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मेरठ में नए SSP का बड़ा एक्शन: सिविल लाइंस इंस्पेक्टर समेत 8 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, किसान नेताओं से कथित मारपीट की जांच तेज

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AIN NEWS 1: मेरठ में पुलिस महकमे में एक विवादित प्रकरण के बाद कार्रवाई का सिलसिला जारी है। किसान नेता दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में नए SSP BBGTS मूर्ति ने बड़ा कदम उठाया है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर रेंज के DIG अभिषेक सिंह को दी गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इस प्रकरण को लेकर मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय को भी मेरठ से हटा दिया गया था। नए कप्तान के चार्ज संभालने के बाद पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई को मामले की जांच को निष्पक्ष रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

मामला 19 अगस्त 2026 का बताया जा रहा है। किसान नेता दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव पुलिस अधिकारियों से मिलने मेरठ के SSP कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनने की बात सामने आई।

दिग्विजय भाटी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि SSP कार्यालय में उनके साथ अभद्रता की गई और मारपीट की गई। आरोप है कि इसके बाद उन्हें और उनके साथी को सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित SOG कार्यालय ले जाया गया, जहां उनके साथ कथित तौर पर दोबारा मारपीट की गई।

पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर थर्ड डिग्री देने और अमानवीय व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में आ गया।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आरोपों की अभी जांच चल रही है। जांच पूरी होने से पहले इन्हें पुलिस द्वारा की गई साबित कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

‘चोली के पीछे क्या है’ गाने पर डांस कराने का आरोप

इस पूरे मामले में किसान नेता दिग्विजय भाटी की ओर से लगाया गया एक आरोप सबसे ज्यादा चर्चा में है।

भाटी का दावा है कि कथित हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने मोबाइल या अन्य माध्यम से ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना चलाया और उन्हें तथा मोहित जाटव को उस गाने पर डांस करने के लिए मजबूर किया गया।

उन्होंने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ बेहद खराब व्यवहार किया गया। भाटी के मुताबिक, कथित मारपीट के कारण उनकी हालत ऐसी थी कि वे ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे, फिर भी उन्हें नाचने के लिए मजबूर किया गया।

यह आरोप सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आया है। हालांकि, डांस कराने संबंधी दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए खबर में इसे पीड़ित पक्ष का आरोप ही माना जाना चाहिए।

तत्कालीन SSP पर भी लगाए गए गंभीर आरोप

दिग्विजय भाटी ने तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। भाटी का दावा है कि पुलिस अधिकारी ने उनके पहनावे और नेता होने को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे कथित रूप से कहा गया कि कम कीमत के कुर्ते-पायजामे पहनकर लोग नेता बन रहे हैं। इसके बाद मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया।

भाटी का यह भी दावा है कि इसके बाद उन्हें इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ के पास ले जाया गया और वहां कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई।

इन आरोपों की भी जांच DIG अभिषेक सिंह कर रहे हैं।

नए SSP ने चार्ज संभालते ही लिया एक्शन

मेरठ के नए SSP BBGTS मूर्ति ने कार्यभार संभालने के बाद इस मामले को गंभीरता से लिया। जांच प्रभावित न हो और पूरे मामले में निष्पक्षता बनी रहे, इसके लिए सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया।

लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों में शामिल हैं:

इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार गौड़

उपनिरीक्षक मुलायम सिंह

हेड कांस्टेबल हरिओम

कांस्टेबल मुकेश कुमार

हेड कांस्टेबल श्याम बाबू

कांस्टेबल सुमित कुमार

महिला कांस्टेबल नीलम लौर

चालक ललित कुमार

यह कार्रवाई सीधे तौर पर मामले की जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा के तौर पर देखी जा रही है।

DIG अभिषेक सिंह कर रहे जांच

मामले की जांच सहारनपुर रेंज के DIG अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच अधिकारी संबंधित पुलिसकर्मियों और शिकायतकर्ताओं से पूछताछ कर रहे हैं।

बताया गया है कि DIG ने मामले से जुड़े लोगों से करीब एक घंटे तक पूछताछ की। जांच में घटना के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका, हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियां और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल की जा रही है।

जांच के दौरान CCTV फुटेज, उपलब्ध वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, जांच में वास्तव में किन-किन साक्ष्यों को शामिल किया गया है, इसकी पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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पुलिस का पक्ष भी सामने आया

जहां एक तरफ किसान नेता और उनके साथी ने पुलिस पर मारपीट और यातना के आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस की ओर से अलग दावा सामने आया है।

पुलिस पक्ष में यह कहा गया है कि दोनों व्यक्तियों को चोटें स्कूटी से गिरने के कारण आई थीं। साथ ही पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया है।

यही वजह है कि फिलहाल पूरे मामले में किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और किस पुलिसकर्मी की क्या भूमिका रही।

पूर्व SSP के हटने के बाद बढ़ा दबाव

इस विवाद के बीच मेरठ के तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय को भी पद से हटा दिया गया। इसके बाद BBGTS मूर्ति को मेरठ की जिम्मेदारी दी गई।

नए SSP के आते ही सिविल लाइंस थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने से साफ है कि अधिकारी मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। हालांकि लाइन हाजिर होना अपने आप में किसी पुलिसकर्मी को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष और आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

अब आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण नजर DIG अभिषेक सिंह की जांच रिपोर्ट पर है। जांच में यदि पुलिसकर्मियों की भूमिका या आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे विभागीय या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो पुलिस अपना पक्ष भी मजबूती से सामने रख सकती है।

फिलहाल इतना जरूर है कि मेरठ में इस मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नए SSP द्वारा आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने और DIG स्तर की जांच से संकेत मिलता है कि प्रशासन मामले को हल्के में नहीं ले रहा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मारपीट, थर्ड डिग्री और डांस कराने जैसे आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के बजाय संबंधित नेताओं के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

Meerut Police Action: New Meerut SSP BBGTS Murthy has taken major action in the alleged assault case involving farmer leaders Digvijay Bhati and Mohit Jatav. Civil Lines Inspector Akhilesh Gaur and seven other policemen have been sent to the police lines while DIG Abhishek Singh is conducting an investigation. The case has raised serious questions about police conduct in Meerut, while allegations of assault, third-degree treatment and forced dancing remain under investigation.

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