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कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘Gen Z हमारे बच्चे हैं, उन्हें गुमराह किया गया’

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AIN NEWS 1 संबलपुर/भुवनेश्वर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार वरिष्ठ भाजपा नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे और Gen Z को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश की ताकत है और Gen Z को किसी भी तरह कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। हालांकि, उनका दावा है कि कुछ लोगों ने छात्रों और युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की।

प्रधान ने यह बात 8 अगस्त 2026 को ओडिशा के GM University, संबलपुर में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कही। उनका बयान ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ और प्रदर्शनकारियों की ओर से तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही।

इस्तीफे पर पहली बार खुलकर बोले धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी व्यक्तिगत महत्व का विषय नहीं रहा। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इस्तीफा देने की पेशकश की थी।

उन्होंने कहा कि Gen Z हमारे ही बच्चे हैं और उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। प्रधान के मुताबिक, भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले 10 वर्षों में लगभग 20 करोड़ बच्चे इस देश की नई पीढ़ी का हिस्सा बने हैं।

उन्होंने कहा कि यही युवा आने वाले समय में भारत को आगे ले जाएंगे और देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

प्रधान का कहना था कि वह युवाओं के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका मानना है कि युवाओं की समस्याओं को समझना और उनकी बात सुनना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की।

कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन से गरमाया था माहौल

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ था। इस आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी प्रमुख रूप से सक्रिय रही। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था, NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी।

प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार सामने आती रही। बाद में प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया।

हालांकि, यह कहना कि केवल कॉकरोच पार्टी के आंदोलन की वजह से ही उन्होंने इस्तीफा दिया, पूरी तरह सही नहीं होगा। प्रधान ने खुद अपने बयान में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्होंने इस्तीफे के पीछे बच्चों और देश की सुरक्षा तथा 20 जुलाई की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।

ओडिशा में भी विरोध का सामना कर रहे प्रधान

राष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल यानी BJD के कार्यकर्ता और समर्थक कई मौकों पर उनके कार्यक्रमों के दौरान प्रदर्शन करते दिखाई दिए हैं।

संबलपुर और रायराखोल से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। एक कार्यक्रम के दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ ‘गो बैक’ के नारे लगाए तो प्रधान ने जवाब देते हुए कहा कि वह किसान के बेटे हैं और इस तरह के नारों से डरने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तब भी वह वापस नहीं जाएंगे और लोगों के बीच वापस आते रहेंगे।

प्रधान का यह बयान ओडिशा की राजनीति में चल रही भाजपा और BJD की राजनीतिक खींचतान के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवीन पटनायक पर लगाया युवाओं को भड़काने का आरोप

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन के दौरान BJD अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और एक बुरा व्यक्ति बताते हैं। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी ऐसा काम किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े।

सभा में मौजूद लोगों ने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया।

प्रधान ने कहा कि भले ही कोई यह माने कि वह राज्य के लिए सम्मान नहीं ला रहे हैं, लेकिन वह ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे ओडिशा की प्रतिष्ठा या लोगों की गरिमा को नुकसान पहुंचे।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि नवीन पटनायक के खिलाफ लगाए गए ये आरोप धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक बयान हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं बल्कि प्रधान के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

BJD ने प्रधान के आरोपों को बताया गलत

धर्मेंद्र प्रधान के आरोपों पर BJD की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। संबलपुर जिला BJD अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने प्रधान के आरोपों को खारिज किया।

उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध को केवल राजनीतिक साजिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। BJD की ओर से NEET और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

रोहित पुजारी ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से छात्रों की शिकायतों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की।

इस तरह अब यह मामला केवल शिक्षा मंत्रालय और छात्रों के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि ओडिशा की भाजपा-BJD राजनीति में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।

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प्रदर्शन के दौरान छात्रों के मुद्दे बने थे बड़ा सवाल

NEET परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी पैदा की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें भी सामने आई थीं। इसी पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र प्रधान पर राजनीतिक दबाव बढ़ता गया।

इस्तीफे के बाद प्रधान ने स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत दबाव के कारण नहीं था। उन्होंने कहा कि वह देश के बच्चों और युवाओं के हित को सबसे ऊपर रखते हैं।

‘Gen Z भारत का भविष्य है’

धर्मेंद्र प्रधान के ताजा बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Gen Z को लेकर उनका संदेश रहा। उन्होंने युवा पीढ़ी को भारत के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी के सपने बड़े हैं और उनकी आकांक्षाओं को समझने की जरूरत है।

उनके मुताबिक, भारत में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे जन्म लेते हैं और आने वाले वर्षों में यही युवा देश की दिशा तय करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की युवा पीढ़ी देश को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

इस्तीफा देने के बाद प्रधान का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पहली बार उन्होंने पूरे विवाद, युवाओं के आंदोलन और अपने फैसले को एक साथ जोड़कर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति सामने रखी है।

आगे क्या होगा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा व्यवस्था और NEET से जुड़े मुद्दों पर सरकार की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर, ओडिशा में भाजपा और BJD के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

प्रधान का ताजा बयान यह संकेत देता है कि वह सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बजाय अपने गृह राज्य में और अधिक सक्रिय रहने की तैयारी में हैं। वहीं, BJD उनके खिलाफ उठ रहे सवालों को राजनीतिक मुद्दा बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल इतना साफ है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब बहस का केंद्र केवल उनका इस्तीफा नहीं, बल्कि Gen Z, छात्रों के आंदोलन, NEET परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और ओडिशा की राजनीति भी बन गया है।

Dharmendra Pradhan has broken his silence after resigning as Union Education Minister amid the NEET protests and Cockroach Janata Party protest. Speaking in Sambalpur, Odisha, Pradhan said Gen Z is the future of India and alleged that some people tried to mislead young students during the protests. He also addressed the political opposition from the BJD and Naveen Patnaik, while defending his decision to resign. The latest developments have brought renewed attention to the NEET controversy, student protests, education reforms, Gen Z concerns and Odisha politics.

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