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छांगुर बाबा गिरोह का खुलासा: छह साल पुराने अपहरण और धर्म परिवर्तन केस में बदर अख्तर व पिता पर मुकदमा, इंस्पेक्टर निलंबित!

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Chhangur Baba Gang Case: FIR Against Badar Akhtar and Father After 6 Years, Inspector Suspended

 

AIN NEWS 1: मेरठ और गाज़ियाबाद से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। यह वही मामला है जिसमें वर्ष 2019 में एक युवती के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया था। आरोपित बदर अख्तर और उसके पिता पर अब छह साल बाद केस दर्ज कर दिया गया है। इस केस की जांच के दौरान तत्कालीन सिविल लाइन इंस्पेक्टर अब्दुर रहमान सिद्दीकी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके चलते उन्हें निलंबित कर दिया गया।

कैसे शुरू हुआ यह विवाद?

युवती के परिजनों का कहना है कि 2019 में उनकी बेटी अचानक गायब हो गई थी। परिवार का आरोप है कि बदर अख्तर और उसके पिता ने युवती को बहला-फुसलाकर अगवा किया और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। परिजनों ने थाने में तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

परिवार की पीड़ा

युवती के पिता ने कहा:

 “हमारी बेटी को घर से निकालकर बहकाया गया। हमने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अब जाकर केस दर्ज हुआ है, हमें न्याय की उम्मीद जगी है।”

छह साल बाद क्यों दर्ज हुआ केस?

मेरठ पुलिस ने हाल ही में इस मामले की फाइल खोली और पाया कि 2019 में न केवल केस दर्ज नहीं हुआ था, बल्कि कई स्तरों पर गंभीर गड़बड़ियां हुई थीं। जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन सिविल लाइन इंस्पेक्टर अब्दुर रहमान सिद्दीकी पर मामले को दबाने और पीड़ित परिवार को धमकाने के आरोप थे।

पुलिस की कार्रवाई

इस पूरे मामले में मेरठ पुलिस ने दो टीमें बनाई हैं जो बदर अख्तर और उसके पिता की तलाश कर रही हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा:

“यह सिर्फ एक केस नहीं है, बल्कि यह एक नेटवर्क का हिस्सा है। ऐसे मामलों में कार्रवाई करना हमारी प्राथमिकता है।”

छांगुर बाबा गिरोह का नेटवर्क

यह मामला छांगुर बाबा गिरोह से जुड़ा माना जा रहा है। इस गिरोह पर आरोप है कि यह युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराता था। इस नेटवर्क की जांच एटीएस और एसटीएफ जैसी विशेष एजेंसियां कर रही हैं।

गिरोह की कार्यप्रणाली

सूत्रों के अनुसार, गिरोह पहले कमजोर वर्ग की युवतियों को निशाना बनाता था। फिर उन्हें विभिन्न तरीकों से फंसाकर शादी या नौकरी का लालच दिया जाता था। बाद में उन पर धर्म बदलने का दबाव डाला जाता था।

विदेशी फंडिंग के आरोप

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क को बाहर से फंडिंग मिलती थी, जिससे इसे लंबे समय तक सक्रिय रखा गया।

इंस्पेक्टर अब्दुर रहमान का निलंबन

इस केस में सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब तत्कालीन इंस्पेक्टर अब्दुर रहमान सिद्दीकी का नाम सामने आया। आरोप है कि उन्होंने परिवार को डराया और मुकदमा दर्ज नहीं होने दिया। गाज़ियाबाद में तैनात सिद्दीकी को जांच के बाद निलंबित कर दिया गया।

अधिकारी का पक्ष

निलंबित अधिकारी का कहना है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की। हालांकि, विभागीय जांच में उन पर लगे आरोप गंभीर पाए गए।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

इस केस ने प्रदेश में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। कई संगठनों ने सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे मामलों में शून्य सहिष्णुता अपनाई जाएगी।

विशेषज्ञ की राय

समाजशास्त्री डॉ. राजीव मिश्रा का कहना है:

“ऐसे मामले समाज के ताने-बाने को प्रभावित करते हैं। जबरन धर्म परिवर्तन न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला है बल्कि सामाजिक असंतुलन का कारण भी बनता है। इस केस का दोबारा खुलना सही दिशा में कदम है।”

परिवार की उम्मीदें और भविष्य की जांच

युवती का परिवार अब भी न्याय का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो उनकी बेटी को इतना कष्ट नहीं सहना पड़ता। परिवार का कहना है कि उन्हें अब विश्वास है कि आरोपी जल्द कानून के शिकंजे में होंगे।

जांच एजेंसियों का फोकस

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह मामला एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। अगर ऐसा हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

छह साल बाद खुला यह मामला यह साबित करता है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन अगर पीड़ित डटे रहें, तो सच सामने आता ही है। इस केस ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किसी भी गलत काम को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

The Chhangur Baba gang case has reignited debate on forced religious conversions and organized crime in Uttar Pradesh. After six years, an FIR has finally been registered against Badar Akhtar and his father for allegedly abducting and converting a young woman. Former Civil Lines Inspector Abdul Rehman Siddiqui has been suspended for negligence and alleged involvement. This case highlights the challenges in law enforcement and the growing crackdown on illegal religious conversion networks linked to external funding and organized crime.

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