गाजियाबाद मासूम हत्याकांड: पिता की दो टूक मांग- आर्थिक मदद नहीं, दोषियों को फांसी चाहिए, पुलिस ने घटनास्थल पर दोबारा की जांच
AIN NEWS 1 गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित एक निर्माणाधीन मॉल में सात वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को साथ लेकर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया। इस दौरान वारदात से जुड़े हर पहलू का पुनः परीक्षण किया गया और परिवार के बयान दर्ज कर जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं की पुष्टि की गई।
यह मामला पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर छोटे-बड़े साक्ष्य को जुटाने में लगी है ताकि अदालत में मजबूत आरोप पत्र पेश किया जा सके।

पिता बोले- बेटी वापस नहीं आएगी, हमें केवल न्याय चाहिए
घटनास्थल पर पहुंचे पीड़ित पिता ने अधिकारियों से भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी अब कभी वापस नहीं आएगी। ऐसे में किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। उन्होंने सरकार और न्यायपालिका से केवल एक ही मांग की कि दोनों आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपनी संतान को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यदि इस तरह के मामलों में दोषियों को कठोर और त्वरित सजा मिलेगी, तभी समाज में ऐसा अपराध करने वालों के मन में कानून का डर पैदा होगा।
कुछ दिन पहले ही देखा था आरोपियों को
पिता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह दोनों आरोपियों को पहले से नहीं जानते थे। उन्होंने उन्हें केवल कुछ दिन पहले निर्माणाधीन मॉल में मजदूरी करते देखा था। दोनों आरोपी वहां काम कर रहे थे और सामान्य मजदूरों की तरह ही व्यवहार करते थे।
उन्होंने बताया कि आरोपियों ने एक-दो बार उनकी बेटी को समोसा और कोल्ड ड्रिंक देकर उससे बातचीत करने की कोशिश की थी। परिवार को उस समय इसमें कोई खतरा नजर नहीं आया, क्योंकि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि दोनों इतनी भयावह वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
घटनास्थल पर दोबारा पहुंची पुलिस टीम
सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को साथ लेकर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस ने परिवार से घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी लेकर सभी तथ्यों का मिलान किया।
जांच अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों का पुनः आकलन किया ताकि आरोप पत्र तैयार करते समय कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए। पुलिस का कहना है कि हर साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित किया जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज बना जांच का महत्वपूर्ण आधार
जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए अहम साक्ष्य साबित हो रहे हैं। फुटेज के अनुसार दोनों आरोपी बच्ची को अपने साथ निर्माणाधीन मॉल के अंदर ले जाते दिखाई दिए।
प्रारंभिक जांच के अनुसार बच्ची ऊपर जाने के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन आरोपियों ने उसे बहला-फुसलाकर मॉल की ऊपरी मंजिल की ओर ले गए। इसके बाद वह वापस बाहर नहीं आई। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी मिलान कर रही है।
वारदात के बाद सामान्य दिखने की कोशिश
पुलिस जांच के मुताबिक घटना के बाद दोनों आरोपी अपनी झुग्गी में लौट गए और सामान्य दिनचर्या की तरह सो गए ताकि किसी को उन पर शक न हो। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने वारदात के बाद खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी जांच का अहम हिस्सा
पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ रही है।
हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में पीड़िता की गरिमा और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए सभी चिकित्सीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। इसलिए अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले वैज्ञानिक साक्ष्य ही इस मामले की दिशा तय करेंगे।
जल्द दाखिल होगा आरोप पत्र
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि पुलिस तेजी से जांच पूरी कर रही है। सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद जल्द ही न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस की कोशिश है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके। साथ ही अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की भी तैयारी की जा रही है।
फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों पर विशेष जोर
इस मामले में पुलिस केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर निर्भर नहीं है, बल्कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले नमूनों और अन्य वैज्ञानिक जांच को भी मजबूत आधार बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से पुलिस प्रत्येक पहलू की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है।
इलाके में गुस्सा, न्याय की मांग तेज
घटना के बाद राजनगर एक्सटेंशन सहित पूरे गाजियाबाद में लोगों के बीच गहरा आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि इस तरह के जघन्य अपराधों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा ही समाज में अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा कर सकती है।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस अब सभी साक्ष्यों को अंतिम रूप देकर आरोप पत्र तैयार करने में जुटी है। इसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचेगा, जहां अभियोजन पक्ष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग करेगा। यदि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो अदालत में जल्द सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
फिलहाल पीड़ित परिवार की एक ही मांग है—उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि उनकी मासूम बेटी को न्याय मिले और दोषियों को कानून के तहत सबसे कठोर सजा दी जाए। अब पूरे प्रदेश की नजर पुलिस की जांच और अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
The Ghaziabad Minor Girl Murder Case has drawn nationwide attention after the brutal rape and murder of a seven-year-old girl in Raj Nagar Extension. Police have reconstructed the crime scene with the victim’s family, collected crucial evidence, and are preparing a strong chargesheet for a fast-track trial. The victim’s father has refused financial compensation and demanded the death penalty for the accused. Follow the latest Ghaziabad crime news, police investigation updates, court proceedings, and developments in this heartbreaking case.


















