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खरगे की रैली में खाली कुर्सियां और कांग्रेस की अंदरूनी कलह: बक्सर जिलाध्यक्ष मनोज पांडे निलंबित!

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Bihar Congress Suspends Buxar President Manoj Pandey Over Poor Turnout at Kharge Rally

खरगे की रैली में खाली कुर्सियों ने खोली कांग्रेस की कलह, बक्सर जिलाध्यक्ष मनोज पांडे निलंबित

AIN NEWS 1: बिहार की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस पार्टी एक नई मुश्किल में फंसी हुई नजर आ रही है। बीते रविवार को बक्सर जिले के दलसागर स्थित खेल मैदान में आयोजित कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट पाई। इस विफल आयोजन का जिम्मा जिले के कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार पांडे पर डाला गया और पार्टी ने उन्हें तुरंत प्रभाव से उनके पद से निलंबित कर दिया। यह फैसला न केवल जिला संगठन के लिए बल्कि राज्य स्तर पर पार्टी की स्थिति के लिए भी एक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

भीड़ नहीं जुटी, सवाल उठे

खरगे की सभा के दौरान मैदान में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। आयोजकों ने 500 से ज्यादा कुर्सियों की व्यवस्था की थी, लेकिन इनमें से भी अधिकांश खाली रहीं। जैसे ही यह स्थिति सामने आई, विपक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का जनाधार तेजी से खत्म हो रहा है।

सभा की लोकेशन भी विवाद का कारण बनी। सभा स्थल जिला मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर एक गांव के खेल मैदान में रखा गया था। यह निर्णय भीड़ जुटाने के लिहाज से पूरी तरह असफल रहा।

पार्टी का आरोप: लापरवाही और समन्वय की कमी

पार्टी नेतृत्व ने डॉ. मनोज पांडे पर कार्यक्रम के समुचित समन्वय में असफल रहने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। बताया गया कि पांडे पार्टी के शीर्ष नेताओं के कार्यक्रम को लेकर आवश्यक तैयारी और तालमेल नहीं बना पाए, जिससे सभा में अपेक्षित भीड़ नहीं आ सकी।

आंतरिक समीक्षा और कार्रवाई

पार्टी ने इस कार्यक्रम की समीक्षा शुरू कर दी है और शुरुआती कार्रवाई के तहत डॉ. पांडे को उनके पद से हटा दिया गया है। उन्हें कुछ ही दिन पहले दूसरी बार जिलाध्यक्ष बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में अब अन्य नेता भी आ सकते हैं। सभा में विफलता को देखते हुए कई नेताओं की जवाबदेही तय की जा रही है।

कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद उभरकर सामने आए

इस घटना ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने जिला अध्यक्ष को नीचा दिखाने के मकसद से कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह चुप्पी साध ली थी। इस कारण न तो समय पर प्रचार हुआ और न ही कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला।

सहयोगी दलों की दूरी

सभा में कांग्रेस के गठबंधन सहयोगियों की अनुपस्थिति ने भी इस आयोजन को कमजोर कर दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से केवल सांसद सुधाकर सिंह ही मंच पर दिखे। जिले की ब्रह्मपुर सीट से राजद विधायक शंभूनाथ सिंह यादव और डुमरांव से माले विधायक अजीत कुमार कार्यक्रम से गायब रहे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सहयोगी दलों ने भी कांग्रेस के इस आयोजन से किनारा कर लिया था।

विधायकों पर भी उठे सवाल

बक्सर जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो पर कांग्रेस के विधायक हैं। इसके बावजूद सभा में इतनी कम भीड़ होना और स्थानीय विधायकों की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण के समय पार्टी इन नेताओं की भूमिका पर दोबारा विचार कर सकती है।

संगठन में मचा हड़कंप

बिहार प्रदेश कांग्रेस के कार्यालय सचिव द्वारा जारी निलंबन पत्र के बाद बक्सर जिला कांग्रेस में भारी हलचल मच गई है। कई स्थानीय कार्यकर्ता और नेता हैरान हैं कि जिन मनोज पांडे को हाल ही में दोबारा जिलाध्यक्ष बनाया गया था, उन्हें अचानक निलंबित कर दिया गया। यह घटनाक्रम बताता है कि पार्टी अब किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

क्या यह संदेश है आगामी चुनावों के लिए?

कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की गई यह कार्रवाई एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देती है। पार्टी अब मैदान में गंभीरता से उतरने की तैयारी में है और जिन लोगों से परिणाम नहीं मिल रहे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने से नहीं हिचक रही है। इससे अन्य जिलों के अध्यक्षों और नेताओं को भी चेतावनी मिलती है कि अगर वे पार्टी के कार्यक्रमों में लापरवाही बरतेंगे, तो उन्हें भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

बक्सर की यह घटना केवल एक स्थानीय स्तर की चूक नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में व्याप्त खामियों और गुटबाजी की गहराई को उजागर करती है। यह पार्टी के लिए एक सीख है कि अगर अंदरूनी मतभेद नहीं सुलझे और समन्वय नहीं बना, तो आगामी चुनावों में यह नुकसानदेह साबित हो सकता है। वहीं, पार्टी के लिए यह भी एक मौका है कि वह इन घटनाओं से सबक लेकर अपने संगठन को फिर से सशक्त बनाए।

अगर कांग्रेस को बिहार की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पानी है, तो उसे न सिर्फ ऐसे आयोजनों की बेहतर योजना बनानी होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच तालमेल भी मजबूत करना होगा। तभी जाकर पार्टी खड़ा हो सकेगी एक मजबूत विपक्ष के रूप में।

In a major political development in Bihar, the Congress party suspended Buxar district president Manoj Pandey following the poor turnout at Mallikarjun Kharge’s rally. The incident highlights the growing internal rift within Bihar Congress, poor coordination at the grassroots level, and signals a warning for the party ahead of the 2025 Bihar assembly elections. The absence of alliance partners and key local leaders further reflects on the weakening organizational structure of the Congress in Buxar.

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