AIN NEWS 1: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर में एक लावारिस कुत्ते की मौत के बाद इलाके में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। यह वही कुत्ता था, जिसने महज 24 घंटे के भीतर 25 लोगों को काटकर पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। अब इस कुत्ते की मौत के बाद पुष्टि हुई है कि वह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित था।
इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
कहां का है मामला?
यह पूरा मामला हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 48, मल्ला बमौरी का है। 28 और 29 जनवरी को एक लावारिस कुत्ता अचानक बेहद आक्रामक हो गया। लोगों के अनुसार, कुत्ता बिना किसी उकसावे के राह चलते लोगों पर झपट रहा था।
24 घंटे में 25 लोग घायल
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस कुत्ते ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत कुल 25 लोगों को काट लिया। इनमें से दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
लगातार हो रही घटनाओं के कारण पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया। लोग बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी हिचकने लगे।
नगर निगम ने पकड़ा संदिग्ध कुत्ता
घटना की गंभीरता को देखते हुए हल्द्वानी नगर निगम की टीम ने तुरंत कार्रवाई की।
गुरुवार को नगर निगम ने अभियान चलाकर संदिग्ध कुत्ते को पकड़ लिया और उसे राजपुरा स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर के बाड़े में रखा गया।
यहां कुत्ते को अलग-थलग रखकर निगरानी में रखा जा रहा था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसी गंभीर बीमारी से तो ग्रसित नहीं है।
छह दिन बाद बाड़े में हुई मौत
कुत्ते को पकड़े जाने के छठवें दिन, मंगलवार सुबह उसकी बाड़े में ही मौत हो गई।
कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही एक बार फिर इलाके में हड़कंप मच गया, खासतौर पर उन लोगों में जिन्हें कुत्ते ने काटा था।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की पुष्टि
जांच में यह साफ हुआ कि कुत्ता कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित था।
नगर निगम और पशु चिकित्सकों के अनुसार, इसी बीमारी के कारण कुत्ता असामान्य रूप से आक्रामक व्यवहार कर रहा था।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) कुत्तों में फैलने वाला एक बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरल संक्रमण है।
यह बीमारी कुत्तों के:
श्वसन तंत्र
पाचन तंत्र
तंत्रिका तंत्र
को बुरी तरह प्रभावित करती है।
यह वायरस संक्रमित जानवरों के खांसने, छींकने, लार या नाक से निकलने वाले स्राव के जरिए हवा में फैल सकता है।
क्यों है यह बीमारी खतरनाक?
इस बीमारी में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है
विशेष रूप से पिल्ले इसके सबसे ज्यादा शिकार होते हैं
एक बार गंभीर अवस्था में पहुंचने पर इसका कोई प्रभावी इलाज नहीं है
समय पर टीकाकरण ही एकमात्र बचाव है
अगर कुत्ते को समय पर टीका न लगाया जाए, तो उसकी जान जाना लगभग तय मानी जाती है।
रैबीज की पुष्टि नहीं, फिर भी सतर्कता जरूरी
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि चिकित्सकों के अनुसार इस कुत्ते में रैबीज के लक्षण नहीं पाए गए।
नगर निगम के वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल ने बताया कि कुत्ते की मौत रैबीज से नहीं, बल्कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है।
हालांकि, इसके बावजूद खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
संपर्क में आए लोगों और जानवरों की ट्रेसिंग
नगर निगम की टीमें अब:
कुत्ते के संपर्क में आए अन्य जानवरों
और काटे गए सभी लोगों
को ट्रेस कर रही हैं।
सभी प्रभावित लोगों को रैबीज और टिटनेस का टीका लगवाने की सलाह दी गई है।
टीकाकरण अभियान होगा तेज
नगर निगम ने साफ किया है कि:
आवारा कुत्तों के टीकाकरण अभियान को और तेज किया जाएगा
बीमार या आक्रामक जानवरों की तुरंत पहचान कर उन्हें अलग किया जाएगा
लोगों से भी अपील की गई है कि किसी भी रोगग्रस्त या असामान्य व्यवहार करने वाले जानवर से दूरी बनाए रखें और तुरंत नगर निगम को सूचना दें।
लोगों में अभी भी डर का माहौल
हालांकि रैबीज की पुष्टि न होने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन जिन लोगों को कुत्ते ने काटा था, उनके मन में अब भी डर बना हुआ है।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आवारा जानवरों के टीकाकरण और निगरानी को कितनी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
A major health alert was triggered in Haldwani, Uttarakhand, after a stray dog that bit 25 people within 24 hours died due to Canine Distemper Virus. The incident caused widespread panic, prompting the municipal corporation to trace all human and animal contacts. While rabies was ruled out, authorities have urged affected individuals to take precautionary vaccines and announced intensified dog vaccination drives to prevent future outbreaks.


















