AIN NEWS 1: दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, जो दिल्ली में विश्वस्तरीय स्कूल और कॉलेज स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं, अब एक नई चर्चा में हैं। उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया कि उनके बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने भारी भरकम एजुकेशन लोन लिया है।
सिसोदिया का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा शिक्षा रही है। उन्होंने दिल्ली में शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए। दिल्ली के सरकारी स्कूलों को वर्ल्ड क्लास स्तर पर लाने के लिए उनकी योजनाएं और प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि विदेशों के बच्चे अब दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई करने आते हैं और दुनियाभर के एक्सपर्ट दिल्ली के शिक्षा मॉडल को समझने आते हैं।
मनीष सिसोदिया और दिल्ली का शिक्षा मॉडल
मनीष सिसोदिया ने शिक्षा मंत्री रहते हुए दिल्ली के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी ढांचे और पढ़ाई के स्तर को सुधारने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में सरकारी स्कूलों में नए भवन, स्मार्ट क्लासरूम, और शिक्षकों की ट्रेनिंग जैसे बदलाव हुए। इन बदलावों के कारण दिल्ली का शिक्षा मॉडल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना।
बेटे की पढ़ाई के लिए लोन लेना क्यों महत्वपूर्ण?
सिसोदिया ने बेटे की उच्च शिक्षा के लिए कनाडा में दाखिला करवाया है। उनका मानना है कि शिक्षा एक ऐसा निवेश है, जो व्यक्ति और समाज दोनों को सशक्त बनाता है। उन्होंने खुद भी अपनी शिक्षा नीतियों के जरिए लाखों बच्चों को बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया।
आलोचना और सच्चाई
हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि जब दिल्ली के स्कूलों को इतना बेहतर बनाया गया है, तो फिर मनीष सिसोदिया ने अपने बेटे को विदेश में क्यों पढ़ने भेजा। इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता हर जगह अलग हो सकती है, और उनके बेटे की पढ़ाई के लिए यह फैसला व्यक्तिगत था।
English Paragraph for SEO:
Manish Sisodia, the former Deputy Chief Minister and Education Minister of Delhi, has revealed that he took an education loan of ₹1.50 crore for his son’s studies in Canada. Sisodia is renowned for revolutionizing Delhi’s education system by transforming government schools into world-class institutions. His initiatives have gained international recognition, attracting global experts to study Delhi’s model. Despite his son studying abroad, Sisodia’s contribution to improving local education remains unparalleled, making him a key figure in India’s educational reforms.