AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 10 अप्रैल को जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने गाजियाबाद जिले में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। इस नई सूची के अनुसार जिले में कुल 3,78,100 वोटरों की कमी दर्ज की गई है, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।
पहले जहां गाजियाबाद की कुल आबादी 48 लाख से अधिक मानी जा रही थी, वहीं अब वोटर लिस्ट में आए इस बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
गाजियाबाद में अब कितने वोटर हैं?
नई अंतिम मतदाता सूची के अनुसार गाजियाबाद जिले में अब कुल:
कुल वोटर: 23,61,702
पुरुष वोटर: 13,19,238
महिला वोटर: 10,42,330
थर्ड जेंडर वोटर: 134
जिले में कुल 3358 मतदान केंद्र (मतदेय स्थल) बनाए गए हैं।
विधानसभा वार वोटर संख्या (नई सूची के अनुसार)
गाजियाबाद जिले की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर वोटरों की स्थिति इस प्रकार है:
लोनी: 4,46,941 वोटर (582 बूथ)
मुरादनगर: 3,92,006 वोटर (543 बूथ)
साहिबाबाद: 7,25,985 वोटर (1171 बूथ)
गाजियाबाद: 3,90,472 वोटर (530 बूथ)
मोदीनगर: 3,08,109 वोटर (397 बूथ)
धौलाना (आंशिक): 98,189 वोटर (135 बूथ)
👉 इनमें सबसे ज्यादा वोटर साहिबाबाद विधानसभा में हैं, जहां संख्या 7 लाख से अधिक है।
SIR से पहले क्या थी स्थिति?
28 अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार:
कुल जनसंख्या: 48,03,625
कुल वोटर: 28,37,991
यानि SIR से पहले गाजियाबाद में वोटरों की संख्या करीब 28.37 लाख थी।
कुल कितने वोटर घटे?
नई सूची के अनुसार:
👉 कुल वोटर घटे: 3,78,100
यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है और यह चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
किस विधानसभा में कितने वोटर कम हुए?
SIR के बाद हर विधानसभा में वोटरों की संख्या में कमी दर्ज की गई है:
साहिबाबाद: 3,16,484 वोट कम
लोनी: 85,814 वोट कम
गाजियाबाद: 77,832 वोट कम
मुरादनगर: 67,692 वोट कम
मोदीनगर: 26,656 वोट कम
👉 सबसे ज्यादा असर साहिबाबाद में देखने को मिला, जहां अकेले 3 लाख से ज्यादा वोटर सूची से हटे हैं।
वोटर घटने की क्या हो सकती है वजह?
इतनी बड़ी संख्या में वोटर कम होना सामान्य नहीं माना जाता। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:
1. डुप्लीकेट नाम हटाना
SIR प्रक्रिया के दौरान एक ही व्यक्ति के कई नाम होने पर उन्हें हटाया गया।
2. मृत मतदाताओं का नाम हटना
जो लोग अब जीवित नहीं हैं, उनके नाम भी सूची से हटाए गए।
3. स्थान परिवर्तन (Migration)
गाजियाबाद जैसे शहरी इलाके में लोग अक्सर नौकरी या अन्य कारणों से स्थान बदलते हैं।
4. दस्तावेज सत्यापन
जिनके दस्तावेज सही नहीं पाए गए, उनके नाम भी हटाए जा सकते हैं।
चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
वोटर संख्या में इतनी बड़ी गिरावट सीधे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है:
राजनीतिक दलों की रणनीति बदल सकती है
कुछ क्षेत्रों में वोट प्रतिशत बढ़ या घट सकता है
नए मतदाताओं को जोड़ने पर जोर बढ़ेगा
खासतौर पर साहिबाबाद और लोनी जैसी सीटों पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
क्या यह सामान्य प्रक्रिया है?
हाँ, चुनाव आयोग समय-समय पर Special Intensive Revision (SIR) करता है ताकि:
फर्जी वोटर हटाए जा सकें
वास्तविक मतदाता सूची तैयार हो
चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हो
लेकिन इतनी बड़ी संख्या में वोटर घटना चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासन का क्या कहना है?
जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार:
पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है
हर नाम की जांच के बाद ही हटाया गया
अगर किसी का नाम गलती से हट गया है, तो वह दावा-आपत्ति के माध्यम से दोबारा जुड़वा सकता है
गाजियाबाद में SIR के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। 3.78 लाख वोटरों का कम होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह चुनावी परिदृश्य को बदलने वाला संकेत भी हो सकता है।
अब देखना होगा कि राजनीतिक दल और प्रशासन इस बदलाव के बाद किस तरह अपनी रणनीति तैयार करते हैं। साथ ही आम नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी वोटर स्थिति की जांच करें और यदि नाम सूची में नहीं है तो समय रहते उसे जुड़वाएं।
The Special Intensive Revision (SIR) 2026 conducted by the Election Commission has led to a significant reduction of 378,100 voters in Ghaziabad district. The updated voter list highlights major changes across key assemblies like Loni, Muradnagar, Sahibabad, and Modinagar. With total voters now standing at 2.36 million, this revision raises important questions about population data accuracy, voter verification, and electoral transparency in Uttar Pradesh.


















