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डोनाल्ड ट्रंप बोले- “मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए”, भारत-पाक सीजफायर समेत 7 युद्ध रोकने का किया दावा

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AIN NEWS 1 | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने दावे को दोहराते हुए कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने दुनिया के सात बड़े युद्धों को रुकवाया है और इसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।

ट्रंप का यह बयान वाशिंगटन डीसी में आयोजित अमेरिकन कॉर्नरस्टोन इंस्टीट्यूट के एक रात्रिभोज में सामने आया। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने विश्व मंच पर ऐसा सम्मान पाया, जो पहले कभी नहीं मिला।

“हमने शांति समझौते किए, युद्ध रोके”

ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने सिर्फ व्यापारिक समझौतों पर ही नहीं, बल्कि शांति समझौतों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा,
“हमने कई युद्धों को रोका। भारत और पाकिस्तान, थाईलैंड और कंबोडिया—सबके बीच संघर्ष को खत्म कराया। भारत और पाकिस्तान का मामला तो बेहद गंभीर था। मैंने इसे केवल व्यापारिक दबाव से हल कराया। दोनों देश व्यापार करना चाहते थे, और मैंने दोनों नेताओं का सम्मान करते हुए उन्हें यह समझाया कि युद्ध से कोई फायदा नहीं होगा।”

किन-किन युद्धों का जिक्र किया ट्रंप ने?

अपने भाषण में ट्रंप ने कई वैश्विक संघर्षों का जिक्र किया और दावा किया कि उन्होंने इन पर विराम लगवाया। इनमें शामिल हैं:

  • भारत और पाकिस्तान

  • थाईलैंड और कंबोडिया

  • आर्मेनिया और अज़रबैजान

  • कोसोवो और सर्बिया

  • इज़राइल और ईरान

  • मिस्र और इथियोपिया

  • रवांडा और कांगो

ट्रंप ने कहा कि इनमें से लगभग 60 प्रतिशत युद्ध उन्होंने व्यापारिक रणनीति से रोके। उनके अनुसार, कई देशों को यह संदेश दिया गया कि अगर वे संघर्ष करेंगे, तो अमेरिका उनके साथ व्यापार नहीं करेगा। इसी कारण देशों ने पीछे हटकर शांति का रास्ता अपनाया।

भारत-पाकिस्तान को लेकर खास बयान

भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, खासकर सीमा और कश्मीर मुद्दे पर। ट्रंप ने कहा,
“सोचिए, भारत और पाकिस्तान—दोनों परमाणु ताकत वाले देश। मैंने उनसे साफ कह दिया कि अगर युद्ध हुआ, तो हम आपके साथ व्यापार नहीं करेंगे। यह सुनकर उन्होंने रुकने का फैसला लिया।”

उनका दावा है कि यह कदम इसलिए सफल हुआ क्योंकि दोनों देशों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने भाषण में मौजूदा रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उनसे कहा था—
“अगर आप रूस और यूक्रेन का युद्ध खत्म कर दें, तो आपको निश्चित रूप से नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा।”

ट्रंप ने जवाब दिया कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने से नोबेल मिल सकता है, तो फिर उन्हें सात अन्य युद्ध रोकने के लिए भी यह पुरस्कार मिलना चाहिए।
“मैंने सात युद्ध रुकवाए हैं। यह (रूस-यूक्रेन युद्ध) एक है, और हाँ यह बड़ा युद्ध है। लेकिन क्या मेरे पिछले प्रयासों की गिनती नहीं होनी चाहिए?”

ट्रंप की रणनीति: “शांति के लिए व्यापार”

डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कहते रहे हैं कि उनका सबसे बड़ा हथियार ट्रेड डिप्लोमेसी (व्यापारिक कूटनीति) था। उनका मानना है कि आर्थिक दबाव और व्यापारिक अवसरों का इस्तेमाल करके बड़े से बड़े विवाद को सुलझाया जा सकता है।

उन्होंने कहा,
“मेरे समय में विश्व मंच पर अमेरिका का सम्मान अलग स्तर पर था। हम केवल ताकत से नहीं, बल्कि व्यापार के जरिए भी शांति स्थापित कर रहे थे।”

नोबेल पुरस्कार की जिद क्यों?

ट्रंप का मानना है कि उनके योगदान को दुनिया ने उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी लेनी चाहिए थी। उन्होंने व्यंग्य भरे लहजे में कहा कि उन्हें सिर्फ एक युद्ध खत्म करने पर ही नोबेल शांति पुरस्कार देने की बात की जाती है, जबकि उन्होंने सात संघर्षों को रोका।

उनका कहना है कि अगर नोबेल शांति पुरस्कार सच में शांति स्थापित करने वालों को मिलता है, तो फिर उन्हें यह सम्मान जरूर मिलना चाहिए।

आलोचकों का नजरिया

हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि कई संघर्षों का अंत सीधे-सीधे उनके प्रयासों की वजह से नहीं हुआ, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अन्य देशों की भूमिका से हुआ।

भारत और पाकिस्तान के मामले में भी विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव में अस्थायी कमी आई थी, लेकिन इसे ट्रंप की कूटनीति से जोड़कर देखना सही नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप का यह नया बयान उनकी पुरानी शैली की ही झलक है—बड़े-बड़े दावे करना और अपने योगदान को ऐतिहासिक बताना। उनका मानना है कि व्यापारिक दबाव और कूटनीतिक वार्ताओं से उन्होंने दुनिया के कई युद्धों को रुकवाया।

चाहे उनके दावे कितने भी विवादित क्यों न हों, लेकिन इतना तय है कि वे खुद को शांति दूत की भूमिका में प्रस्तुत करना चाहते हैं और नोबेल शांति पुरस्कार पाने की उनकी महत्वाकांक्षा अभी भी कायम है।

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