AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली जा रही एक कार से करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की है। कार शाहजहांपुर से दिल्ली की ओर जा रही थी। अधिकारियों को खुफिया सूचना मिली थी कि वाहन के जरिए बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी ले जाई जा रही है, जिसके संबंध में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद DRI की टीम ने कार्रवाई करते हुए कार को पिलखुवा क्षेत्र में छिजारसी टोल प्लाजा के पास रोककर तलाशी ली।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को पहले एक बैग से 35 लाख रुपये मिले। इसके बाद जब कार की गहन जांच की गई, तो उसके दरवाजों में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों का पता चला। इन खानों में छिपाकर रखे गए 2 करोड़ 65 लाख रुपये भी बरामद किए गए। इस तरह कार से बरामद कुल नकदी की रकम 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। मामले की जानकारी आयकर विभाग को दे दी गई है, जो अब नकदी के स्रोत और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच करेगा।
खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों और DRI की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अधिकारियों को शाहजहांपुर से दिल्ली की तरफ जा रही कार में बड़ी मात्रा में नकदी ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर टीम ने निगरानी की और 17 अक्टूबर 2026 को वाहन को रोककर तलाशी अभियान चलाया।
कार की तलाशी के दौरान पहले बैग में रखे 35 लाख रुपये सामने आए। इसके बाद अधिकारियों ने वाहन के अन्य हिस्सों की जांच की। जांच में कार के दरवाजों के भीतर बनाए गए विशेष गुप्त खानों का पता चला। इन खानों में बाकी नकदी छिपाकर रखी गई थी।
कार के सामान्य हिस्सों में नकदी रखने के बजाय दरवाजों के भीतर इस तरह की जगह बनाकर रुपये छिपाए जाने का मामला जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन गुप्त खानों को किसने बनवाया, कार का इस्तेमाल पहले किन गतिविधियों के लिए हुआ था और नकदी किसकी थी, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
नकदी के संबंध में दस्तावेज नहीं दिखा सके कार सवार
DRI के मुताबिक, कार में मौजूद लोग बरामद रकम के वैध स्रोत और उसके स्वामित्व से संबंधित जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर सके। अधिकारियों के सामने नकदी कहां से आई और उसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था, इससे जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।
किसी वाहन से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति ने अपराध किया है। मामले में नकदी के स्रोत, उसके मालिकाना हक और लेन-देन की प्रकृति की जांच जरूरी है। इसी वजह से जांच एजेंसियां बरामद रकम से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करेंगी।
फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर नकदी के वास्तविक मालिक, उसके अंतिम गंतव्य और उसे ले जाने के पीछे के उद्देश्य की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
अब आयकर विभाग करेगा आगे की जांच
DRI ने बरामदगी की जानकारी आयकर विभाग को दे दी है। अब आयकर विभाग नकदी के स्रोत, संभावित वित्तीय लेन-देन और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच कर सकता है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रकम किसी कारोबारी लेन-देन से जुड़ी है या इसके पीछे कोई अन्य गतिविधि है।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कार में मौजूद लोगों की भूमिका क्या थी और क्या वे केवल रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रहे थे या इस पूरे मामले में उनकी कोई दूसरी भूमिका भी थी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति, कारोबारी प्रतिष्ठान या नेटवर्क की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, जांच के नतीजे सामने आने से पहले किसी व्यक्ति या समूह को नकदी का मालिक अथवा किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल मानना उचित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनावों के बीच बरामदगी क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं, उत्तराखंड में भी आगामी चुनावी गतिविधियों के मद्देनजर नकदी की इस बरामदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनावों के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी की आवाजाही पर जांच एजेंसियां विशेष नजर रखती हैं, क्योंकि अवैध धन के इस्तेमाल की आशंका होने पर संबंधित मामलों की पड़ताल की जाती है।
शाहजहांपुर से दिल्ली जा रही कार में तीन करोड़ रुपये मिलने के बाद इस रकम के संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में चुनावों में धन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है।
लेकिन यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि DRI की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में बरामद रकम का चुनावी गतिविधियों से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि ये रुपये किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या चुनावी अभियान के लिए ले जाए जा रहे थे।
इस संबंध में कोई भी निष्कर्ष जांच एजेंसियों के आधिकारिक बयान, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य पुष्ट साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
इस मामले में आगे की जांच के दौरान कई अहम पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है। सबसे पहला सवाल यह है कि तीन करोड़ रुपये की व्यवस्था किसने की थी और रकम का वास्तविक स्रोत क्या था। दूसरा सवाल यह है कि शाहजहांपुर से दिल्ली तक नकदी ले जाने का उद्देश्य क्या था।
इसके अलावा, यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कार के दरवाजों में गुप्त खाने कब और किसके द्वारा बनाए गए थे। क्या वाहन का इस्तेमाल पहले भी इसी तरह नकदी ले जाने के लिए किया गया था, इसकी जानकारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।
यदि रकम किसी वैध कारोबारी लेन-देन से जुड़ी है, तो संबंधित दस्तावेजों के माध्यम से इसकी पुष्टि करनी होगी। वहीं, अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल क्या है पूरे मामले की स्थिति?
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, DRI ने हापुड़ जिले के पिलखुवा क्षेत्र में छिजारसी टोल प्लाजा के पास दिल्ली जा रही कार से तीन करोड़ रुपये बरामद किए हैं। इसमें 35 लाख रुपये बैग से और 2 करोड़ 65 लाख रुपये कार के दरवाजों में बनाए गए गुप्त खानों से मिले। नकदी के स्रोत से जुड़े दस्तावेज नहीं मिलने के बाद आयकर विभाग को मामले की जानकारी दी गई है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसकी थी और इसे दिल्ली क्यों ले जाया जा रहा था। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। हापुड़ में तीन करोड़ रुपये की बरामदगी एक महत्वपूर्ण मामला है, लेकिन नकदी को चुनावों में इस्तेमाल किए जाने या किसी खास व्यक्ति अथवा संगठन से जुड़े होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है। आगे की जांच से ही रकम के स्रोत, उसके उद्देश्य और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
The Directorate of Revenue Intelligence (DRI) seized Rs 3 crore in unaccounted cash from a car travelling from Shahjahanpur to Delhi near Chhijarsi Toll Plaza in Pilkhuwa, Hapur, Uttar Pradesh. During the search, officials recovered Rs 35 lakh from a bag and Rs 2.65 crore from secret compartments built into the car doors. The occupants reportedly failed to provide documents establishing the lawful source of the cash. The Income Tax Department has been informed and will investigate the origin, ownership and intended use of the recovered money. Although the seizure comes ahead of the 2027 Uttar Pradesh Assembly elections, no confirmed link between the cash and election-related activities has been established.



















