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बाबा रामदेव का सरकारी नौकरियों पर बड़ा दावा, बोले- सुधर जाओ नहीं तो फिर आंदोलन करना पड़ेगा

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AIN NEWS 1 हरिद्वार, 15 अगस्त 2026: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योगगुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया, इंटरव्यू सिस्टम, पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां होती हैं और कई मामलों में योग्यता के बजाय पहचान, संगठन, जाति, वर्ग या पैसे का प्रभाव देखने को मिलता है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि इंटरव्यू के दौरान 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है।

रामदेव के इस बयान के बाद सरकारी भर्ती व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, उनके 90 से 99 प्रतिशत वाले दावे को समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में यह आंकड़ा रामदेव के आरोप या दावे के रूप में सामने आया है। ऐसा कोई स्वतंत्र सरकारी आंकड़ा या आधिकारिक जांच फिलहाल सामने नहीं है, जिससे पूरे देश की सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत भ्रष्टाचार की पुष्टि होती हो।

सरकारी नौकरी के इंटरव्यू को लेकर क्या बोले रामदेव?

बाबा रामदेव ने भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय नहीं होता। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में चयन प्रक्रिया प्रभावित की जाती है और पसंदीदा उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की कोशिश होती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर पहले से चयन तय होने और पैसे या रिश्वत के आधार पर भर्ती किए जाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं। रामदेव के मुताबिक अगर मेहनत और योग्यता के बावजूद किसी युवा को केवल इसलिए मौका नहीं मिलता क्योंकि उसके पास सिफारिश या पैसा नहीं है, तो इससे युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।

उन्होंने भर्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत करने वाले युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि अंतिम चयन निष्पक्ष तरीके से होगा।

सुधर जाओ, नहीं तो फिर आंदोलन करना पड़ेगा’

बाबा रामदेव के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा उनकी आंदोलन को लेकर दी गई चेतावनी रही। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में समय रहते सुधार किया जाना चाहिए। अगर भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां, पेपर लीक और अन्य समस्याएं दूर नहीं की गईं तो युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है।

रामदेव ने संकेत दिया कि यदि हालात नहीं सुधरे तो उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नाम पर अराजकता के समर्थक नहीं हैं। उनका कहना था कि व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन विरोध लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

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पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी चिंता

सरकारी नौकरी के इंटरव्यू के अलावा बाबा रामदेव ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी समस्याओं का भी मुद्दा उठाया। देश के अलग-अलग हिस्सों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं के प्रदर्शन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उनका कहना था कि आज का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक है। यदि परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में लगातार सवाल उठते रहेंगे तो युवाओं का आक्रोश आंदोलन का रूप ले सकता है। हाल के दिनों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कई जगह युवाओं के प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

रामदेव ने सिर्फ सरकारी नौकरी तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक देश के कई हिस्सों में बच्चों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं की समस्या का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कहीं स्कूलों में शिक्षक पर्याप्त संख्या में नहीं हैं, तो कहीं पीने के पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव है। कुछ जगह किताबें उपलब्ध हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षक हैं तो जरूरी संसाधनों की कमी है।

रामदेव के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था मजबूत किए बिना रोजगार और सरकारी नौकरी से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनका तर्क है कि बेहतर शिक्षा मिलने के बाद ही युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में बराबरी के साथ मुकाबला कर पाएंगे।

युवाओं के गुस्से को लेकर क्या बोले?

बाबा रामदेव ने देश में युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि जब युवा वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और फिर परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की खबरें सामने आती हैं, तो उनका निराश होना स्वाभाविक है।

उन्होंने सरकार और व्यवस्था से ऐसी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की। उनके मुताबिक दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, अगर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार साबित होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

90 से 99 प्रतिशत वाले दावे की सच्चाई क्या है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 90 से 99 प्रतिशत घोटाले का दावा फिलहाल प्रमाणित आंकड़ा नहीं है। यह संख्या बाबा रामदेव ने अपने बयान के दौरान बताई है। मीडिया रिपोर्टों ने भी इसे उनके दावे के तौर पर प्रकाशित किया है।

इसलिए इसे खबर में सीधे स्थापित तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा। सही पत्रकारिता यह होगी कि लिखा जाए—“बाबा रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है।”

इसी तरह पैसे लेकर नौकरी देने और भर्ती में पक्षपात के आरोप भी रामदेव के बयान का हिस्सा हैं। इनके समर्थन में किसी विशेष भर्ती या मामले की आधिकारिक जांच का उल्लेख किए बिना इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

अब आगे क्या?

बाबा रामदेव के इस बयान ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार या संबंधित भर्ती संस्थाएं उनके लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया देती हैं या नहीं।

फिलहाल रामदेव का संदेश साफ है—भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और अगर व्यवस्था में गड़बड़ियां हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने आंदोलन की संभावना का संकेत जरूर दिया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह अराजकता के समर्थन में नहीं हैं।

यानी इस पूरे मामले में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है—बाबा रामदेव ने वास्तव में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाले का दावा और आंदोलन की चेतावनी दी है, लेकिन इस प्रतिशत को सरकारी तौर पर प्रमाणित तथ्य मानना अभी सही नहीं होगा।

Baba Ramdev has raised serious concerns over corruption and irregularities in government job interviews, recruitment examinations and paper leak cases in India. On Independence Day 2026, he claimed that 90-99% corruption occurs during some government job interviews and warned that youth protests could intensify if recruitment irregularities are not addressed. His statement has renewed debate over government job recruitment transparency, paper leaks, education system reforms and fair selection of candidates. It is important to note that the 90-99% figure is Baba Ramdev’s claim and has not been independently established as an official nationwide statistic.

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