AIN NEWS 1: गाजियाबाद के निवाड़ी थाना परिसर में मंगलवार दोपहर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने खाकी की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए। जिस थाने में आम लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं थाने का प्रभारी इंस्पेक्टर रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम के जाल में फंस गया। पूरी कार्रवाई इतनी योजनाबद्ध और फिल्मी अंदाज में हुई कि किसी को भनक तक नहीं लगी।
⏰ दो घंटे की प्लानिंग, 12:15 बजे कार्रवाई
मंगलवार, 3 फरवरी 2026 की सुबह करीब 10 बजे से ही मेरठ विजिलेंस टीम ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। तीन गाड़ियों में सवार 15 सदस्यीय टीम निवाड़ी थाने से करीब 100 मीटर पहले रुकी। सभी सादे कपड़ों में थे। किसी ने शॉल ओढ़ रखी थी, तो किसी ने मफलर से चेहरा ढक रखा था। बाहर से देखने पर वे किसान या आम फरियादी ही लग रहे थे।
👮♂️ थाने में फरियादी बनकर एंट्री
एक-एक करके विजिलेंस टीम के सदस्य थाने में दाखिल हुए। किसी ने मोबाइल चोरी की शिकायत बताई, कोई पड़ोसी विवाद की बात करता नजर आया। थाने के मुंशी ने सभी को आवेदन लिखने को कहा। इसी दौरान एक विजिलेंसकर्मी ने मोबाइल पर संदेश भेजकर कन्फर्म किया कि SHO जयपाल सिंह रावत अपने कमरे में ही मौजूद हैं।
💰 रिश्वत की डील और जाल
कुछ देर बाद पूर्व प्रधान राकेश कुमार उर्फ बिट्टू को थाने बुलाया गया। राकेश वही व्यक्ति थे, जिनसे SHO ने 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। राकेश कमरे में पहुंचे और बोले—
“साहब, जो आपने कहा था, पूरे पैसे ले आया हूं।”
इतना कहते ही उन्होंने 500-500 रुपए की गड्डी टेबल पर रख दी। इंस्पेक्टर ने पूछा— “पूरे हैं?”
राकेश ने जवाब दिया— “गिन लीजिए।”
इंस्पेक्टर मुस्कुराए और बिना गिने ही नोटों की गड्डी अपनी पैंट की दाहिनी जेब में रख ली।
🚨 इशारा मिलते ही खुली पोल
जैसे ही तय इशारा हुआ, थाने में मौजूद सभी “फरियादियों” ने अपने शॉल और मफलर हटा दिए। तभी SHO के कमरे में विजिलेंस अधिकारी दाखिल हो गए। अचानक माहौल बदल गया।
इंस्पेक्टर घबरा गए— “कौन हो तुम लोग? बाहर निकलो…”
उनके गनर ने भी धक्का देने की कोशिश की, लेकिन विजिलेंस अधिकारी ने तुरंत अपना आईकार्ड दिखा दिया। इसके बाद थाने में हड़कंप मच गया।
👔 वर्दी उतारकर गिरफ्तारी
नियमों के अनुसार वर्दी में गिरफ्तारी नहीं हो सकती थी। इसलिए इंस्पेक्टर के आवास से सादे कपड़े मंगवाए गए। थाने में ही उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई और फिर उन्हें मुल्जिम की तरह गाड़ी में बैठाकर मेरठ विजिलेंस कार्यालय ले जाया गया।
अब इंस्पेक्टर जयपाल सिंह रावत के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज है और आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी गई है।
👨🌾 रिश्वत क्यों मांगी गई थी?
पूर्व प्रधान राकेश कुमार ने बताया कि उनके घर के नीचे स्थित बैंक शाखा से जनरेटर की बैटरी चोरी हो गई थी। CCTV फुटेज भी मौजूद थे, लेकिन SHO ने FIR दर्ज नहीं की। उल्टा उनसे कहा गया—
“या तो जेल जाओ, या 50 हजार दो।”
मजबूरी में उन्होंने कई जगह शिकायत की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने मेरठ विजिलेंस से संपर्क किया।
🧾 टेबल के नीचे मिली शिकायत
जब विजिलेंस टीम ने SHO के ऑफिस की तलाशी ली, तो राकेश की वही शिकायत पत्र टेबल के नीचे दबी हुई मिली, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
📜 इंस्पेक्टर का बैकग्राउंड
जयपाल सिंह रावत मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं।
1996 में सिपाही बने
2013 में दरोगा
दो साल पहले इंस्पेक्टर प्रमोशन
वर्तमान पोस्टिंग: निवाड़ी थाना, गाजियाबाद
थाने के स्टाफ के मुताबिक, वे खुद ही पैसों की डीलिंग करते थे और तय करते थे कि किस पर केस दर्ज होगा और किसे राहत मिलेगी।
⚖️ पहले भी विवादों में रहा थाना
दिसंबर 2025 में DCP देहात के निरीक्षण के दौरान थाने की कई कमियां सामने आई थीं। हथियार चलाने तक की जानकारी नहीं थी। इसके अलावा झूठे मुकदमे दर्ज करने और दबाव बनाने के आरोप भी पहले लग चुके हैं।
🚔 आगे क्या?
पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि केस को मजबूत बनाया जाएगा ताकि आरोपी को आसानी से जमानत न मिल सके।
A major vigilance operation in Ghaziabad exposed corruption inside a police station when a senior inspector was caught red-handed accepting a ₹50,000 bribe. The Ghaziabad vigilance trap involved officers disguised as farmers and complainants, leading to the arrest of Inspector Jaypal Singh Rawat. The case highlights growing concerns over police corruption in Uttar Pradesh and strict vigilance action against bribery in the UP Police system.




















