Supreme Court Refuses to Ban ‘Udaipur Files’, Allows Film Release
AIN NEWS 1 नई दिल्ली: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फिल्म की कहानी कन्हैयालाल टेलर की हत्या के वास्तविक घटनाक्रम पर आधारित है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को फिल्म के निर्माताओं और समर्थकों ने बड़ी जीत के रूप में देखा है।
मामला क्या है?
फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ राजस्थान के उदयपुर में हुई कन्हैयालाल टेलर की निर्मम हत्या से जुड़े घटनाक्रम को दिखाती है। इस फिल्म को लेकर शुरू से ही विवाद बना हुआ था। कुछ संगठनों और व्यक्तियों का आरोप था कि यह फिल्म नफरत फैलाने का काम कर सकती है और इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
इस विवाद के चलते कई याचिकाएं अलग-अलग अदालतों में दायर की गईं, जिनमें फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुरुआती तौर पर फिल्म पर अस्थायी रोक भी लगा दी थी, जब तक कि प्रमाणन से जुड़े कुछ मुद्दों पर विचार न हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने कहा:
“Let the film be released” (फिल्म को रिलीज़ होने दें)।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में तुरंत दखल नहीं देगा और याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा। अदालत ने कहा कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को आवश्यक कट्स और संशोधनों के बाद प्रमाणपत्र दे दिया है, ऐसे में इसे रोकने का कोई औचित्य नहीं है।
फिल्म के निर्माताओं की प्रतिक्रिया
फिल्म से जुड़े लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फिल्म का मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज को सच दिखाना और लोगों को जागरूक करना है।
याचिकाकर्ताओं की चिंताएं
वहीं, जो लोग फिल्म के खिलाफ हैं, उनका कहना है कि यह फिल्म भावनाओं को भड़का सकती है और समाज में तनाव पैदा कर सकती है। उनका आरोप है कि फिल्म में घटनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपों पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई करेगा।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
इस फैसले के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या फिल्मों पर रोक लगाना सही है या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकरार रखना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सेंसर बोर्ड का काम ही फिल्मों को प्रमाणित करना है, और एक बार प्रमाणपत्र मिलने के बाद कोर्ट का काम केवल तभी शुरू होता है जब स्पष्ट सबूत हों कि फिल्म कानून का उल्लंघन कर रही है।
फिल्म का महत्व
‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म का विषय संवेदनशील है, क्योंकि यह एक वास्तविक घटना पर आधारित है जिसने पूरे देश को हिला दिया था। यह घटना उदयपुर में एक दर्जी कन्हैयालाल की हत्या से जुड़ी थी, जिसे धार्मिक कट्टरता के चलते मारा गया था। फिल्म में उन परिस्थितियों को दिखाने का प्रयास किया गया है, जिन्होंने इस अपराध को जन्म दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिल्म निर्माताओं को राहत मिली है और फिल्म समर्थकों ने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़ी जीत बताया है। वहीं, फिल्म के विरोधी अब दिल्ली हाई कोर्ट में अपने पक्ष को रखने की तैयारी कर रहे हैं।
The Supreme Court has refused to ban the Udaipur Files movie, which is based on the tragic murder of tailor Kanhaiya Lal in Udaipur. The court emphasized freedom of expression and allowed the film’s release despite petitions seeking a ban. The film highlights sensitive issues of communal harmony and creative freedom, sparking debates across India about whether banning films undermines democratic values. The case now moves to the Delhi High Court for further hearings, but for now, the filmmakers celebrate a significant victory for artistic liberty.


















