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हरिद्वार में अवैध मजार पर बुलडोजर कार्रवाई, सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण!

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हरिद्वार में अवैध मजार पर बुलडोजर कार्रवाई, सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण

AIN NEWS 1: उत्तराखंड के हरिद्वार में प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सुमन नगर इलाके में सिंचाई विभाग की भूमि पर बनी एक अवैध मजार को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई थी, बल्कि इसके पीछे एक पूरी प्रक्रिया रही। करीब एक महीने पहले जिला प्रशासन ने इस जगह पर नोटिस चस्पा किया था। नोटिस में वहां मौजूद लोगों और खादिमों से जमीन के मालिकाना हक और निर्माण से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा गया था। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर एक समय सीमा भी तय की थी, जिसके भीतर उन्हें अपने दावे को साबित करना था।

हालांकि, तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई वैध दस्तावेज प्रशासन के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अवैध निर्माण को हटाने का निर्णय लिया। बुधवार सुबह एसडीएम जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर इस मजार को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

ध्यान देने वाली बात यह रही कि ध्वस्तीकरण से पहले ही वहां मौजूद लोगों ने अपने सामान को स्वेच्छा से हटा लिया था। इससे यह कार्रवाई बिना किसी टकराव या विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सकी। प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना है, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना।

कार्रवाई के बाद जब मलबे को हटाया गया, तो उसके नीचे किसी भी प्रकार के पुराने या ऐतिहासिक अवशेष नहीं पाए गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह निर्माण हाल के समय में ही किया गया था और इसका कोई प्राचीन या ऐतिहासिक आधार नहीं था। यही वजह रही कि प्रशासन ने इसे पूरी तरह अवैध मानते हुए हटाने का निर्णय लिया।

उत्तराखंड सरकार पहले से ही राज्य में अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। सरकार के अनुसार, अब तक प्रदेशभर में लगभग 600 से अधिक ऐसी अवैध संरचनाओं को हटाया जा चुका है, जो सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के बनाई गई थीं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखना और उसका सही उपयोग सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखाया है। उनका कहना है कि हरिद्वार जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों की पहचान और स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग सरकारी जमीन पर कब्जा करके धार्मिक स्वरूप देने की कोशिश करते हैं, जो पूरी तरह गलत है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन का यह भी कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। जहां-जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे पाए जाएंगे, वहां पहले नोटिस देकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और उसके बाद सख्त कदम उठाए जाएंगे। सिंचाई विभाग की जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त कराने के लिए एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान शांति बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशासन की कोशिश रही कि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति पैदा न हो। यही कारण है कि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और कहीं से भी किसी प्रकार के विरोध या टकराव की खबर सामने नहीं आई।

इस कार्रवाई को लेकर इलाके में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ लोग इसे सरकारी जमीन को बचाने के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई में संवेदनशीलता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता कानून का पालन करना और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा करना है।

कुल मिलाकर, हरिद्वार में हुई यह कार्रवाई उत्तराखंड सरकार के उस रुख को दर्शाती है, जिसमें अवैध कब्जों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान जारी रहने की संभावना है, जिससे सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके।

Authorities in Haridwar carried out a bulldozer action to demolish an illegal mazar constructed on government land in Suman Nagar, as part of Uttarakhand’s ongoing encroachment removal drive. After issuing a prior notice and failing to receive valid ownership documents, officials proceeded with the demolition in a peaceful manner. The action highlights the Dhami government’s strict stance against illegal constructions and its commitment to protecting public land in key religious and cultural areas like Haridwar.

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