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भारत ने रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीद को दी मंजूरी, ऑपरेशन सिंदूर के बाद हवाई सुरक्षा और मजबूत!

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AIN NEWS 1: भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में सरकार ने रूस से 288 नई S-400 मिसाइलें खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले साल हुए “ऑपरेशन सिंदूर” में इन मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था और उनका स्टॉक काफी हद तक कम हो गया था।

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने दी मंजूरी

रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से 288 S-400 मिसाइलों की खरीद को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ यानी AoN (Acceptance of Necessity) प्रदान की है। यह मंजूरी फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत दी गई है, ताकि जल्द से जल्द भारतीय वायुसेना के स्टॉक को फिर से भरा जा सके।

इन 288 मिसाइलों में 120 शॉर्ट-रेंज और 168 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें शामिल हैं। ये सभी मिसाइलें पहले से भारत के पास मौजूद S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम के लिए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका

मई 2025 में भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। यह ऑपरेशन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।

इस कार्रवाई के दौरान S-400 सिस्टम ने भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिपोर्टों के मुताबिक, S-400 की लॉन्ग-रेंज मिसाइलों ने लगभग 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक निगरानी और इंटरसेप्शन की क्षमता दिखाई। कहा जाता है कि इस दौरान पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई और संभावित हवाई खतरों को समय रहते निष्क्रिय किया गया।

इतने बड़े स्तर पर उपयोग के कारण S-400 मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट गया था। यही वजह है कि अब सरकार ने नई मिसाइलें खरीदकर सुरक्षा कवच को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया है।

S-400 सिस्टम क्यों है खास?

S-400 ट्रायम्फ दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में से एक माना जाता है। यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और अलग-अलग दूरी की मिसाइलों के जरिए उन्हें निशाना बना सकता है।

इसकी खासियतें इस प्रकार हैं:

400 किलोमीटर तक की रेंज (लॉन्ग-रेंज मिसाइलों के साथ)

एक साथ कई टारगेट को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की क्षमता

फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को रोकने में सक्षम

अत्याधुनिक रडार और कमांड सिस्टम से लैस

भारत पहले ही S-400 सिस्टम की कई स्क्वाड्रन तैनात कर चुका है, जो देश के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा कर रही हैं।

आगे की रणनीति क्या है?

भारत और रूस के बीच पहले से हुए समझौते के तहत S-400 सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट्स की डिलीवरी भी तय है। जानकारी के अनुसार, दो और S-400 सिस्टम जून 2026 और नवंबर 2026 तक भारत को मिल जाएंगे।

नई 288 मिसाइलों की खरीद से इन सिस्टम्स की मारक क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी और बेहतर हो जाएगी। इससे भारतीय वायुसेना की हवाई सुरक्षा परत और मजबूत होगी।

अन्य रक्षा प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

उसी बैठक में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कई बड़े रक्षा प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। इनमें शामिल हैं:

114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद प्रक्रिया

कॉम्बैट मिसाइल सिस्टम

हाई-एल्टीट्यूड छद्म-सैटेलाइट (जो भारत में ही विकसित किए जाएंगे)

‘विभव’ नामक एंटी-टैंक माइंस

टैंक और BMP-II व्हीकल्स का ओवरहॉल

मरीन गैस टरबाइन और अन्य नौसैनिक उपकरण

यह सभी फैसले भारत की सैन्य आधुनिकीकरण नीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना है।

भारत की सुरक्षा नीति का संकेत

S-400 मिसाइलों की नई खरीद सिर्फ एक सैन्य सौदा नहीं है, बल्कि यह भारत की स्पष्ट रणनीतिक सोच को भी दर्शाता है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस तरह त्वरित और सटीक जवाब दिया, उससे यह साफ हो गया कि अब देश सुरक्षा मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहता।

नई मिसाइलों की खरीद से यह संदेश भी जाता है कि भारत अपनी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही, यह रक्षा तैयारियों को लंबी अवधि के लिए मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीद का फैसला भारत की बढ़ती सुरक्षा जरूरतों और रणनीतिक सोच का हिस्सा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन मिसाइलों ने अपनी क्षमता साबित की थी। अब स्टॉक को फिर से मजबूत करना जरूरी हो गया था।

रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी के बाद यह सौदा जल्द आगे बढ़ेगा। आने वाले समय में S-400 सिस्टम की पूरी क्षमता के साथ तैनाती भारत की हवाई सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

भारत का संदेश साफ है — देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

India has approved the purchase of 288 S-400 missiles from Russia after their extensive deployment during Operation Sindoor in response to the Pahalgam terror attack. The Defence Acquisition Council (DAC) cleared the ₹10,000 crore proposal to replenish the Indian Air Force’s S-400 air defence system stock and strengthen India’s aerial defence capabilities. The deal includes short-range and long-range S-400 missiles, further enhancing India’s strategic military preparedness and modernisation efforts.

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