तजीन फातिमा ने कहा- यूनिवर्सिटी का काम संभालते ही दर्ज हो गए 60-70 मुकदमे
AIN NEWS 1: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर उनकी पत्नी एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तजीन फातिमा ने एक बार फिर अपनी बात खुलकर रखी है। जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहे विवाद के बीच तजीन फातिमा ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
एक इंटरव्यू में तजीन फातिमा ने कहा कि राजनीति में आने से पहले वह एक डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थीं। उनके मुताबिक, रिटायरमेंट तक उनकी ईमानदारी पर किसी ने सवाल नहीं उठाया। लेकिन जब उन्होंने यूनिवर्सिटी का काम संभालना शुरू किया, तो उनके खिलाफ अचानक बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हो गए।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक समय में उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्हें रातों-रात अपराधी बना दिया गया हो। उनके अनुसार, उनके ऊपर 60-70 मुकदमे दर्ज किए गए और अपराधियों से जुड़े तमाम आरोप भी उनके नाम से जोड़ दिए गए।
हालांकि, इन मुकदमों की संख्या और उनके पीछे राजनीतिक बदले की भावना होने का दावा तजीन फातिमा का पक्ष है। इसे न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर क्या है विवाद?
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार की राजनीति का प्रमुख केंद्र रही है। अब यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण को लेकर रामपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA के साथ विवाद चल रहा है।
RDA ने यूनिवर्सिटी परिसर के 38 भवनों को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का आरोप है कि इन निर्माणों के लिए सक्षम प्राधिकारी से नक्शे स्वीकृत नहीं कराए गए थे।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इस कार्रवाई को चुनौती दी है। उसका मुख्य तर्क है कि जब यूनिवर्सिटी का निर्माण हुआ, उस समय सींगनखेड़ा गांव RDA के अधिकार क्षेत्र में नहीं था। ऐसे में RDA से नक्शा पास कराने की बाध्यता पर ही सवाल उठता है।
यही मुद्दा फिलहाल पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू बना हुआ है।
सींगनखेड़ा गांव कब RDA के दायरे में आया?
तजीन फातिमा ने बातचीत में दावा किया कि रामपुर विकास प्राधिकरण वर्ष 2005 में बना था और जिस सींगनखेड़ा गांव में जौहर यूनिवर्सिटी स्थित है, वह उस समय RDA की सीमा में नहीं था।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 2005 में RDA के गठन के समय सींगनखेड़ा उसके दायरे में शामिल नहीं था।
हालांकि, तजीन फातिमा की ओर से 2015 में गांव को RDA के दायरे में शामिल किए जाने की बात कही गई है। इस तारीख को लेकर उपलब्ध हालिया रिपोर्टों में अलग जानकारी सामने आती है। कुछ रिपोर्टों में सींगनखेड़ा को 27 सितंबर 2024 को RDA की सीमा में शामिल किए जाने का उल्लेख किया गया है।
इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष सरकारी अधिसूचना और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
‘जब RDA के दायरे में नहीं था तो नक्शा कैसे पास होता?’
