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मालेगांव ब्लास्ट केस पर हिंदू जागरण मंच की बैठक, निर्दोषों की रिहाई पर जताया संतोष और की बड़ी मांगें!

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Hindu Jagran Manch Welcomes NIA Court Verdict in Malegaon Blast Case, Demands Action on False Witnesses

मालेगांव ब्लास्ट केस पर हिंदू जागरण मंच की बैठक, निर्दोषों की रिहाई पर संतोष

AIN NEWS 1: 1 अगस्त 2025 को सहारनपुर स्थित हिंदू जागरण मंच कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक शास्त्री नगर कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य विषय मालेगांव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल श्रीकांत पुरोहित समेत सभी 12 आरोपियों के निर्दोष साबित होने के बाद उत्पन्न स्थिति पर चर्चा करना था।

बैठक में उठे मुद्दे

बैठक में हिंदू जागरण मंच के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रांत अध्यक्ष ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि 31 जुलाई 2025 को NIA कोर्ट के निर्णय ने साबित कर दिया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दबाव में साधु-संतों और सेना के अधिकारियों को झूठा फंसाया गया।

उनका कहना था कि “भगवा आतंकवाद” जैसी थ्योरी गढ़कर न केवल हिंदुत्व को बदनाम करने की कोशिश की गई, बल्कि भारतीय सेना जैसे संस्थान पर भी संदेह का माहौल खड़ा किया गया। कोर्ट के फैसले ने इस राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश कर दिया है, जो संतोष का विषय है।

मौलाना अरशद मदनी की आलोचना

बैठक में दारूल उलूम देवबंद के मौलाना अरशद मदनी द्वारा फैसले पर दी गई प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई। ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने मौलाना मदनी के बयान को “अवांछित और हिंदू विरोधी मानसिकता का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट केस में निर्दोष साबित हुए सभी लोग हिंदू समुदाय से हैं, ऐसे में इस तरह की प्रतिक्रिया समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करने वाली है।

सरकार से की गई मांगें

हिंदू जागरण मंच ने केंद्र सरकार से इस मामले में कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं:

1. झूठी गवाही देने वालों की जांच:

जिन पुलिसकर्मियों और गवाहों की गवाही झूठी साबित हुई है, उनका नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफिक टेस्ट और ब्रेन मैपिंग कराई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि वे कहीं इस विस्फोट की साजिश में शामिल तो नहीं थे।

2. राजनीतिक जिम्मेदारी तय करना:

उन सभी राजनेताओं का भी पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाए जिन्होंने “भगवा आतंकवाद” और “सैन्य आतंकवाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर झूठा नैरेटिव चलाया।

3. कानूनी सुधार:

पुलिस एक्ट 1861 में बदलाव कर झूठी गवाही को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।

पुलिस चार्टर, सिटीजन चार्टर, ज्यूडिशियल चार्टर और यूनिफॉर्म पुलिस कोड लागू किया जाए।

इन सुधारों से भविष्य में निर्दोष व्यक्तियों को लंबी अवधि तक जेल में सड़ने से बचाया जा सकेगा।

न्याय और सम्मान का सवाल

ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट जैसे मामलों में निर्दोष लोगों को 17-17 साल तक जेल में रहने और समाज के अपमान का सामना करना पड़ा। ऐसे मामलों में न केवल पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए, बल्कि समाज में विश्वास बहाल करने के लिए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस निर्णय के बाद पीड़ितों के पुनर्वास और सम्मान की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएं।

बैठक में उपस्थित लोग

बैठक में संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से शिवम जोगी, रजत गोयल (प्रांत सह प्रचार प्रमुख), मांगेराम त्यागी, बीर सिंह चौहान, धर्मपाल कश्यप, अनिल कुमार, कुलदीप राणा, आर. के. यादव, भानु राणा सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

इस बैठक का उद्देश्य न केवल हालिया कोर्ट फैसले पर प्रतिक्रिया देना था, बल्कि भविष्य में निर्दोष व्यक्तियों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए ठोस सुझाव और मांगें रखना भी था।

The Hindu Jagran Manch Saharanpur held a meeting after the NIA court’s Malegaon blast verdict, which acquitted all 12 accused including Sadhvi Pragya and Col Purohit. The meeting condemned the false narrative of “Hindutva terrorism” and accused the previous government of political conspiracy. Leaders demanded polygraph and narco analysis tests for false witnesses and politicians who spread the “saffron terror” narrative. The organization also called for legal reforms to prevent innocent individuals from wrongful imprisonment, restoring faith in justice and safeguarding the reputation of Indian armed forces and Hindu saints.

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