AIN NEWS 1 मेरठ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद पुलिस प्रशासन ने उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके झूठी और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं।
इस कड़ी में मेरठ जिले के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र की दो महिला सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, मीनाक्षी और लायवा, पुलिस के निशाने पर आ गई हैं। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ड्रोन चोरों को लेकर झूठी कहानियां और वीडियो शेयर किए, जिससे शहर में दहशत और भ्रम का माहौल बन गया।
झूठी कहानी, वायरल वीडियो
लायवा, जो एमएससी की छात्रा है और इंस्टाग्राम पर करीब 80 हजार फॉलोअर्स रखती है, ने एक वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो में वह रात के लगभग तीन बजे का वक्त बताकर यह दावा करती दिख रही थी कि उसने एक ड्रोन उड़ाने वाले चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया है। वीडियो को इस तरह पेश किया गया था कि जैसे वह किसी रियल इंसीडेंट की रिपोर्टिंग कर रही हो।
इसी तरह, सरस्वती लोक निवासी मीनाक्षी, जिनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 70 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं, ने भी एक अलग वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने ड्रोन चोर से जुड़ी झूठी जानकारी दी। उन्होंने अपने फॉलोअर्स को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि इलाके में ड्रोन से चोरी हो रही है और पुलिस कुछ नहीं कर रही।
दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गए और देखते ही देखते लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया। शहर के कई इलाकों में लोग ड्रोन को देखकर खुद ही चोर समझने लगे और कुछ जगहों पर मारपीट की घटनाएं होते-होते बचीं।
पुलिस की सख्त कार्रवाई
ब्रह्मपुरी पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और दोनों महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। दोनों को थाने बुलाकर पूछताछ की गई और बाद में जमानत पर छोड़ दिया गया। लेकिन पुलिस ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करवाने के लिए यूट्यूब और फेसबुक को पत्र भी भेजा है।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि कुछ यूट्यूबर और इंस्टाग्राम यूजर्स फॉलोअर्स और लाइक्स के चक्कर में भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। इससे न केवल आम जनता में भ्रम फैलता है बल्कि कानून-व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) या गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए पुलिस ने एक विशेष साइबर मॉनिटरिंग टीम बनाई है।
सोशल मीडिया की ताकत या आफत?
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल आखिरकार कैसे किया जा रहा है। एक तरफ जहां यह प्लेटफॉर्म आम आदमी को अपनी बात कहने का माध्यम देता है, वहीं कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर समाज में भ्रम फैलाने का जरिया बना रहे हैं।
मीनाक्षी और लायवा जैसे कंटेंट क्रिएटर्स केवल लाइक्स, व्यूज़ और प्रसिद्धि के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध है।
कानून का दायरा और जिम्मेदारी
भारत के आईटी एक्ट और साइबर अपराध कानूनों के तहत, सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाना एक दंडनीय अपराध है। झूठी सूचना से यदि जन-जीवन प्रभावित होता है, तो आरोपियों पर कठोर धाराएं लग सकती हैं।
इस मामले में मेरठ पुलिस का तेज़ एक्शन इस ओर संकेत करता है कि अब ऐसे मामलों में “माफ करना” नहीं, बल्कि “कानून का पालन कराना” प्राथमिकता है।
आपकी राय क्या है?
सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाना अब केवल एक शरारती हरकत नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर अपराध बन चुका है। क्या आपको लगता है कि मीनाक्षी और लायवा जैसी यूट्यूबर्स पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए? या क्या यह सोशल मीडिया की आज़ादी पर अंकुश है?
हां, बिल्कुल – कानून का पालन जरूरी है।
नहीं, केवल चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए।
मीनाक्षी और लायवा का यह मामला सोशल मीडिया यूज़र्स के लिए एक कड़ा सबक है। फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में झूठ और भ्रम फैलाना न केवल आपकी साख को गिराता है, बल्कि आपको कानून की गिरफ्त में भी ले आता है। डिजिटल दुनिया में स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।
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