7 Essential Property Documents You Must Verify Before Buying Real Estate in India
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ज़रूर जांचें ये 7 ज़रूरी दस्तावेज, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान!
AIN NEWS 1: भारत में प्रॉपर्टी खरीदना एक बड़ा निवेश होता है और इसमें छोटी सी गलती भी आपको लाखों का नुकसान करवा सकती है। इसलिए अगर आप फ्लैट, जमीन या मकान खरीदने जा रहे हैं, तो सबसे पहले उससे जुड़े दस्तावेजों की गहराई से जांच-पड़ताल करना जरूरी है। नीचे बताए गए 7 दस्तावेज सबसे अहम माने जाते हैं। इनकी जांच के बिना कोई भी सौदा न करें, चाहे डील कितनी भी फायदेमंद क्यों न लगे।
1. सेल डीड (Sale Deed): मालिकाना हक का सबसे बड़ा सबूत
सेल डीड यानी विक्रय विलेख वो दस्तावेज होता है जो बताता है कि संपत्ति किसके नाम पर ट्रांसफर हुई है। यही वह दस्तावेज है जिसके जरिए संपत्ति का स्वामित्व पिछले मालिक से नए खरीदार को स्थानांतरित होता है।
ध्यान दें:
इसे रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
रजिस्ट्री के बिना यह वैध नहीं मानी जाएगी।
इस पर सभी पक्षों के हस्ताक्षर होना चाहिए।
2. खाता प्रमाणपत्र और खाता एक्सट्रैक्ट (Khata Certificate / Extract): नगरपालिका रिकॉर्ड में नाम दर्ज है या नहीं
यह दस्तावेज बताता है कि स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत में उस संपत्ति का रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज है।
खासकर:
यह बिल्डिंग टैक्स और म्युनिसिपल रिकार्ड से जुड़ा होता है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि संपत्ति वैध रूप से मालिक के नाम पर दर्ज है।
3. टाइटल डीड (Title Deed): संपत्ति की वैधता और स्वामित्व की पुष्टि
टाइटल डीड से यह पता चलता है कि संपत्ति का मालिक वास्तव में वैध है या नहीं। यह पिछले लेन-देन, वंशानुक्रम या किसी अन्य माध्यम से स्वामित्व के ट्रांसफर की जानकारी देता है।
जांचें:
क्या मालिक के पास सही अधिकार है बेचने का?
कहीं यह विवादित तो नहीं?
4. भारमुक्त प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate): कोई ऋण या कानूनी रुकावट तो नहीं?
यह प्रमाणपत्र दिखाता है कि उस प्रॉपर्टी पर कोई बकाया ऋण, बंधक, कोर्ट केस या कानूनी विवाद तो नहीं चल रहा।
कैसे मिलेगा:
इसे उप रजिस्ट्री कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।
13 साल तक का रिकॉर्ड देखा जा सकता है।
5. बिल्डिंग प्लान अप्रूवल (Approved Building Plan): नक्शे की वैधता जांचें
यदि आप फ्लैट या बिल्डिंग खरीद रहे हैं, तो यह जांचना जरूरी है कि उस भवन का नक्शा संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृत है या नहीं।
जरूरी बिंदु:
बिना अप्रूवल के निर्माण अवैध माना जाता है।
भविष्य में गिराने या कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है।
6. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate): कब और कैसे इस्तेमाल हुआ भवन?
यह सर्टिफिकेट तब जारी होता है जब निर्माण कार्य पूरा हो जाता है और स्थानीय प्राधिकरण यह घोषित करता है कि वह संपत्ति अब रहने योग्य है।
बिना इसके:
बैंक लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
बिजली, पानी जैसे कनेक्शन में दिक्कतें आ सकती हैं।
7. पॉसेशन लेटर (Possession Letter): कब्जा मिलने की तारीख
यह बिल्डर या विक्रेता द्वारा खरीदार को जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, जिसमें बताया जाता है कि संपत्ति का कब्जा किस तारीख को दिया जाएगा।
यह क्यों जरूरी है?
कानूनी रूप से कब्जा मिलने की पुष्टि करता है।
भविष्य में विवाद से बचाता है।
अतिरिक्त सुझाव:
प्रॉपर्टी खरीदते समय किसी वकील से दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि जरूर कराएं।
ज़रूरत पड़े तो रियल एस्टेट एक्सपर्ट की मदद लें।
अगर दस्तावेजों में कोई अस्पष्टता हो, तो सौदा टाल दें।
प्रॉपर्टी खरीदना एक बड़ा फैसला होता है। लेकिन सही दस्तावेजों की जांच के बिना यह सपना कब दुःस्वप्न बन जाए, कहा नहीं जा सकता। ऊपर बताए गए सभी 7 दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करें और फिर ही किसी सौदे को अंतिम रूप दें। याद रखें, थोड़ी सतर्कता आपको भविष्य के बड़े नुकसान से बचा सकती है।
Before buying any real estate property in India, it’s crucial to verify key property documents like the Sale Deed, Title Deed, Khata Certificate, Encumbrance Certificate, and Approved Building Plan. These legal documents ensure that the property is clear of legal disputes, loans, or fraudulent claims. Skipping document verification can lead to property fraud or ownership issues. Always cross-check all documents through the municipal or land authorities before finalizing your purchase.


















