पूरे मामले को केवल ‘पनीर-घी पर बैन’ के रूप में देखना सही नहीं होगा। सही तथ्य यह है कि उत्तर प्रदेश में एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर सरकार ने सख्ती की है, जबकि मानकों के अनुरूप असली दूध से बने पनीर, घी, खोवा, छेना और क्रीम पर सामान्य प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
Uttar Pradesh has taken strict action against analogue dairy products, including analogue paneer, analogue ghee, cream, khoya and chhena. The UP government’s latest move focuses on the manufacturing, storage and sale of analogue dairy products and aims to prevent consumers from being misled by products sold as traditional milk products. FSSAI regulations distinguish dairy products from dairy analogues and require proper identification and labelling of analogue products. The latest UP food safety action comes amid concerns over adulterated paneer and other dairy products, making the Uttar Pradesh analogue dairy products ban an important food safety development.



















