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(देखें वीडियो)“50 हजार दो, नहीं तो जेल भेज दूंगा” — रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया निवाड़ी थाने का इंस्पेक्टर!

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AIN NEWS 1: गाजियाबाद से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। निवाड़ी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की टीम उन्हें थाने से ही कस्टडी में लेकर चली गई, ठीक वैसे ही जैसे किसी आम आरोपी को ले जाया जाता है।

यह कार्रवाई उस समय हुई, जब इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत अपने ही कार्यालय में कुर्सी पर बैठे थे और रिश्वत की रकम उनकी जेब से बरामद की गई। बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर ने यह रकम एक पूर्व ग्राम प्रधान से केस में राहत देने के बदले मांगी थी।

📍 पूरा मामला क्या है?

इस पूरे मामले के शिकायतकर्ता हैं राकेश कुमार उर्फ बिट्टू, जो गाजियाबाद के निवाड़ी थाना क्षेत्र के अबुपुर गांव में वर्ष 2000 से 2005 तक ग्राम प्रधान रह चुके हैं। उनकी पत्नी बबीता रानी हापुड़ के हाफिजपुर क्षेत्र में सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं।

राकेश कुमार के मुताबिक, 2 जनवरी 2026 को उनके खिलाफ निवाड़ी थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर गांव के ही एक व्यक्ति विजय सिंह की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि राकेश कुमार ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

⏰ “जिस समय की घटना दिखाई गई, उस समय मैं बैंक में था”

पूर्व प्रधान राकेश कुमार का कहना है कि एफआईआर में जिस समय की घटना बताई गई है, उस वक्त वे SBI बैंक में मौजूद थे। उन्होंने पुलिस को यह भी कहा कि:

उनकी लोकेशन चेक की जाए

बैंक के CCTV फुटेज देखे जाएं

किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में उन्होंने कोई पोस्ट नहीं डाली

राकेश का आरोप है कि गांव में चुनावी रंजिश के चलते उन्हें झूठे केस में फंसाया गया।

🚨 इंस्पेक्टर का दबाव और धमकी

राकेश कुमार के अनुसार, केस दर्ज होने के बाद इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत ने उन्हें साफ शब्दों में धमकाया—

“अगर जेल नहीं जाना है तो 50 हजार रुपये देने होंगे।

FIR लिखी है, कुछ तो करना ही पड़ेगा।”

आरोप है कि इंस्पेक्टर ने यह भी कहा कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो वह किसी भी हाल में जेल भेज देंगे, चाहे शांतिभंग जैसी मामूली धारा ही क्यों न लगानी पड़े।

🏢 अधिकारियों के चक्कर, लेकिन नहीं मिली सुनवाई

पूर्व प्रधान ने बताया कि उन्होंने इस मामले में कई स्तरों पर शिकायत की—

ACP मोदीनगर से मुलाकात

DCP देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी से शिकायत

अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क

यहां तक कि उनकी पत्नी बबीता रानी ने भी लिखित शिकायत पत्र दिया। लेकिन हर जगह सिर्फ जांच का आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

🏠 घर पर दबिश, मानसिक उत्पीड़न का आरोप

राकेश कुमार का आरोप है कि इंस्पेक्टर जयपाल रावत कई बार उनके घर दबिश देने पहुंचे।

1 फरवरी 2026 को भी इंस्पेक्टर उनके घर आए और उन्हें जेल भेजने की धमकी देते हुए गालियां दीं।

राकेश के अनुसार—

“एक महीने तक मैं थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा।

मानसिक रूप से इतना परेशान किया गया कि मजबूरी में रिश्वत देने का फैसला करना पड़ा।”

🕵️‍♂️ विजिलेंस में शिकायत और जाल बिछाया गया

थक-हारकर राकेश कुमार ने मेरठ विजिलेंस टीम से संपर्क किया।

विजिलेंस अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच के बाद योजना बनाई और शिकायतकर्ता से कहा—

“आप तय समय पर जाकर रिश्वत दीजिए, बाकी हम देख लेंगे।”

योजना के मुताबिक, राकेश कुमार इंस्पेक्टर जयपाल रावत के कार्यालय पहुंचे और 50 हजार रुपये उन्हें सौंप दिए।

🔴 रंगे हाथ गिरफ्तारी

जैसे ही इंस्पेक्टर ने रुपये अपनी जेब में रखे, विजिलेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ लिया।

रिश्वत की रकम उनकी जेब से बरामद की गई और उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

इसके बाद विजिलेंस टीम इंस्पेक्टर को थाने से बाहर ले गई, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

👮‍♂️ कौन हैं इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत?

2013 बैच के दरोगा

करीब एक साल पहले इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन

पहले हापुड़ में सर्विलांस में तैनात रह चुके

फिलहाल निवाड़ी थाने में तैनाती

📸 “मेरे घर में चारों तरफ कैमरे लगे हैं”

पूर्व प्रधान ने यह भी बताया कि 10 दिसंबर 2025 को उन्होंने जिले के प्रभारी मंत्री असीम अरुण का कार्यक्रम भी आयोजित कराया था।

उनके मकान के आसपास कैमरे लगे हैं, जिससे साफ है कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

⚖️ अब आगे क्या?

विजिलेंस टीम इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर रही है।

मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस विभाग में यह घटना भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

A major corruption case has emerged from Ghaziabad, Uttar Pradesh, where the Vigilance Department arrested Niwari Police Station inspector Jaypal Singh Rawat while accepting a ₹50,000 bribe. The inspector allegedly demanded money from a former village head in exchange for relief in a false FIR. The vigilance team recovered the bribe amount from his pocket, highlighting serious concerns about police corruption in Ghaziabad and Uttar Pradesh law enforcement.

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