तजीन फातिमा का तर्क है कि जिस समय यूनिवर्सिटी का निर्माण हुआ, उस समय सींगनखेड़ा RDA के अधीन नहीं था। ऐसे में उनसे RDA से नक्शा पास कराने की मांग किस आधार पर की जा रही है, यह सवाल उठता है।
उन्होंने कहा कि गांव में केवल यूनिवर्सिटी ही नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के मकान भी बने हुए हैं। उनके अनुसार, अगर नक्शा पास नहीं होने को ही कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है तो प्रशासन को दूसरे निर्माणों की स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए।
इसी क्रम में उन्होंने DM और SSP के सरकारी आवासों के नक्शों को लेकर भी सवाल खड़ा किया।
लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि DM और SSP के सरकारी आवासों के नक्शे स्वीकृत नहीं होने का कोई स्वतंत्र और आधिकारिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। इसलिए इसे तथ्य की तरह नहीं, बल्कि तजीन फातिमा द्वारा उठाए गए सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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RDA के आदेश को मिली थी चुनौती
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने के RDA के आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कानूनी रास्ता अपनाया। मामला मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर कोर्ट तक पहुंचा।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कमिश्नर कोर्ट से यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत मिली और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
इसका मतलब यह है कि RDA की ओर से ध्वस्तीकरण का आदेश जारी होना एक तथ्य है, लेकिन 38 भवनों को अंतिम रूप से अवैध घोषित कर गिरा दिया गया है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। मामले में कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
केवल भवन ही नहीं, सड़क को लेकर भी विवाद
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद केवल भवनों तक सीमित नहीं है। यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर से गुजरने वाली सड़क को लेकर भी प्रशासन और यूनिवर्सिटी प्रबंधन आमने-सामने हैं।
PWD की ओर से इस रास्ते को सार्वजनिक मार्ग बताए जाने और वहां बोर्ड लगाए जाने की कार्रवाई की गई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इसका भी विरोध किया।
इस तरह जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद में भवनों के नक्शे, RDA का अधिकार क्षेत्र और परिसर से गुजरने वाली सड़क जैसे कई अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे शामिल हो गए हैं।
आजम खान के राजनीतिक भविष्य पर भी बोलीं तजीन फातिमा
इंटरव्यू में जब आजम खान के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया तो तजीन फातिमा ने कहा कि उन्होंने कभी आजम खान को राजनीति छोड़ने की सलाह नहीं दी।
उन्होंने कहा कि उनके लिए राजनीति से भी बड़ी उपलब्धि जौहर यूनिवर्सिटी है। तजीन फातिमा के मुताबिक, यूनिवर्सिटी बनाने में आजम खान के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के समर्थन का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, पार्टी ने मुश्किल दौर में उनके परिवार का साथ दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि शिवपाल सिंह यादव जेल में आजम खान से मिलने पहुंचे थे और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।
परिवार पर लगे मामलों को बताया राजनीतिक दुश्मनी
आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से कई मामले चल रहे हैं। तजीन फातिमा का कहना है कि इन मामलों के पीछे राजनीतिक दुश्मनी है।
हालांकि, परिवार से जुड़े सभी मामलों को केवल राजनीतिक कार्रवाई कहना भी पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि कई मामलों में अदालतों में सुनवाई हुई है और कुछ मामलों में न्यायिक फैसले भी सामने आए हैं।
इसलिए इस पूरे विवाद को समझते समय आरोप, प्रशासन की कार्रवाई और अदालत के फैसले—तीनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फिलहाल क्या है पूरे मामले का सार?
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के समय संबंधित क्षेत्र किस प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में था और उस समय भवन निर्माण के लिए किस प्राधिकरण से अनुमति लेना जरूरी था।
RDA का कहना है कि 38 भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं हैं और इसी आधार पर कार्रवाई की गई। वहीं यूनिवर्सिटी पक्ष का कहना है कि निर्माण के समय सींगनखेड़ा RDA के क्षेत्र में नहीं था, इसलिए RDA के नक्शे का सवाल ही नहीं उठता था।
तजीन फातिमा ने प्रशासन की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी इसी संदर्भ में देखा है। दूसरी ओर, प्रशासन की कार्रवाई आधिकारिक आदेशों और भवन निर्माण संबंधी नियमों के आधार पर बताई गई है।
इसलिए अभी सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है कि जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों का विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मामला कानूनी प्रक्रिया में है और अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक/प्रशासनिक फैसले से ही स्पष्ट होगी।
The Jauhar University Rampur controversy involving Azam Khan and Tazeen Fatma continues to remain a major political and legal issue in Uttar Pradesh. The Rampur Development Authority (RDA) has taken action against 38 buildings at Mohammad Ali Jauhar University, citing construction without approved building maps. Tazeen Fatma has challenged the action and argued that the area was outside RDA jurisdiction when the university was constructed. The latest developments involve the Jauhar University demolition case, RDA Rampur, building map approval, Azam Khan latest news, Tazeen Fatma statement and the legal dispute over Seengankheda village. The matter remains subject to ongoing legal proceedings, and a final determination regarding the disputed buildings is still awaited.



















