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नकली दूध का काला कारोबार: यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश में सिंथेटिक दूध फैक्ट्रियों का खुलासा!

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AIN NEWS 1: भारत में दूध को हमेशा से सबसे शुद्ध और जरूरी खाद्य पदार्थों में गिना जाता रहा है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक, हर घर में दूध की अहम भूमिका होती है। लेकिन अब यही दूध लोगों की सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश से सटे मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में नकली या सिंथेटिक दूध बनाने का बड़ा नेटवर्क सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है।

हाल ही में सामने आई रिपोर्टों और स्थानीय स्तर पर चल रही जांचों ने यह संकेत दिया है कि कुछ गिरोह बेहद कम लागत में रसायनों और मिलावटी पदार्थों की मदद से नकली दूध तैयार कर रहे हैं। यह दूध देखने में बिल्कुल असली लगता है, लेकिन इसके अंदर ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं।

कैसे तैयार किया जा रहा है सिंथेटिक दूध

जांच एजेंसियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, नकली दूध बनाने के लिए पानी, सोया ऑयल, डिटर्जेंट पेस्ट, ग्लूकोज, शीरा पाउडर और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पदार्थों को एक तय अनुपात में मिलाकर दूध जैसा सफेद और गाढ़ा तरल तैयार किया जाता है।

बताया जा रहा है कि इस मिश्रण में थोड़ी मात्रा में असली दूध भी मिलाया जाता है ताकि उसकी गंध और स्वाद वास्तविक लगे। कई मामलों में फैट बढ़ाने और दूध को ज्यादा गाढ़ा दिखाने के लिए रिफाइंड ऑयल और केमिकल्स का उपयोग किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिटर्जेंट जैसे पदार्थों का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे पेट, लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मिलावटी दूध और भी ज्यादा नुकसानदायक माना जा रहा है।

25 रुपए में तैयार हो रहा एक लीटर नकली दूध

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नकली दूध तैयार करने की लागत बेहद कम होती है। करीब 25 रुपए में एक लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है, जबकि बाजार में इसे सामान्य दूध की तरह ऊंचे दाम पर बेचा जाता है। इसी वजह से इस अवैध कारोबार में शामिल गिरोहों को भारी मुनाफा हो रहा है।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कई छोटे स्तर की फैक्ट्रियां गांवों और दूरदराज इलाकों में संचालित की जा रही हैं ताकि उन पर आसानी से नजर न पड़ सके। यहां से तैयार नकली दूध को टैंकरों और छोटे वाहनों के जरिए शहरों तक पहुंचाया जाता है।

यूपी, एमपी और राजस्थान बॉर्डर पर फैला नेटवर्क

खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश से सटे मध्यप्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। सीमावर्ती इलाकों का फायदा उठाकर गिरोह अलग-अलग राज्यों में सप्लाई कर रहे हैं ताकि कार्रवाई होने पर आसानी से बचा जा सके।

सूत्रों का कहना है कि कई बार यह दूध स्थानीय डेयरियों और थोक विक्रेताओं तक भी पहुंच जाता है। ऐसे में आम लोगों के लिए असली और नकली दूध की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

कुछ मामलों में पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में संदिग्ध फैक्ट्रियों पर छापेमारी भी की गई है। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में मिलावटी सामग्री, केमिकल और तैयार नकली दूध बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर

डॉक्टरों के अनुसार, सिंथेटिक दूध का लगातार सेवन शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले रसायन पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है क्योंकि उनका शरीर संवेदनशील होता है। लंबे समय तक ऐसे दूध का सेवन करने से लीवर और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे करें नकली दूध की पहचान

विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। अगर दूध में साबुन जैसी झाग ज्यादा बन रही हो, स्वाद असामान्य लगे या दूध बहुत ज्यादा सफेद और चमकदार दिखाई दे तो सतर्क हो जाना चाहिए।

कुछ घरेलू तरीकों से भी दूध की जांच की जा सकती है। जैसे दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर अगर साबुन जैसा एहसास हो तो उसमें मिलावट की आशंका हो सकती है। हालांकि सही जांच के लिए लैब टेस्ट सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है।

प्रशासन अलर्ट, जांच तेज

मिलावटी दूध के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई राज्यों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अगर किसी इलाके में संदिग्ध दूध फैक्ट्री या मिलावट की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें। साथ ही लोगों को भरोसेमंद डेयरी और प्रमाणित विक्रेताओं से ही दूध खरीदने की सलाह दी गई है।

उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चेतावनी

भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन मिलावट का यह बढ़ता कारोबार पूरे डेयरी सेक्टर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। त्योहारों और बढ़ती मांग के दौरान ऐसे गिरोह ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक नियमित जांच, सख्त कानून और लोगों में जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।

फिलहाल नकली दूध का यह मामला लोगों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। प्रशासन जांच में जुटा है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Reports of synthetic milk manufacturing in regions bordering Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, and Rajasthan have raised serious concerns about food safety in India. Authorities are investigating fake milk factories allegedly using detergent, refined oil, glucose, skimmed milk powder, and chemical mixtures to produce adulterated milk at low cost. The fake milk racket, milk adulteration scam, synthetic dairy production, and unsafe food supply chain have become major issues affecting public health and consumer trust across several Indian states.

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