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इटावा में यादव कथावाचक से जातिगत अभद्रता पर अखिलेश यादव का तीखा हमला, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी!

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Etawah Caste Discrimination with Yadav Kathavachak: Akhilesh Yadav Warns Yogi Government

इटावा में यादव कथावाचक से जातिगत दुर्व्यवहार पर अखिलेश यादव का फूटा गुस्सा, योगी सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में जातिगत भेदभाव का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। थाना बकेवर क्षेत्र के दान्दरपुर गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान भागवत कथा सुनाने आए कथावाचक मुकुटमणि यादव और उनके साथियों के साथ अभद्रता की गई।

कार्यक्रम के पहले दिन जब कलश यात्रा निकाली गई और भोजन का समय आया, तब कुछ ग्रामीणों ने कथावाचक की जाति पूछी। जैसे ही उन्होंने बताया कि वे यादव समुदाय से हैं, ग्रामीणों ने कथित तौर पर यह कहते हुए विवाद खड़ा कर दिया कि “यादव या अनुसूचित जाति का व्यक्ति कथा कैसे कर सकता है?”

इस जातिगत मानसिकता ने विकृत रूप तब लिया जब कथावाचक और उनकी टीम को घेरकर उनके बाल जबरन कटवा दिए गए और अपमानित करने के लिए नाक रगड़वाई गई। इतना ही नहीं, कथावाचक की ‘शुद्धि’ का नाटक भी किया गया, जैसे उन्होंने कोई अपराध कर दिया हो।

यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की इजाजत नहीं देता। ये घटना न केवल इंसानियत के खिलाफ है, बल्कि व्यक्ति की गरिमा को कुचलने वाला अपराध है। दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए। यदि तीन दिन में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो PDA के मान-सम्मान की रक्षा के लिए हम बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।”

अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के आत्मसम्मान का मामला है और इसे लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

इस बीच, इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि पीड़ित की ओर से तहरीर मिली है और SP ग्रामीण द्वारा मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है।

In a shocking case of caste-based discrimination in Etawah, Uttar Pradesh, a Yadav kathavachak and his team were publicly humiliated by villagers for conducting a Bhagwat Katha. Their hair was forcibly shaved, and they were made to rub their noses in shame. Akhilesh Yadav condemned the incident strongly, warning the Yogi government of a mass PDA protest if strict action is not taken within three days. This incident highlights the urgent need to address caste violence in rural India.

यह घटना न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी गहरा आघात पहुंचाती है। यदि सरकार समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं करती, तो यह देश में जातिगत असमानता की जड़ें और मजबूत कर सकती है।

 

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