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गाजियाबाद में फर्जी दूतावास का पर्दाफाश: हर्षवर्धन जैन कैसे बना नकली एंबेसडर और मिला नोटों का जखीरा!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद के कविनगर इलाके से हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ यूपी एसटीएफ (विशेष कार्यबल) ने एक फर्जी दूतावास का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार कर लिया। यह मामला इतना हैरान करने वाला है क्योंकि दूतावास जैसी संवेदनशील संस्थाओं को नकली तरीके से चलाने की कल्पना भी कम ही लोग कर सकते हैं।

कैसे चला फर्जी दूतावास?

हर्षवर्धन जैन ने गाजियाबाद के कविनगर इलाके में केबी-45 नंबर का मकान किराए पर ले रखा था। यहीं से वह खुद को विभिन्न देशों का एंबेसडर बताकर लोगों को धोखा दे रहा था। अपने घर को फर्जी दूतावास का रूप देने के लिए उसने दीवारों पर प्रधानमंत्री और पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपनी मॉर्फ्ड (नकली) तस्वीरें लगा रखी थीं। इतना ही नहीं, उसकी तस्वीरें विवादित धर्मगुरु चंद्रास्वामी और अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलर अदनान खशोगी के साथ भी मिली हैं।

हर्षवर्धन खुद को ऐसे देशों का एंबेसडर बताता था जिनका दुनिया के नक्शे पर कोई अस्तित्व नहीं है, जैसे – वेस्ट आर्कटिका, सबोर्गा, पौल्विया और लोडोनिया। इनमें से दो तो पूरी तरह काल्पनिक देश हैं और दो सिर्फ माइक्रोनेशन माने जाते हैं।

लोगों को कैसे फंसाता था?

यह फर्जी एंबेसडर लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने, बिजनेस शुरू कराने और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के नाम पर अपने जाल में फंसा लेता था। इसके साथ ही उसने कई शेल कंपनियों (काल्पनिक कंपनियां) बनाई थीं, जिनका इस्तेमाल हवाला (अवैध धन लेनदेन) के लिए किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क न केवल आम लोगों को चूना लगा रहा था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था।

पहले भी रहा संदिग्ध

हर्षवर्धन जैन की आपराधिक पृष्ठभूमि नई नहीं है। साल 2011 में कविनगर थाने में उसके खिलाफ अवैध सैटेलाइट फोन रखने का मामला दर्ज हुआ था। उसकी पुरानी गतिविधियों से यह साफ है कि वह लंबे समय से अवैध धंधों में लिप्त रहा है।

जब एसटीएफ ने उसके फर्जी दूतावास पर छापा मारा, तो बरामदगी की लिस्ट चौंकाने वाली थी:

राजनयिक नंबर प्लेट लगी 4 लग्जरी गाड़ियां

12 फर्जी राजनयिक पासपोर्ट (माइक्रोनेशन के)

विदेश मंत्रालय की मोहर लगे फर्जी दस्तावेज

2 फर्जी पैन कार्ड और 2 फर्जी प्रेस कार्ड

34 देशों और कंपनियों की नकली मुहरें

विभिन्न देशों की विदेशी मुद्राएं

18 नंबर प्लेट

₹44 लाख नकद

ये बरामदगी यह दर्शाती है कि फर्जीवाड़ा कितना बड़े पैमाने पर चल रहा था।

कैसे पकड़ा गया हर्षवर्धन जैन?

इस मामले में सुराग मिलने के बाद यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट ने 22 जुलाई को कविनगर स्थित उसके ठिकाने पर छापा मारा। मौके से हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

क्यों है मामला गंभीर?

फर्जी कॉल सेंटर या फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने वाले गिरोहों के बारे में आपने कई बार सुना होगा, लेकिन फर्जी दूतावास बनाना एक अलग ही स्तर का अपराध है। यह न सिर्फ आम जनता के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। फर्जी राजनयिक पहचान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा सकता है, जिससे आतंकवाद या अवैध हथियार सौदों को बढ़ावा मिल सकता है।

जनता की प्रतिक्रिया और सवाल

इस मामले ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कोई व्यक्ति राजधानी दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर इतने लंबे समय तक ऐसा फर्जी दूतावास कैसे चला सकता है? क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी?

वहीं, कुछ लोग इस बात से चिंतित हैं कि अगर कोई फर्जी राजनयिक पहचान के साथ इतनी आसानी से धोखाधड़ी कर सकता है, तो असली दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।

A fake embassy operation in Ghaziabad has been exposed by the UP STF, leading to the arrest of mastermind Harshvardhan Jain. Operating from a rented house, Jain posed as an ambassador for non-existent micro nations, engaged in hawala transactions, and lured people with fake business and job opportunities abroad. The raid uncovered fake diplomatic passports, seals of 34 countries, luxury cars with diplomatic plates, and ₹44 lakh cash, highlighting a shocking misuse of fake documents and fraudulent international connections.

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