AIN NEWS 1 नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर अब तीन नए स्थानों को प्रदर्शन और विरोध सभाओं के लिए निर्धारित किया गया है। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के मुताबिक, यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। नए आदेश के साथ 28 अप्रैल 2022 को जारी पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक संशोधन किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के विस्तृत नियम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी।
इस फैसले के बाद दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और अन्य जन संगठनों के प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से क्यों हटाया गया?
दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/2026 के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों को विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक समिति गठित की थी। समिति को मौजूदा निर्धारित प्रदर्शन स्थल के विकल्पों की जांच करने और उपयुक्त स्थानों के बारे में सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित व्यवस्था से हटा दिया गया है। इसके स्थान पर दिल्ली के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में नए स्थान निर्धारित किए गए हैं।
हालांकि, उपलब्ध आदेश में जंतर-मंतर को हटाने के पीछे किसी एक राजनीतिक प्रदर्शन, संगठन या हालिया घटना को प्रत्यक्ष कारण नहीं बताया गया है। इसलिए इस फैसले को किसी खास प्रदर्शन के कारण लिया गया निर्णय बताना उचित नहीं होगा।
अब दिल्ली में इन तीन स्थानों पर होंगे प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं।
1. रामलीला मैदान
रामलीला मैदान दिल्ली में सार्वजनिक कार्यक्रमों, राजनीतिक सभाओं और बड़े आयोजनों के लिए जाना जाता है। इसे नए निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है। इससे मध्य दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को एक वैकल्पिक स्थान मिलेगा।
2. बुराड़ी मैदान
बुराड़ी मैदान को भी नए प्रदर्शन स्थल के रूप में नामित किया गया है। यह दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है। इसके शामिल होने से राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई गई है।
3. CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली
पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को भी प्रदर्शन और विरोध सभाओं के लिए निर्धारित किया गया है। इस स्थान को शामिल करने से राजधानी के पूर्वी हिस्से में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।
इन तीनों स्थानों को निर्धारित किए जाने का अर्थ यह है कि दिल्ली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल तय किए हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल की विस्तृत शर्तें नई SOP में स्पष्ट होने की प्रतीक्षा है।
क्या अब जंतर-मंतर पर धरना नहीं दिया जा सकेगा?
इस फैसले को समझने के लिए निर्धारित प्रदर्शन स्थल और शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार के बीच अंतर समझना जरूरी है।
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का अर्थ यह है कि अब उसे पहले की तरह आधिकारिक रूप से निर्धारित स्थल नहीं माना जाएगा। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि नागरिकों का शांतिपूर्ण विरोध करने का संवैधानिक अधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों पर सार्वजनिक व्यवस्था सहित संविधान में निर्धारित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए किसी स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति, संबंधित पुलिस आदेशों, लागू प्रतिबंधों और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार तय होगी। जंतर-मंतर पर किसी विशेष प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी या नहीं, इस बारे में नई व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों के निर्णय को देखना होगा।
प्रदर्शन की अनुमति के लिए क्या होंगे नए नियम?
दिल्ली पुलिस ने अपने आदेश में कहा है कि रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया अलग से जारी की जाएगी।
इसका मतलब है कि फिलहाल केवल स्थानों की घोषणा से पूरी अनुमति प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती। नई SOP में आवेदन करने का तरीका, संबंधित अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और आयोजन से जुड़ी अन्य शर्तों का विवरण सामने आ सकता है।
जब तक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, तब तक अनुमति की समय-सीमा, अधिकतम प्रदर्शनकारियों की संख्या या अन्य शर्तों के बारे में कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बना रहे राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को संबंधित पुलिस अधिकारियों से नवीनतम नियमों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। निर्धारित स्थान होने का अर्थ यह भी नहीं है कि वहां बिना आवश्यक अनुमति के किसी भी प्रकार का आयोजन किया जा सकता है।
राजनीतिक प्रदर्शनों के बीच आया फैसला
यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन चर्चा में हैं।
विभिन्न विपक्षी समूहों और संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है। इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के कुछ इलाकों में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और यातायात प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शन भी हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित करने की मांग और दिल्ली पुलिस के नए आदेश को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस होने की संभावना है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस के आदेश में इस बदलाव का आधार गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को बताया गया है। इसलिए हालिया राजनीतिक गतिविधियों और आदेश के बीच संबंध को स्थापित करने के लिए अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी आवश्यक होगी।
जंतर-मंतर का रहा है विरोध-प्रदर्शनों से पुराना संबंध
जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और जन आंदोलनों के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। यहां सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसानों, छात्रों, राजनीतिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी मांगें उठाई हैं।
2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ चले आंदोलन ने देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी। इसके अलावा किसानों की मांगों, महिला सुरक्षा, नागरिकता कानून और अन्य सार्वजनिक मुद्दों को लेकर भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होते रहे हैं।
इसी वजह से इस स्थान को केवल एक भौगोलिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक असहमति और जनभागीदारी के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता रहा है। ऐसे में इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय नागरिक संगठनों और राजनीतिक समूहों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुराने आदेश में आंशिक संशोधन
दिल्ली पुलिस के नए स्टैंडिंग ऑर्डर में 28 अप्रैल 2022 को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/22 का उल्लेख किया गया है। नया आदेश पुराने दिशा-निर्देशों में आंशिक संशोधन करता है।
इससे स्पष्ट होता है कि प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था में बदलाव प्रशासनिक आदेश के माध्यम से किया गया है। नए स्थानों के संचालन और अनुमति प्रक्रिया को लेकर अलग से जारी होने वाली SOP महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी से व्यावहारिक नियमों की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें दिल्ली पुलिस की ओर से जारी की जाने वाली संशोधित SOP पर रहेंगी। इसके सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए आवेदन कैसे करना होगा, किन शर्तों का पालन करना पड़ेगा और आयोजकों को सुरक्षा तथा व्यवस्था से संबंधित कौन-कौन सी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
फिलहाल मुख्य तथ्य यह है कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है और रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए स्थल के रूप में नामित किया है।
यह फैसला दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। लेकिन इसे नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। अंतिम स्थिति संबंधित नियमों, अनुमति प्रक्रिया और आगे जारी होने वाले आधिकारिक दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगी।
Delhi Police has removed Jantar Mantar from the list of designated protest sites in Delhi and designated Ramlila Ground, Burari Ground and CBD Ground in East Delhi as alternative venues for protests and demonstrations. The decision follows recommendations from a committee constituted by the Ministry of Home Affairs. Under Standing Order No. L&O/48/2026, the revised protest guidelines and standard operating procedures (SOPs) for the three new protest venues will be issued separately. The development marks a significant change in Delhi protest regulations, while the rules governing permissions and peaceful demonstrations remain subject to applicable laws and official directions.



















