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“जब देश संकट में हो, सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता: पहल्गाम आतंकी हमले पर बोले अगली CJI बी.आर. गवई”!

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CJI Designate BR Gavai Reacts to Pahalgam Terror Attack, Says Supreme Court Stands with the Nation

“पहल्गाम आतंकी हमले पर बोले अगले मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई – ‘देश संकट में हो तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता'”

 

AIN NEWS 1: भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India designate) जस्टिस बी.आर. गवई ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब देश संकट में हो, तो सुप्रीम कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थान अलग नहीं रह सकते।

उन्होंने कहा, “जब हमें इस हमले की खबर मिली, तो हम स्तब्ध रह गए। देश पर जब हमला होता है, तो हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि एकजुट होकर उसका जवाब दें। सुप्रीम कोर्ट देश का हिस्सा है और ऐसे समय में हमारी चुप्पी उचित नहीं होती।”

मुख्य न्यायाधीश से अनुमति लेकर बुलाई फुल कोर्ट मीटिंग

जस्टिस गवई ने बताया कि उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश देश में नहीं थे। ऐसे में उन्होंने उनसे अनुमति लेकर तुरंत एक फुल कोर्ट मीटिंग (Full Court Meeting) बुलाई। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने हिस्सा लिया और हमले की गंभीरता पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, “हम सभी न्यायाधीशों ने एकमत से निर्णय लिया कि इस भयानक आतंकी घटना के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जाए। यह केवल संवेदनात्मक कदम नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी था कि न्यायपालिका आतंक के खिलाफ देश के साथ खड़ी है।”

सुप्रीम कोर्ट परिसर में दो मिनट का मौन

बैठक के बाद, सुप्रीम कोर्ट परिसर में दो मिनट का मौन रखा गया। इस मौन के जरिए उन निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई।

इस अवसर पर जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि “देशवासियों की पीड़ा में भागीदार होना हमारा नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। जो लोग देश की एकता और अखंडता को तोड़ना चाहते हैं, उनके खिलाफ हम सबको मिलकर खड़ा होना होगा।”

न्यायपालिका की एकजुटता का प्रतीक

यह पहल न्यायपालिका की एकजुटता और संवेदनशीलता का प्रतीक है। आमतौर पर न्यायपालिका प्रशासनिक मामलों में सीमित भूमिका निभाती है, लेकिन इस तरह के कदम यह दर्शाते हैं कि जब देश संकट में होता है, तो हर संस्था को अपने कर्तव्यों का विस्तार करना होता है।

न्यायालय का यह कदम संदेशवाहक

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम देशभर में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि आतंकी घटनाओं के खिलाफ देश की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था भी भावनात्मक रूप से जनता के साथ खड़ी है। यह संकेत भी देता है कि आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को लेकर अदालतें भी संवेदनशील रवैया अपनाएंगी।

पहल्गाम हमले की पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पहलगाम में हुए हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में कई निर्दोष लोग मारे गए और देशभर में गुस्से और शोक की लहर दौड़ गई है। सरकार और सुरक्षाबलों ने इस हमले के दोषियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस हमले के बाद देश की विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं ने कड़ी निंदा की है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस भावनात्मक और ठोस कदम से यह उम्मीद की जा रही है कि देशभर में न्याय और एकता की भावना और मजबूत होगी।

जस्टिस बी.आर. गवई का यह बयान और उनकी पहल न केवल न्यायपालिका की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था भी राष्ट्र की सुरक्षा और शांति के मुद्दों पर समान रूप से सक्रिय है।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट का यह कदम आने वाले समय में एक नई परंपरा की शुरुआत हो सकती है, जिसमें न्यायिक संस्थाएं भी राष्ट्र के अहम सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर अपनी भागीदारी दर्शाएं।

Chief Justice of India designate BR Gavai made a heartfelt statement on the recent Pahalgam terror attack, underlining that the Supreme Court of India cannot remain aloof when the nation is in crisis. Justice Gavai convened a full court meeting after receiving permission from the current Chief Justice, who was abroad. Following the meeting, a two-minute silence was observed across the Supreme Court to honour the victims of terrorism. This strong judicial response sends a clear message of national solidarity and judicial commitment to justice and peace in the wake of terror attacks in India.

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