AIN NEWS 1: गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन इलाके में इस समय वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ताजा आंकड़ों के अनुसार यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 208 दर्ज किया गया है, जो “गंभीर” (Severe) श्रेणी में आता है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। सर्दियों के मौसम में बढ़ते प्रदूषण और घने कोहरे ने हालात को और ज्यादा खराब कर दिया है।
राज नगर एक्सटेंशन की मौजूदा हवा की स्थिति
07 जनवरी 2026 की सुबह 9:22 बजे के अपडेट के मुताबिक, राज नगर एक्सटेंशन में PM2.5 का स्तर 133 µg/m³ और PM10 का स्तर 188 µg/m³ मापा गया है। ये दोनों पैरामीटर सामान्य मानकों से कई गुना अधिक हैं। इसके अलावा इलाके में TVOC 0.33 ppm और शोर स्तर लगभग 48 dB दर्ज किया गया है। ठंड के साथ 9 डिग्री सेल्सियस तापमान, 93 प्रतिशत नमी और 11 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हवा के बावजूद प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा।
घने कोहरे के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में नीचे ही बने रहते हैं और फैल नहीं पाते। इसी वजह से सुबह और रात के समय प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा महसूस होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी हवा में लंबे समय तक सांस लेना सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है।
प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव
राज नगर एक्सटेंशन में पिछले 24 घंटों के PM2.5 स्तरों के आधार पर एक चौंकाने वाला आकलन सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था Berkeley Earth और Berkeley University के शोध के अनुसार, इस इलाके की हवा में सांस लेना लगभग रोज 7.6 सिगरेट पीने के बराबर है। यानी यहां के लोग बिना धूम्रपान किए भी उतना ही नुकसान झेल रहे हैं।
खराब हवा का असर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों पर ज्यादा पड़ता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में संक्रमण, आंखों में जलन, सिर दर्द और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि इस समय खुली हवा में व्यायाम या सुबह की सैर से बचना चाहिए।
गाजियाबाद की प्रदूषण रैंकिंग
मौजूदा रिपोर्ट के मुताबिक गाजियाबाद दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 164वें स्थान पर है। भारत में भी यह शहर प्रदूषण के लिहाज से खराब श्रेणी में गिना जाता है। तेजी से होते शहरीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन इसके प्रमुख कारण हैं। सर्दियों में पराली जलाने और आतिशबाजी जैसे कारकों से भी प्रदूषण में इजाफा होता है।
राज नगर एक्सटेंशन, जो एक घनी आबादी वाला रिहायशी क्षेत्र है, वहां यह समस्या और भी गंभीर दिख रही है। कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डिवाइस यहां लगाए गए हैं, जिनसे लगातार आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। लेकिन फिलहाल सुधार के ठोस संकेत नजर नहीं आ रहे।
प्रशासन की ओर से जारी हेल्थ एडवाइजरी
गंभीर AQI को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों ने लोगों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें प्रमुख सलाह इस प्रकार हैं–
जितना संभव हो घर के अंदर रहें
बाहर निकलना जरूरी हो तो N95 मास्क जरूर पहनें
सुबह-शाम घर की खिड़कियां बंद रखें
एयर प्यूरीफायर या फिल्टर का इस्तेमाल करें
कारों में भी एयर फिल्टर ऑन रखें
बच्चों को स्कूल के बाद खुले मैदान में खेलने से रोकें
विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि घरों में पौधे लगाने, गीला पोछा लगाने और HEPA फिल्टर वाले प्यूरीफायर चलाने से प्रदूषण का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
मौसम और प्रदूषण का खतरनाक मेल
इस समय गाजियाबाद में ठंड के साथ घना कोहरा छाया हुआ है। UV इंडेक्स भी केवल 1 दर्ज किया गया है, जो बताता है कि धूप न के बराबर है। कम तापमान और ज्यादा नमी प्रदूषण को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। हवा की गति कम होने से प्रदूषण के कण ऊपर नहीं उठ पाते। यही वजह है कि AQI लगातार “Unhealthy” और “Severe” श्रेणी में बना हुआ है।
राज नगर एक्सटेंशन से सबसे नजदीकी एयर मॉनिटर केवल 1.19 किमी दूर है, जिसने भी समान रूप से खराब आंकड़े दर्ज किए हैं। आने वाले दिनों में यदि बारिश नहीं हुई या तेज हवाएं नहीं चलीं तो प्रदूषण और बढ़ सकता है।
प्रदूषण कम करने के लिए क्या किया जा सकता है
केवल प्रशासनिक सलाह से समस्या हल नहीं होगी। आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वाहनों का कम उपयोग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाना, कचरा खुले में न जलाना, निर्माण कार्यों को ढककर करना और ऊर्जा की बचत जैसे कदम बेहद जरूरी हैं। यदि हर परिवार छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करे तो हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि वायु प्रदूषण केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से भी जुड़ा बड़ा संकट है। बढ़ते प्रदूषण से तापमान असंतुलन, ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन और मौसम में अनियमितता देखने को मिलती है।
राज नगर एक्सटेंशन में खराब होती हवा गाजियाबाद के लिए एक चेतावनी है। AQI 208 का स्तर साफ बताता है कि हालात सामान्य नहीं हैं। यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि लोग सावधान रहें, स्वास्थ्य संबंधी सलाहों का पालन करें और स्वच्छ हवा के लिए हर संभव प्रयास करें।
गाजियाबाद के निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में सख्त नीतियों और सामूहिक प्रयासों से शहर की हवा फिर से सांस लेने लायक बनेगी। लेकिन तब तक सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
The air quality in Raj Nagar Extension, Ghaziabad has deteriorated to a severe AQI level, making Ghaziabad one of the most polluted cities in India and ranked 164th globally. With PM2.5 levels at 133 µg/m³ and PM10 at 188 µg/m³, residents face serious health risks. Authorities recommend staying indoors, using air purifiers, wearing N95 masks, and taking precautions especially due to dense foggy weather conditions.



















