AIN NEWS 1: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कई मुद्दों को उठाते हुए सरकार की कार्यशैली, नीतियों और फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस दौरान उनका बयान काफी चर्चा में रहा, खासकर विधायक पूजा पाल के पार्टी छोड़ने और बीजेपी में जाने को लेकर।
विधायक के जाने पर तंज और नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “योगी जी तो धुरंधर से भी बड़े धुरंधर हैं, हमारी विधायक को ही गुमराह कर ले गए। अब आप ही बताइए कि हम FIR कहां लिखवाएं?” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि विधायक पूजा पाल को पहले पार्टी से बाहर नहीं किया गया क्योंकि वह महिला थीं, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें अंततः पार्टी से निकालना पड़ा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि अब पूजा पाल बीजेपी से टिकट पाने की उम्मीद में बयानबाजी कर रही हैं।
बीजेपी सरकार पर ‘लाइन में लगाने’ का आरोप
अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकारों पर जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां आम लोगों को बार-बार लाइन में खड़ा करने वाली रही हैं। उन्होंने इसे कोरोना काल से जोड़ते हुए कहा कि उस समय भी लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर थे और अब भी हालात कुछ अलग नहीं हैं।
LPG संकट पर सरकार को घेरा
LPG गैस की कमी को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गैस सिलेंडर की किल्लत हो रही है और आगे स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 14 किलो वाले सिलेंडर को घटाकर 10 किलो का कर दिया है, लेकिन उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “LPG अब ‘लापता गैस’ बन गई है।” उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि आने वाले समय में गैस की कमी को देखते हुए लकड़ी, कोयला और कंडे जैसे विकल्प तैयार रखने चाहिए।
“हमने भी दो चूल्हे खरीद लिए”
अपने बयान को हल्के अंदाज में पेश करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने खुद भी मिट्टी के दो चूल्हे मंगवा लिए हैं। उन्होंने कहा कि लकड़ी और कोयले पर बने खाने का स्वाद अच्छा होता है, लेकिन यह मजबूरी नहीं होनी चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी “नाली वाली गैस” की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि असल घरेलू ईंधन की समस्या पर ध्यान दिला रहे हैं।
AI MoU पर उठाए बड़े सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े निवेश समझौतों (MoU) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के समझौते किए हैं, उनकी विश्वसनीयता ही संदिग्ध है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ऐसी कंपनी, जिसकी हैसियत मात्र 43 लाख रुपये थी, उसके साथ 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश समझौता कैसे किया गया? उन्होंने मांग की कि सभी MoU की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
भाजपा पर तीखा हमला
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि सबसे पहले उत्तर प्रदेश से बीजेपी का सफाया होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूपी ही वह राज्य है, जिसने बीजेपी को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाया है, इसलिए बदलाव की शुरुआत यहीं से होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने धार्मिक गुरुओं का अपमान किया है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सम्राट अशोक की प्रतिमा का वादा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने एक सांस्कृतिक घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार आती है, तो लखनऊ के रिवर फ्रंट पर सम्राट अशोक की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा बेहद सुंदर होगी और सम्राट अशोक को सोने के सिंहासन पर बैठाया जाएगा।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
अखिलेश यादव के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर अपनी पार्टी की रणनीति और भविष्य के संकेत भी दिए।
विधायक के पार्टी छोड़ने से लेकर गैस संकट और निवेश समझौतों तक, उन्होंने कई मुद्दों को एक साथ उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों पर सरकार की ओर से क्या जवाब आता है और राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।
Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav launched a sharp attack on Yogi Adityanath during a press conference in Lucknow, highlighting issues like MLA defection, LPG crisis in Uttar Pradesh, and controversial AI MoU deals. He questioned the credibility of investment agreements and accused the BJP government of misleading the public. The statement has intensified political tensions in UP, making it a key development in Uttar Pradesh politics and BJP vs SP rivalry.


















