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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: 27 साल पुराना कानूनी विवाद, एक घर बना बड़ी बाधा?

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Delhi-Dehradun Expressway: How One House Stalled the Mega Project for 27 Years

 

AIN NEWS 1: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, जो दिल्ली से उत्तराखंड को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है, आज भी अधूरा पड़ा है। इसका कारण एक छोटा-सा घर है, जो मंडोला क्षेत्र में स्थित है। यह विवाद 1998 में शुरू हुआ जब यूपी हाउसिंग बोर्ड ने इस इलाके में हाउसिंग स्कीम के लिए 2614 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला किया। लेकिन वीरसेन सरोहा नामक व्यक्ति ने अपनी 1600 वर्ग मीटर की जमीन देने से मना कर दिया।

मामले की शुरुआत: 1998 से अब तक का सफर

1998: यूपी हाउसिंग बोर्ड ने जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की।

2007: वीरसेन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में जमीन के अधिग्रहण को चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने अधिग्रहण पर रोक लगा दी।

2010: लंबे विरोध और अदालती कार्यवाही के कारण हाउसिंग प्रोजेक्ट ठप पड़ गया।

2017-2020: NHAI ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की।

2020: यूपी हाउसिंग बोर्ड ने जमीन एनएचएआई को सौंप दी, जिसमें वीरसेन का घर भी शामिल था।

2024: वीरसेन के पोते लक्ष्यवीर सरोहा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कैसे रुका एक्सप्रेसवे का निर्माण?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक का हिस्सा दो चरणों में पूरा किया गया:

1. अक्षरधाम से लोनी (14.7 किमी)

2. लोनी से ईपीई तक (16 किमी)

इन दोनों हिस्सों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, सिवाय उस जगह के जहां वीरसेन का घर मौजूद है। जब तक यह कानूनी विवाद हल नहीं होता, तब तक यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह शुरू नहीं हो सकता।

मुआवजा विवाद और कानूनी लड़ाई

सरकार ने अधिग्रहण के समय 1100 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजे की पेशकश की थी। लेकिन, वीरसेन और कुछ अन्य किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। 94% लोग मुआवजा लेकर हट गए, लेकिन वीरसेन ने मामला कोर्ट में डाल दिया।

2010: यूपी हाउसिंग बोर्ड ने जमीन का सीमांकन किया।

2020: एनएचएआई ने परियोजना के लिए जमीन ली।

2024: सुप्रीम कोर्ट ने केस को लखनऊ बेंच में ट्रांसफर किया और जल्द समाधान के निर्देश दिए।

अब क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब 16 अप्रैल 2024 को लखनऊ बेंच में सुनवाई होगी। यह सुनवाई एक्सप्रेसवे के भविष्य के लिए बेहद अहम होगी। यदि फैसला जमीन अधिग्रहण के पक्ष में आता है, तो एक्सप्रेसवे को पूरा करने में कोई बाधा नहीं रहेगी।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के फायदे

दिल्ली से देहरादून यात्रा का समय घटकर 2.5 घंटे रह जाएगा।

अक्षरधाम से बागपत केवल 30 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।

20 किमी का एलिवेटेड सेक्शन निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भारत के प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, लेकिन यह एक घर के कानूनी विवाद में फंसकर 27 साल से अधूरा पड़ा है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले पर हैं, जिससे यह तय होगा कि क्या यह एक्सप्रेसवे अपने तय समय पर पूरा हो पाएगा या नहीं।

The Delhi-Dehradun Expressway faces a major delay due to a land dispute in Mandola, where a family has refused to vacate their 1600 sq. meter house. The legal battle started in 2007, reaching the Allahabad High Court and later the Supreme Court. This land acquisition issue has blocked the completion of the expressway connecting Delhi to Dehradun. With the case now pending in the Lucknow Bench, the project’s fate remains uncertain. The NHAI Expressway project is crucial for highway connectivity and infrastructure development in India, but legal obstacles continue to hinder progress.

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