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हाफिज सईद ने कश्मीर भेजे 10 हजार आतंकी? पाकिस्तानी मौलाना के बयान से मचा हड़कंप

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AIN NEWS 1: पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रमुख हाफिज सईद को लेकर दिया गया एक बयान इन दिनों चर्चा में है। पाकिस्तान के एक मौलाना ने कथित तौर पर सार्वजनिक मंच से दावा किया कि हाफिज सईद ने कश्मीर में लड़ने के लिए करीब 10 हजार आतंकियों को भेजा था। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब हाफिज सईद खुद पाकिस्तान की जेल में सजा काट रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से आतंकवाद से जुड़े मामलों में प्रतिबंधित है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह बयान पाकिस्तान के बहावलनगर में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान मौलाना नसीर मदनी ने दिया। उनके भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसके बाद भारत में भी इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, 10 हजार आतंकियों वाले दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने वाली कोई आधिकारिक सूची या दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल मौलाना नसीर मदनी का दावा ही माना जाना चाहिए।

मंच से क्या बोले मौलाना नसीर मदनी?

रिपोर्टों के अनुसार, नसीर मदनी ने अपने संबोधन में हाफिज सईद का जिक्र करते हुए दावा किया कि उसने कश्मीर में कथित तौर पर हजारों आतंकियों को भेजा था। उनके भाषण का अंदाज काफी आक्रामक बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि हाफिज सईद को इसी वजह से पाकिस्तान में सजा भुगतनी पड़ रही है। बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल भाषण के दौरान किया गया अतिशयोक्तिपूर्ण दावा है या फिर इसके पीछे किसी पुराने नेटवर्क या गतिविधि की जानकारी छिपी है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय नसीर मदनी के कथित बयान के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।

कौन है हाफिज सईद?

हाफिज मुहम्मद सईद लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और जमात-उद-दावा से जुड़ा प्रमुख चेहरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची के मुताबिक, हाफिज सईद को 10 दिसंबर 2008 को सूचीबद्ध किया गया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वह लश्कर-ए-तैयबा का नेता रहा है और संगठन से जुड़ी आतंकवादी गतिविधियों के कारण उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं।

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड में लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान आधारित संगठन बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार संगठन ने भारत समेत कई स्थानों पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है। रिकॉर्ड में 2008 के मुंबई आतंकी हमलों सहित कई बड़े हमलों में लश्कर की भूमिका का उल्लेख है।

भारत सरकार ने भी हाफिज सईद को आतंकवाद से जुड़े मामलों में नामित किया है। गृह मंत्रालय के दस्तावेज में उसे लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और प्रमुख नेता बताया गया है तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2008 में वैश्विक आतंकवादी के तौर पर सूचीबद्ध किए जाने का उल्लेख है।

पाकिस्तान की जेल में सजा काट रहा है हाफिज सईद

हाफिज सईद को पाकिस्तान में आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामलों में अदालत से सजा मिल चुकी है। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध रिकॉर्ड के अनुसार वह पाकिस्तान सरकार की हिरासत में 78 साल की कुल सजा काट रहा है। यह सजा सात आतंक वित्तपोषण मामलों में हुई सजाओं से संबंधित है और 12 फरवरी 2020 से प्रभावी बताई गई है।

पाकिस्तान की अदालतों में उसके खिलाफ आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े कई मामले चले। नवंबर 2020 में भी एक मामले में उसे साढ़े पांच साल की सजा सुनाई गई थी। उस समय की रिपोर्टों में बताया गया था कि उसके खिलाफ आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामलों में लगातार कानूनी कार्रवाई चल रही थी।

यानी नसीर मदनी के बयान में जिस बात को लेकर यह कहा गया कि हाफिज सईद को सजा भुगतनी पड़ रही है, उसके पीछे पाकिस्तान में दर्ज आतंक वित्तपोषण के मामले और अदालतों के फैसले मौजूद हैं। हालांकि, यह अलग सवाल है कि उसके खिलाफ दी गई सजा का संबंध कश्मीर में कथित तौर पर 10 हजार आतंकियों को भेजने के दावे से है या नहीं। उपलब्ध प्रमाण इस बात की पुष्टि नहीं करते।

10 हजार आतंकियों का दावा कितना बड़ा है?

