AIN NEWS 1: गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र में शुक्रवार को किसानों और मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और महिलाएं शामिल हुईं। प्रदर्शन का सबसे खास दृश्य तब देखने को मिला जब कई महिलाएं और किसान बैलगाड़ियों में सवार होकर मोदीनगर तहसील मुख्यालय पहुंचे। वहीं महंगाई के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने खाली गैस सिलेंडर भी साथ रखे, जिससे आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ को उजागर किया जा सके।
इस दौरान किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बढ़ती महंगाई, नीट परीक्षा पेपर लीक, ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़कों और किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार बढ़ती पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और घरेलू गैस की कीमतों ने आम लोगों और किसानों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
बैलगाड़ियों के साथ निकाला विरोध मार्च
भारतीय किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में सैकड़ों किसान और महिलाएं गांवों से बैलगाड़ियों में बैठकर जीटी रोड के रास्ते मोदीनगर तहसील पहुंचे। रास्ते भर प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगाते रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे।
किसानों का कहना था कि बैलगाड़ी उनके संघर्ष और ग्रामीण भारत की पहचान का प्रतीक है। इसके माध्यम से उन्होंने सरकार और प्रशासन का ध्यान गांवों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
खाली गैस सिलेंडर बन गए महंगाई के खिलाफ प्रतीक
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने खाली रसोई गैस सिलेंडर लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। महिलाओं का कहना था कि घरेलू गैस के बढ़ते दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। लगातार महंगी होती गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतों के कारण परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
महिलाओं ने कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर घर संभालने वाली महिलाओं पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को आम जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
नीट पेपर लीक मामले पर भी जताया आक्रोश
धरना स्थल पर किसानों और मजदूरों ने हाल के चर्चित नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को भी उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जाए ताकि छात्रों का विश्वास बहाल हो सके।
जर्जर सड़कों को लेकर प्रशासन पर बरसे किसान
प्रदर्शन का सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा ग्रामीण क्षेत्रों की टूटी और खस्ताहाल सड़कें रहीं। किसानों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से सड़कों की मरम्मत और चौड़ीकरण की मांग की जा रही है, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना था कि सड़कें इतनी खराब हो चुकी हैं कि ग्रामीणों, किसानों और विद्यार्थियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
एसडीएम कार्यालय के बाहर घंटों चला धरना
मोदीनगर तहसील पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारी सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। किसानों ने मांग की कि लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर उनकी समस्याओं का समाधान बताएं।
घंटों तक चले इस धरने के दौरान किसान जमीन पर बैठकर प्रशासन के जवाब का इंतजार करते रहे। माहौल कई बार गरमाया, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा।
पीडब्ल्यूडी अधिकारी और किसान नेताओं के बीच हुई तीखी बहस
प्रदर्शन के दौरान एसडीएम मोदीनगर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता (AE) को मौके पर बुलाया। इस दौरान भारतीय किसान मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. बबली गुर्जर और महासचिव राहुल प्रधान की अधिकारियों के साथ तीखी बहस भी हुई।
डॉ. बबली गुर्जर ने कहा कि संबंधित सड़क के चौड़ीकरण और मरम्मत की मांग कई वर्षों से की जा रही है। उनका आरोप था कि पिछले दो वर्षों से विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन देकर किसानों को टालने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत नहीं की गई तो ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
त्रिपक्षीय वार्ता के बाद मिला आश्वासन
किसानों, प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद एक महत्वपूर्ण सहमति बनी। वार्ता में प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि सोमवार से संबंधित सड़क पर गड्ढा मुक्ति अभियान और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया, लेकिन साथ ही प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी भी दी।
किसानों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सोमवार से सड़क मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ तो बुधवार से किसान उसी सड़क पर बैठकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और धरातल पर काम दिखाई देना चाहिए। किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में भारतीय किसान मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. बबली गुर्जर, महिला विंग अध्यक्ष नीरज प्रजापति, महासचिव राहुल प्रधान, निर्दोष खटाना, इस्तकार प्रधान, हरेंद्र शर्मा, राहुल जाटव, राज वर्मा, बाबा चौधरी, धर्मपाल प्रधान, प्रशांत भटन, सहाब सिंह, बिट्टू बड़ायला, सुनील प्रधान, सभासद प्रवीण गुर्जर, सभासद गुलाब सिंह, नवीन जैन, तिलकराज अधाना, बलबीर भड़ाना, देव पंडित, लक्की गुर्जर, जयप्रकाश शर्मा, परशुराम, संजय खटाना, फिरे खटाना, सुनीता, पिंकी, ललिता, कमलेश और राजेंद्र समेत सैकड़ों किसान, मजदूर और महिलाएं मौजूद रहीं।
यह प्रदर्शन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भी किसानों की मांगों का समर्थन किया।
Hundreds of farmers and laborers under the Indian Kisan Mazdoor Morcha staged a massive protest at Modinagar Tehsil in Ghaziabad, Uttar Pradesh. Demonstrators arrived on bullock carts and displayed empty gas cylinders to highlight rising inflation, increasing fuel prices, expensive LPG cylinders, the NEET paper leak controversy, and deteriorating rural roads. The protest gained significant attention after farmers demanded immediate road repairs from the Public Works Department (PWD) and warned of a larger agitation if promises made by the administration are not fulfilled. This Ghaziabad farmers protest has become a major local issue, reflecting growing concerns over inflation, infrastructure, and public accountability.


















