AIN NEWS 1 | भारतीय सेना को अब एक ऐसा हथियार मिल गया है, जो दुश्मनों के लिए डर का दूसरा नाम बन चुका है। अपाचे AH-64E अटैक हेलीकॉप्टर की पहली खेप जोधपुर एयरबेस पर भारतीय थलसेना में शामिल कर दी गई है। इससे पहले अपाचे हेलीकॉप्टर केवल भारतीय वायुसेना के पास थे। अब थलसेना के पास भी यह शक्तिशाली विमान मौजूद हैं, जो भारत की पश्चिमी सीमाओं पर रक्षा को और मजबूत बनाएंगे।
क्या है अपाचे हेलीकॉप्टर की खासियत?
अपाचे AH-64E एक ऐसा लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जो एक मिनट में 128 टारगेट लॉक कर सकता है और एक साथ 16 टारगेट पर हमला कर सकता है। यह क्षमता इसे भीड़ वाले युद्धक्षेत्र में बेहद प्रभावी बनाती है।
रात में हमला भी आसान
इस हेलीकॉप्टर में लगे नाइट विज़न सिस्टम, थर्मल इमेजिंग सेंसर और Target Acquisition System पायलट को अंधेरे या खराब मौसम में भी सटीक हमला करने की क्षमता देते हैं।
Pilot Night Vision Sensor (PNVS) और अन्य एडवांस्ड कैमरे इसे रात में दुश्मनों के ठिकाने खोजने और उन पर हमला करने में सक्षम बनाते हैं।
रडार और संचार प्रणाली
अपाचे AH-64E में AN/APG-78 Longbow रडार और Joint Tactical Information Distribution System (JTIDS) मौजूद है। यह हेलीकॉप्टर अब नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में भी कारगर है। इसमें Ku-band पर डेटा ट्रांसफर की क्षमता है जो अन्य यूनिट्स से रीयल-टाइम कनेक्टिविटी देता है।
भयानक हथियारों से लैस
अपाचे हेलीकॉप्टर कई जानलेवा हथियारों से लैस होता है:
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AGM-114 Hellfire मिसाइलें: बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को नष्ट करने में सक्षम।
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Hydra 70 रॉकेट: जमीनी ठिकानों पर हमला करने वाले 70mm अनगाइडेड रॉकेट।
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Stinger मिसाइलें: हवा से हवा में मार करने में दक्ष।
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Spike NLOS मिसाइलें: 25+ किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को भेद सकती हैं।
उड़ान और रेंज की क्षमता
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अधिकतम स्पीड: 280–365 किमी/घंटा
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फ्लाइट टाइम: 3.5 घंटे
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रेंज: लगभग 500 किमी (बाहरी फ्यूल टैंक के साथ और अधिक)
यह लंबे समय तक दुश्मन की सीमा में घुसकर ऑपरेशन कर सकता है।
ड्रोन कंट्रोल और AI आधारित युद्ध प्रणाली
अपाचे AH-64E अब MQ-1C ग्रे ईगल जैसे ड्रोन को भी कंट्रोल कर सकता है। इसका मतलब है कि ये हेलीकॉप्टर अब मानव-मशीन टीमिंग (MUM-T) का हिस्सा बनकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ नेटवर्क वॉरफेयर में उपयोगी बन गए हैं।
मल्टी-डोमेन युद्ध क्षमता
अपाचे हेलीकॉप्टर को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह जमीनी हमला, हवाई रक्षा, और टोही मिशन (Reconnaissance) — तीनों को एक साथ अंजाम दे सकता है। यह थलसेना और वायुसेना के तालमेल को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
दो पायलटों के लिए विशेष कॉकपिट
इस हेलीकॉप्टर को दो पायलटों के लिए डिजाइन किया गया है — एक उड़ान नियंत्रण के लिए और दूसरा हथियार नियंत्रण के लिए। इसका खाली वजन 6,838 किलोग्राम और अधिकतम टेक-ऑफ वजन 10,433 किग्रा है। इसके बख्तरबंद कवच इसे गोलियों और बैलिस्टिक हमलों से सुरक्षित रखता है।
भारत की नई सैन्य रणनीति में भूमिका
अपाचे की तैनाती यह संकेत देती है कि भारत अब अपनी सैन्य रणनीति को मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की ओर बढ़ा रहा है, जहां थलसेना, वायुसेना और भविष्य में नौसेना भी संयुक्त रूप से तेजी से कार्य कर सकें। यह सिर्फ एक हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
अपाचे AH-64E की तैनाती के साथ अब भारतीय थलसेना भी उन ताकतों में शामिल हो चुकी है जो अत्याधुनिक हवाई हमला और टोही क्षमता रखती हैं। यह हेलीकॉप्टर ना सिर्फ दुश्मन को डराने के लिए, बल्कि भारत की सीमाओं की रक्षा को और भी अधिक सटीक, प्रभावी और खतरनाक बनाने के लिए लाया गया है।
The Indian Army has officially inducted the Apache AH-64E attack helicopters at the Jodhpur airbase, marking a significant leap in India’s military modernization. With the ability to lock onto 128 targets in one minute and strike 16 simultaneously, the Apache brings unmatched precision and lethality. Equipped with night vision, thermal imaging, Longbow radar, and drone control systems, the Apache helicopters are a game-changer for multi-domain warfare along India’s western borders. These aircraft enhance joint operations between the Indian Army and Air Force and support long-range, high-speed, and networked combat missions.


















