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बरेली में विवाह के 8 महीने बाद संदिग्ध मौत: दहेज उत्पीड़न और हत्या के आरोप में दर्ज मुकदमे के बावजूद आरोपी फरार, परिवार ने न्याय की लगाई गुहार

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AIN NEWS 1 | उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बार फिर दहेज उत्पीड़न और संदिग्ध मौत का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाह के महज आठ महीने बाद एक नवविवाहिता की मौत हो जाने से परिवार शोक और आक्रोश दोनों में है। मृतका के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या दहेज की मांग पूरी न होने के कारण की गई, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

शादी के कुछ महीनों बाद ही शुरू हुआ उत्पीड़न

मामला थाना सीबीगंज क्षेत्र के ग्राम बल्लाकोठा निवासी वीरेन्द्र पाल से जुड़ा है। उन्होंने अपनी बेटी सावित्री देवी की शादी 29 अप्रैल 2025 को थाना सिरौली क्षेत्र के ग्राम कतरई ठाकुरान निवासी रामस्वरूप के साथ पूरे रीति-रिवाज और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दान-दहेज देकर की थी।

परिवार का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों के बाद ही सावित्री के ससुराल पक्ष का व्यवहार बदलने लगा। पति रामस्वरूप, सास रामबेटी और ससुर सुरेश लगातार दहेज को लेकर असंतोष जताते थे। आरोप है कि सावित्री पर मायके से एक लाख रुपये लाने का दबाव बनाया जाने लगा और छोटी-छोटी बातों पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

बेटी ने पिता को बताई थी अपनी पीड़ा

वीरेन्द्र पाल के अनुसार, उनकी बेटी समय-समय पर फोन पर अपनी परेशानियों के बारे में बताती रहती थी। परिवार ने कई बार ससुराल पक्ष को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

20 जनवरी 2026 को पिता ने जब सावित्री से फोन पर बात की, तब उसने फिर बताया कि उस पर एक लाख रुपये लाने का दबाव बनाया जा रहा है और घर में लगातार तनाव का माहौल है। पिता ने उसे धैर्य रखने की सलाह दी और जल्द मिलने का भरोसा दिया, लेकिन उसी रात घटनाओं ने दुखद मोड़ ले लिया।

आधी रात आया मौत का फोन

परिजनों के मुताबिक, आधी रात के बाद अचानक फोन आया कि सावित्री की “अचानक मौत” हो गई है। यह खबर सुनते ही पिता और परिवार के अन्य सदस्य ट्रैक्टर-ट्रॉली से उसकी ससुराल पहुंचे।

वहां पहुंचने पर जो दृश्य सामने आया, उसने परिवार को झकझोर दिया। सावित्री का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। परिवार का दावा है कि सावित्री पूरी तरह स्वस्थ थी और उसे किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं थी। विवाह को भी केवल आठ महीने ही हुए थे, जिससे मौत को लेकर संदेह और गहरा गया।

हत्या का आरोप और पोस्टमार्टम

परिवार ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और शव का पोस्टमार्टम कराया गया। मृतका के पिता ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या पति और ससुराल वालों ने मिलकर की है।

इसके बाद 22 जनवरी 2026 को थाना सिरौली में मुकदमा अपराध संख्या 0027 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 80 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया।

एफआईआर में मुख्य आरोपी के रूप में पति रामस्वरूप, उसके पिता सुरेश और मां रामबेटी का नाम शामिल किया गया।

एक महीने बाद भी गिरफ्तारी नहीं

परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस ने शुरुआती दौर में आरोपी रामस्वरूप को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में कथित सांठगांठ के चलते उसे छोड़ दिया गया।

वीरेन्द्र पाल का दावा है कि उनके पास आरोपी की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें वह खुद पुलिस द्वारा छोड़े जाने की बात स्वीकार करता सुनाई दे रहा है।

समझौते का दबाव और धमकियां

पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी पक्ष लगातार मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है। समझौता न करने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार होने के कारण वीरेन्द्र पाल ने खुद को असहाय बताया। वह एक निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करते हैं और न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

उनका कहना है कि उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस जांच पर उठे सवाल

मामले की जांच क्षेत्राधिकारी आंवला (DySP स्तर) को सौंपी गई है, लेकिन गिरफ्तारी न होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दहेज मृत्यु जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी होती है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में संदेश जाए।

दहेज मृत्यु के मामलों पर चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि शादी के सात साल के भीतर महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर कानून इसे गंभीरता से देखता है। ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

सावित्री की मौत ने एक बार फिर दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है, जहां आर्थिक मांगें रिश्तों पर भारी पड़ जाती हैं।

न्याय की उम्मीद में परिवार

मृतका के पिता ने पुलिस अधीक्षक (देहात) से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा।

परिवार आज भी उम्मीद लगाए बैठा है कि कानून अपना काम करेगा और उनकी बेटी की मौत का सच सामने आएगा।

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