AIN NEWS 1 गाजियाबाद: इंदिरापुरम के डी-मॉल स्थित कैफे में देर रात हुए हंगामे के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। कैफे संचालिका हरलीन कौर की शिकायत पर इंदिरापुरम थाना पुलिस ने हिंदू रक्षा दल से जुड़े बताए जा रहे अमित पहलवान, अक्कू पंडित, सौरभ पंडित और दक्ष चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक शिकायत में धमकी देने, अभद्रता, मारपीट/धक्का-मुक्की और रुपये मांगने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एफआईआर संख्या 0754/2026 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 74, 308(2), 115(2), 351(2) और 352 दर्ज हैं। एफआईआर की तारीख 13 सितंबर 2026 दर्ज है और घटना की अवधि 26 अगस्त 2026 से संबंधित बताई गई है।
हालांकि, पुलिस जांच अभी जारी है। इसलिए एफआईआर में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आरोपों की पुष्टि अदालत या पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष के बाद ही होगी।

26 अगस्त से शुरू हुआ विवाद
कैफे संचालिका हरलीन कौर की शिकायत के अनुसार, विवाद की शुरुआत 26 अगस्त को हुई थी। उनका आरोप है कि अमित पहलवान अपने कुछ साथियों के साथ कैफे पहुंचा था। शिकायत में कहा गया है कि वहां बिल के भुगतान को लेकर विवाद हुआ और कैफे बंद कराने की धमकी दी गई।
इसके बाद कैफे संचालिका के अनुसार, 30 अगस्त की रात अमित पहलवान, अक्कू पंडित, सौरभ पंडित समेत अन्य लोग दोबारा कैफे पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की गई।
कैफे संचालिका ने पुलिस को दी शिकायत में अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि दबाव बनाने की कोशिश की गई और कैफे को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बनी रही।
रुपये मांगने का भी आरोप
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा रुपये मांगने से जुड़ा है। संचालिका का आरोप है कि 5 सितंबर को व्हाट्सऐप और फोन कॉल के जरिए उनसे रुपये की मांग की गई।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में संचालिका की ओर से हर महीने 50 हजार रुपये मांगे जाने का आरोप भी सामने आया है। इसके समर्थन में कथित व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री पुलिस को दिए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, रुपये मांगने के आरोपों की वास्तविकता और इसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, यह पुलिस जांच का विषय है। एफआईआर दर्ज होना किसी आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
देर रात कैफे में पहुंचने का वीडियो वायरल
मामले के बीच एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में सौरभ पंडित कैफे के अंदर मौजूद दिखाई देते हैं और वहां युवक-युवतियों की मौजूदगी को लेकर सवाल करते नजर आते हैं।
वीडियो में रात के समय कैफे खुले होने को लेकर भी सवाल उठाए जाते हैं। वीडियो में शराब और हुक्का परोसे जाने का आरोप भी लगाया गया है। इस दौरान कैफे में मौजूद लोगों और वहां की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।
दूसरी ओर कैफे संचालिका ने इस तरह कैफे में पहुंचकर कर्मचारियों से कथित तौर पर विवाद करने और दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
पुलिस अब वायरल वीडियो के अलावा उपलब्ध अन्य वीडियो फुटेज, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, व्हाट्सऐप चैट और शिकायत में बताए गए दूसरे साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
दक्ष चौधरी का नाम भी शिकायत में
कैफे संचालिका ने अपनी शिकायत में दक्ष चौधरी का नाम भी शामिल किया है। उन पर धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में आरोपियों के पास हथियार होने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
हालांकि, हथियार से संबंधित आरोप की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर हथियार बरामद हुए हैं या नहीं।
पुलिस ने क्या कहा?
एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य के अनुसार, कैफे संचालिका की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसका मतलब साफ है कि फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि किसी आरोप की पुष्टि नहीं होती है तो उस पहलू को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
पहले भी विवादों में रहे नाम
दक्ष चौधरी और अक्कू पंडित के नाम इससे पहले भी गाजियाबाद से जुड़े विवादों में सामने आ चुके हैं। मार्च 2026 में होली के दौरान महिलाओं से कथित अभद्रता के मामले में दक्ष चौधरी और अक्कू पंडित की गिरफ्तारी की रिपोर्ट सामने आई थी। बाद में दोनों को जमानत मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।
वर्तमान मामला हालांकि अलग है और इसकी जांच इंदिरापुरम थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई नई एफआईआर के आधार पर की जा रही है।
अब आगे क्या होगा?
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करना है। इसके लिए कैफे के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, कथित व्हाट्सऐप बातचीत, फोन कॉल से जुड़े रिकॉर्ड और वायरल वीडियो की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर जांच में रुपये मांगने, धमकी, मारपीट या अन्य आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो पुलिस आरोपियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं, आरोपियों का पक्ष और उनके द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।
इस मामले में एक दूसरा पहलू कैफे में देर रात तक गतिविधियों और शराब या हुक्का परोसे जाने के आरोपों से जुड़ा है। इन आरोपों की जांच संबंधित विभागों और पुलिस द्वारा नियमों के अनुसार की जा सकती है। केवल वायरल वीडियो में किसी व्यक्ति द्वारा आरोप लगाए जाने से आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते।
फिलहाल इंदिरापुरम पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि कैफे संचालिका द्वारा लगाए गए रुपये मांगने, धमकी, अभद्रता और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे घटनाक्रम में प्रत्येक नामजद व्यक्ति की क्या भूमिका रही।
महत्वपूर्ण: इस खबर में जिन लोगों के नाम हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस शिकायत/FIR पर आधारित हैं। एफआईआर दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम तथ्य पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
A Ghaziabad cafe FIR has been registered at Indirapuram Police Station against Amit Pehalwan, Akku Pandit, Saurabh Pandit and Daksh Chaudhary following allegations made by cafe operator Harleen Kaur. The complaint alleges threats, harassment, physical altercation and demands for money. Police are also examining a viral video related to the incident and other available evidence. The Ghaziabad Police investigation will determine the facts and the role of each person named in the FIR.



















