AIN NEWS 1: हरियाणा में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग सेक्टर और सरकारी संस्थानों के बीच कामकाज के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर IDFC First Bank के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले की जांच अब हरियाणा विजिलेंस विभाग ने अपने हाथ में ले ली है।
बताया जा रहा है कि यह मामला सरकारी धन के लेन-देन और वित्तीय प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बैंक के कुछ अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार के कुछ विभागों से जुड़े वित्तीय खातों के संचालन के दौरान कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि सरकारी धन के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे राज्य को लगभग 590 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ।
इस मामले की शिकायत मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों ने प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की ओर इशारा मिला। इसके बाद चंडीगढ़ में औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर दी गई।
जांच एजेंसियों का मानना है कि सरकारी खातों से जुड़े ट्रांजैक्शन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विजिलेंस विभाग की जांच शुरू
एफआईआर दर्ज होने के बाद हरियाणा विजिलेंस विभाग ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसमें किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही।
विजिलेंस टीम अब बैंक के रिकॉर्ड, संबंधित सरकारी विभागों के दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन के डाटा की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस मामले में किसी प्रकार की साजिश या मिलीभगत तो नहीं हुई।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का सख्त कदम: बैंक ब्लैकलिस्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए IDFC फर्स्ट बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसके साथ ही राज्य के सभी विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे बैंक में संचालित अपने खातों को जल्द से जल्द बंद कर दें।
सरकार का यह कदम यह दर्शाता है कि वह वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि वित्तीय संस्थानों के लिए भी एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सरकारी फंड के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैंकिंग सेक्टर पर संभावित असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ सकता है। सरकारी खातों के संचालन में बैंकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, और ऐसे मामलों के सामने आने से विश्वास की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद सरकार और बैंकिंग संस्थानों के बीच वित्तीय प्रक्रियाओं की निगरानी और अधिक सख्त हो सकती है। साथ ही भविष्य में सरकारी खातों के संचालन को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और विजिलेंस विभाग सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित घोटाले में किसकी क्या भूमिका रही।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर, अगर जांच में किसी तरह की प्रक्रियागत त्रुटि सामने आती है, तो प्रशासनिक स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
हरियाणा में सामने आया यह मामला सरकारी धन के प्रबंधन और बैंकिंग प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर एक अहम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। एफआईआर दर्ज होने और विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद अब सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
राज्य सरकार के सख्त रुख से यह साफ है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
An FIR has been filed against IDFC First Bank in Haryana over an alleged ₹590 crore government fund fraud case, triggering a vigilance investigation in Chandigarh. The Haryana government has reportedly blacklisted the bank and instructed all departments to close their accounts. This major banking fraud case involving financial irregularities, government transactions, and institutional accountability is expected to impact banking operations and regulatory scrutiny across India’s financial sector.


















