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अयोध्या फैसला: राम मंदिर बनकर तैयार, लेकिन धन्नीपुर की मस्जिद परियोजना अब भी अधूरी, आखिर क्यों रुका निर्माण?

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राम मंदिर बन गया, लेकिन धन्नीपुर की मस्जिद का इंतजार अब भी जारी

AIN NEWS 1: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के तहत धन्नीपुर गांव में प्रस्तावित नई मस्जिद परियोजना आज भी निर्माण शुरू होने का इंतजार कर रही है। करीब छह साल बीत जाने के बावजूद मस्जिद की एक भी ईंट नहीं रखी जा सकी है।

धन्नीपुर में आवंटित पांच एकड़ जमीन आज भी खाली पड़ी है। जमीन चारों तरफ से लोहे की फेंसिंग से घिरी हुई है, जबकि भीतर घास उग आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां अक्सर बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आते हैं। जिस स्थान पर मस्जिद, अस्पताल, लाइब्रेरी और सामाजिक सुविधाओं का बड़ा परिसर बनने की योजना बनाई गई थी, वहां फिलहाल किसी प्रकार की निर्माण गतिविधि दिखाई नहीं देती।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निकले थे दो अहम रास्ते

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि रामलला विराजमान को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाए ताकि वहां नई मस्जिद का निर्माण किया जा सके।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या जिले के धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन आवंटित की। वर्ष 2020 में यह जमीन आधिकारिक रूप से वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई और मस्जिद निर्माण की जिम्मेदारी इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) को दी गई।

सिर्फ मस्जिद नहीं, आधुनिक सामाजिक परिसर बनाने की थी योजना

धन्नीपुर परियोजना केवल एक मस्जिद तक सीमित नहीं थी। शुरुआती प्रस्ताव में आधुनिक अस्पताल, सामुदायिक रसोई, लाइब्रेरी, शोध केंद्र, संग्रहालय और अन्य सामाजिक सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई थी।

ट्रस्ट का उद्देश्य था कि यह परिसर धार्मिक स्थल के साथ-साथ सामाजिक सेवा का भी बड़ा केंद्र बने। हालांकि समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।

धन की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती

इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी के अनुसार, मस्जिद और उससे जुड़े पूरे परिसर के निर्माण के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता थी।

फाउंडेशन ने वर्ष 2021 में देशभर के लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की थी और इसके लिए सार्वजनिक रूप से बैंक खाते की जानकारी भी जारी की गई। लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया।

शुरुआती वर्षों में केवल कुछ लाख रुपये ही जुट पाए। बाद में भी कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास ही धन एकत्र हो सका, जबकि मूल परियोजना की लागत कई सौ करोड़ रुपये आंकी गई थी। इतनी कम राशि में पूरी परियोजना का निर्माण संभव नहीं था।

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अब छोटी मस्जिद से शुरुआत की तैयारी

पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के बाद ट्रस्ट ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

अब पहले चरण में अपेक्षाकृत छोटी मस्जिद का निर्माण शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए ट्रस्ट अपने समर्थकों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से लगभग पांच करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास कर रहा है ताकि कम से कम मस्जिद का निर्माण शुरू किया जा सके।

सरकारी मंजूरियां भी बनी रुकावट

परियोजना के सामने केवल धन की कमी ही चुनौती नहीं रही।

निर्माण शुरू करने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) सहित कई सरकारी विभागों से विभिन्न प्रकार की मंजूरियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) आवश्यक हैं। परियोजना के डिजाइन में बदलाव के कारण कई प्रस्तावों को दोबारा मंजूरी के लिए भेजना पड़ा।

इन्हीं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते भी निर्माण कार्य लगातार टलता रहा।

गांव वालों की उम्मीदें धीरे-धीरे कम हुईं

करीब तीन हजार की आबादी वाले धन्नीपुर गांव में मुस्लिम आबादी अच्छी संख्या में रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था तब गांव में काफी उम्मीदें थीं।

लोगों को लगा था कि मस्जिद के साथ अस्पताल और अन्य सुविधाएं बनने से पूरे क्षेत्र का विकास होगा। आसपास के कई गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

हालांकि वर्षों तक कोई निर्माण शुरू नहीं होने के कारण अब अधिकांश ग्रामीण इस विषय पर खुलकर बात करने से भी बचते हैं।

गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यदि अल्लाह की मर्जी होगी तो मस्जिद जरूर बनेगी, लेकिन कब बनेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

अस्पताल की सबसे ज्यादा जरूरत

धन्नीपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अक्सर लखनऊ जाना पड़ता है। यदि प्रस्तावित अस्पताल बन जाता तो हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलती।

इसी कारण ग्रामीणों को आज भी उम्मीद है कि भविष्य में कम से कम अस्पताल और अन्य सामाजिक सुविधाओं का निर्माण अवश्य होगा।

राम मंदिर और मस्जिद परियोजना की अलग-अलग तस्वीर

जहां एक ओर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण तेजी से पूरा होकर श्रद्धालुओं के लिए खुल चुका है, वहीं धन्नीपुर की मस्जिद परियोजना अब भी शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है।

यह स्थिति बताती है कि किसी भी बड़े सामाजिक या धार्मिक प्रोजेक्ट को केवल कानूनी मंजूरी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि आर्थिक संसाधन, प्रशासनिक स्वीकृतियां और जनसहयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

वर्तमान स्थिति (जुलाई 2026)

फिलहाल धन्नीपुर की पांच एकड़ जमीन खाली है और वहां किसी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन का कहना है कि संशोधित योजना के तहत पहले छोटी मस्जिद बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए धन जुटाने और आवश्यक सरकारी मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।

जब तक पर्याप्त वित्तीय संसाधन और सभी प्रशासनिक स्वीकृतियां नहीं मिल जातीं, तब तक परियोजना के पूर्ण रूप से शुरू होने की संभावना सीमित मानी जा रही है।

The Ayodhya Dhannipur Mosque Project remains one of the most discussed developments following the 2019 Supreme Court Ayodhya verdict. While the Ram Mandir has been completed and is welcoming devotees, construction of the proposed mosque at Dhannipur has not yet begun due to funding shortages, pending government approvals, and project redesigns. This latest 2026 update covers the current status of the Dhannipur Mosque, the role of the Indo Islamic Cultural Foundation, financial challenges, revised construction plans, and the future of the proposed hospital and community facilities, making it an essential read for anyone following Ayodhya latest news and developments in India.

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