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प्रयागराज हाईकोर्ट ने यूपी के धरोहर स्थलों की बदहाली पर जताई सख्ती, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब!

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प्रयागराज हाईकोर्ट ने धरोहर स्थलों की बदहाली पर मांगा जवाब, सरकारों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

AIN NEWS 1पवन तिवारी, अधिवक्ता : उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों की लगातार बिगड़ती हालत को लेकर प्रयागराज हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित विभागों को जल्द ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह पूरा मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत तक पहुंचा, जिसे विरासत संरक्षण और संस्कृति से जुड़े अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने दायर किया है।

याचिका में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक स्थल उपेक्षा का शिकार हैं। इनमें से कई स्थलों का न तो सही तरीके से रिकॉर्ड तैयार किया गया है और न ही उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सुरक्षा मिली हुई है। अदालत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

5,416 ऐतिहासिक स्थलों की हालत चिंताजनक

जनहित याचिका में बताया गया है कि झांसी, आगरा, वृंदावन समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कुल 5,416 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल मौजूद हैं। इनमें प्राचीन मंदिर, किले, बावड़ियां, स्मारक और धार्मिक स्थल शामिल हैं। लेकिन इन धरोहरों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय उपाध्याय ने अदालत को बताया कि हजारों धरोहर स्थल अब तक सरकारी रिकॉर्ड में ठीक तरह दर्ज नहीं हैं। कई स्थानों को संरक्षण सूची में शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण उनकी देखरेख नहीं हो पा रही। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण, अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन धरोहर स्थलों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

केवल 212 स्थलों को ही मिला संरक्षण

राज्य पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मौजूद हजारों धरोहर स्थलों में से फिलहाल केवल 212 स्थलों को ही आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है। यह आंकड़ा प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

याचिका में मांग की गई है कि कम से कम 3,500 ऐतिहासिक स्थलों का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किया जाए। इसके साथ ही इन स्थलों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए विशेष योजना लागू करने की भी मांग की गई है।

प्रयागराज हाईकोर्ट ने पहले भी जारी किए थे नोटिस

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इससे पहले भी संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और राज्य पुरातत्व विभाग से विस्तृत जवाब मांगा था।

अब अदालत ने दोबारा सख्त रुख अपनाते हुए पूछा है कि धरोहर स्थलों को बचाने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि विभागों ने जल्द उचित कार्रवाई नहीं की, तो आगे और कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

सांस्कृतिक विरासत बचाने की जरूरत

इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र रहा है। आगरा का मुगलकालीन इतिहास, झांसी की वीरता और वृंदावन की धार्मिक विरासत देशभर में प्रसिद्ध है। लेकिन संरक्षण के अभाव में कई धरोहर स्थल धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन ऐतिहासिक स्थलों का सही तरीके से संरक्षण किया जाए, तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अतिक्रमण और अवैध निर्माण बड़ी चुनौती

याचिका में यह भी कहा गया है कि कई ऐतिहासिक स्थलों पर अवैध कब्जे और निर्माण कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। पर्याप्त निगरानी न होने के कारण कई जगहों पर पुरानी संरचनाओं को नुकसान पहुंच रहा है। कुछ स्थलों की मूल पहचान तक मिटती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुरातात्विक महत्व वाले इलाकों में अनियंत्रित निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां भी धरोहर संरक्षण के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। ऐसे में राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर एक व्यापक नीति बनाने की जरूरत है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर भी असर

धरोहर स्थलों की उपेक्षा का असर पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं। यदि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जाए, तो राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वस्तरीय सुविधाओं और मजबूत संरक्षण व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

अब इस मामले में सभी की नजर प्रयागराज हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है। उम्मीद की जा रही है कि अदालत सरकार और संबंधित विभागों से विस्तृत कार्ययोजना मांग सकती है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रदेश की हजारों ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए कितनी गंभीरता दिखाई जाती है।

यह मामला केवल पुरानी इमारतों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने से भी जुड़ा हुआ है।

The Allahabad High Court has taken serious note of the deteriorating condition of heritage sites in Uttar Pradesh after a PIL filed by advocate Akash Vashishtha highlighted the neglect of over 5,416 historical monuments across the state. The court has directed the Uttar Pradesh government, Union Ministry of Culture, Archaeological Survey of India (ASI), and State Archaeology Department to take urgent action for heritage protection, conservation, and documentation of unprotected historical sites in cities like Agra, Jhansi, and Vrindavan.

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