AIN NEWS 1: हम रोज़ जिस हवा में सांस लेते हैं, वही हमारे स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। अगर हवा साफ हो तो शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन अगर हवा में धूल, धुआं और जहरीले कण बढ़ जाएं तो यह धीरे-धीरे कई बीमारियों को जन्म देती है। भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण लंबे समय से एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
6 मार्च 2026 को शाम 4 बजे तक के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े बताते हैं कि देश के कई प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ (Moderate) श्रेणी में दर्ज की गई है। इसका मतलब यह है कि सामान्य लोगों पर इसका असर सीमित हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्या है उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है।
ये आंकड़े ओपनवेदरमैप (OpenWeatherMap) से प्राप्त किए गए हैं, जिनके आधार पर विभिन्न शहरों की हवा की स्थिति का आकलन किया गया है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्या होता है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI एक ऐसा पैमाना है जिससे यह पता लगाया जाता है कि हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। इसके जरिए यह भी समझा जा सकता है कि हवा का स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ सकता है।
AQI को आमतौर पर 6 श्रेणियों में बांटा जाता है —
AQI स्तर
स्थिति
0 – 50
अच्छी
51 – 100
संतोषजनक
101 – 200
मध्यम
201 – 300
खराब
301 – 400
बहुत खराब
401 से अधिक
गंभीर
6 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार देश के अधिकांश शहर मध्यम श्रेणी में हैं।
इन शहरों में दर्ज हुआ AQI
शाम 4 बजे तक देश के कई शहरों में निम्नलिखित AQI दर्ज किया गया —
चंडीगढ़ (सेक्टर-25) – 171
गुरुग्राम (विकास सदन) – 189
दिल्ली (शादीपुर) – 189
नोएडा (सेक्टर-116) – 172
लखनऊ (तालकटोरा) – 167
शिलांग (आईएन स्टेडियम) – 156
कोलकाता (रवींद्र भारती विश्वविद्यालय) – 166
पटना (आईजीएससी प्लेनेटेरियम कॉम्प्लेक्स) – 156
चेन्नई (मनाली) – 166
मुंबई (खिंडिपाड़ा, भांडुप वेस्ट) – 127
हैदराबाद (पेड्डा उप्पल / न्यू मलाकपेट) – 124
बेंगलुरु (BTM) – 91
इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश शहरों में AQI 100 से 200 के बीच है, जो मध्यम स्तर के प्रदूषण को दर्शाता है।
किस श्रेणी में कितने शहर
6 मार्च के आंकड़ों के अनुसार शहरों की स्थिति इस प्रकार रही —
अच्छी हवा (0–50) : 4 शहर
संतोषजनक (51–100) : 27 शहर
मध्यम (101–200) : 51 शहर
खराब (201–300) : 1 शहर
बहुत खराब (301–400) : 0
गंभीर (401 से ऊपर) : 0
यह आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल देश के अधिकांश शहरों में हवा मध्यम स्तर पर है, हालांकि कुछ शहरों में यह जल्द खराब श्रेणी में भी जा सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में हवा की स्थिति
दिल्ली और आसपास के शहरों में लंबे समय से वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बना हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार —
दिल्ली (शादीपुर) – 189
गुरुग्राम – 189
नोएडा – 172
ये तीनों शहर मध्यम श्रेणी में हैं। हालांकि यह स्तर अभी ‘खराब’ श्रेणी से थोड़ा नीचे है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम की स्थिति बदलती है या प्रदूषण के स्रोत बढ़ते हैं तो AQI तेजी से बढ़ सकता है।
अन्य महानगरों की स्थिति
देश के अन्य बड़े शहरों में भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।
मुंबई में AQI 127 रहा, जो अपेक्षाकृत बेहतर माना जा सकता है। वहीं हैदराबाद में AQI 124 दर्ज किया गया।
कोलकाता और चेन्नई में भी AQI 160 के आसपास रहा, जो यह दर्शाता है कि इन शहरों में भी हवा पूरी तरह साफ नहीं है।
दूसरी ओर बेंगलुरु में AQI 91 दर्ज हुआ, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है और अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
मध्यम AQI का स्वास्थ्य पर असर
जब AQI 101 से 200 के बीच होता है, तो इसे मध्यम श्रेणी माना जाता है। इस स्तर पर सामान्य रूप से स्वस्थ लोगों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है।
विशेष रूप से इन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए —
अस्थमा के मरीज
बुजुर्ग लोग
छोटे बच्चे
फेफड़ों या दिल की बीमारी से पीड़ित लोग
ऐसे लोगों को ज्यादा समय तक खुले में रहने से बचना चाहिए।
वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण
भारत के शहरों में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं —
वाहनों की बढ़ती संख्या
औद्योगिक धुआं
निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल
कचरा और पराली जलाना
मौसम की स्थिति
जब हवा की गति कम होती है और वातावरण में नमी बढ़ती है तो प्रदूषक कण हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं।
प्रदूषण से बचने के उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AQI मध्यम या उससे अधिक हो तो लोगों को कुछ सावधानियां जरूर अपनानी चाहिए —
सुबह या शाम ज्यादा प्रदूषण होने पर बाहर कम निकलें
जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करें
घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है
ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाएं
वाहन का कम उपयोग करें
इन छोटे-छोटे कदमों से प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
आगे क्या हो सकती है स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मौसम के बदलाव के साथ वायु गुणवत्ता में सुधार या गिरावट दोनों संभव हैं। अगर तेज हवाएं चलती हैं या बारिश होती है तो हवा साफ हो सकती है। लेकिन अगर तापमान बढ़ता है और हवा स्थिर रहती है तो प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।
इसलिए पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाए जाएं, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जाए और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण किया जाए।
6 मार्च 2026 को शाम 4 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार भारत के अधिकांश बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई है। हालांकि यह स्थिति बहुत खराब नहीं है, लेकिन यह साफ संकेत देती है कि शहरों की हवा अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
अगर समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए सरकार, उद्योग और आम जनता—तीनों को मिलकर साफ हवा के लिए प्रयास करना जरूरी है।
Air Quality Index (AQI) levels across major Indian cities such as Delhi, Noida, Gurugram, Lucknow, Kolkata, Mumbai and Hyderabad indicate moderate pollution conditions on March 6, 2026. According to OpenWeatherMap data recorded at 4:00 PM, several cities reported AQI levels between 120 and 190, which falls in the moderate category. Air pollution in Indian cities remains a major environmental and public health concern, as prolonged exposure to polluted air can affect respiratory health, especially for children, elderly people and those with lung diseases.


