नसीर मदनी के कथित बयान में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात 10 हजार आतंकियों का आंकड़ा है। यदि इस दावे को सही माना जाए तो यह बेहद गंभीर और बड़ा दावा होगा। लेकिन किसी भी बड़े आतंकी नेटवर्क से संबंधित संख्या को केवल भाषण या सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर तथ्य नहीं माना जा सकता।

ऐसे दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेज, खुफिया रिकॉर्ड, अदालत के दस्तावेज या स्वतंत्र जांच जैसी ठोस जानकारी की जरूरत होगी। फिलहाल सामने आई रिपोर्टों में ऐसी स्वतंत्र पुष्टि दिखाई नहीं देती।

इसलिए खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकिस्तान के एक मौलाना ने सार्वजनिक मंच से ऐसा दावा किया है, न कि यह कि 10 हजार आतंकियों की संख्या आधिकारिक तौर पर साबित हो चुकी है।

कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा का पुराना नेटवर्क

लश्कर-ए-तैयबा का नाम कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों से लंबे समय से जुड़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड में संगठन को पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन बताया गया है और उसके द्वारा भारत में कई आतंकवादी हमलों में शामिल होने का उल्लेख है।

हाफिज सईद को भी संयुक्त राष्ट्र ने लश्कर-ए-तैयबा से उसके नेतृत्व और गतिविधियों के कारण प्रतिबंधित सूची में रखा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक उस पर आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण, योजना और उन्हें सुविधाजनक बनाने से संबंधित गंभीर आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई थी।

यही वजह है कि नसीर मदनी का ताजा कथित बयान केवल पाकिस्तान के अंदर की राजनीतिक या धार्मिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें कश्मीर में आतंकवाद और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की भूमिका को लेकर पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं।

बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?

नसीर मदनी का कथित बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें हाफिज सईद की भूमिका को लेकर ऐसी बात कही गई है, जो सीधे कश्मीर में आतंकी गतिविधियों से जोड़ती है। इससे एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े पुराने नेटवर्क किस तरह सार्वजनिक मंचों पर चर्चा में आते रहे हैं।

हालांकि, पत्रकारिता के लिहाज से इस मामले में सावधानी बेहद जरूरी है। किसी वक्ता द्वारा मंच से किया गया दावा और किसी जांच एजेंसी द्वारा प्रमाणित तथ्य अलग-अलग चीजें हैं। इसलिए 10 हजार आतंकियों वाली बात को फिलहाल ‘मौलाना नसीर मदनी का दावा’ कहना ही तथ्यात्मक रूप से सुरक्षित है।

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भारत के लिए क्या मायने रखता है?

कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों पर भारत और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से लगातार गंभीर कार्रवाई की मांग होती रही है।

ऐसे में यदि पाकिस्तान के भीतर से ही कोई सार्वजनिक व्यक्ति किसी आतंकी संगठन के पुराने नेटवर्क या गतिविधियों को लेकर कोई दावा करता है, तो उसकी जांच और सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर तब, जब दावा किसी प्रतिबंधित संगठन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध आतंकवादी से जुड़ा हो।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में दिए गए एक कथित भाषण में मौलाना नसीर मदनी ने हाफिज सईद पर कश्मीर में 10 हजार आतंकियों को भेजने का दावा किया है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम कश्मीर तथा भारत में हुए आतंकी हमलों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में लंबे समय से मौजूद है। संयुक्त राष्ट्र ने हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा दोनों को प्रतिबंधित सूची में रखा है।

लेकिन नसीर मदनी द्वारा कथित तौर पर बताए गए 10 हजार आतंकियों के आंकड़े को अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र और आधिकारिक सबूत की जरूरत होगी। यही अंतर इस खबर को रिपोर्ट करते समय सबसे महत्वपूर्ण है—बयान सामने आया है, लेकिन उसके हर हिस्से की पुष्टि होना अभी बाकी है।

Hafiz Saeed, Lashkar-e-Taiba and Kashmir terrorism are once again in the spotlight after Pakistani cleric Nasir Madni reportedly claimed that Hafiz Saeed sent 10,000 terrorists to Kashmir. The statement has raised questions about Pakistan-based terror networks, Lashkar-e-Taiba’s activities and Hafiz Saeed’s alleged role, although the specific claim of 10,000 militants has not been independently verified.

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