AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में चल रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरानी में डाल दिया है। सराफा इलाके में वर्षों से रोज़ाना दिखाई देने वाला एक भिक्षुक, जिसे लोग बेहद गरीब और लाचार समझते थे, दरअसल करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक निकला।
इस भिक्षुक का नाम मांगीलाल बताया जा रहा है। वह लंबे समय से इंदौर के व्यस्त सराफा बाजार क्षेत्र में भीख मांगता था। स्थानीय लोग उसे विकलांग समझकर नियमित रूप से दान देते थे। लेकिन जब प्रशासन को उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने लगीं, तब उसकी सच्चाई सामने आई।
🔍 कैसे हुआ मामले का खुलासा?
इंदौर जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान सामाजिक न्याय विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने सराफा क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाया। इसी दौरान मांगीलाल को भी रेस्क्यू किया गया।
जब टीम ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच शुरू की, तो एक-एक कर ऐसे तथ्य सामने आए, जो किसी को भी चौंका सकते हैं। जांच में पता चला कि मांगीलाल न केवल संपन्न है, बल्कि वह संगठित तरीके से आय अर्जित कर रहा था।
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🏠 करोड़ों की संपत्ति का मालिक
प्रशासनिक जांच में यह सामने आया कि मांगीलाल के नाम पर:
तीन पक्के मकान दर्ज हैं
इनमें से एक मकान तीन मंज़िला है
उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं
एक डिज़ायर कार भी उसके नाम पर पंजीकृत है
इतना ही नहीं, विकलांगता के आधार पर उसे शासन की ओर से पहले ही 1 बीएचके का आवास भी आवंटित किया जा चुका था।
💰 भीख के साथ ब्याज और किराए से कमाई
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मांगीलाल सिर्फ भीख पर निर्भर नहीं था। वह लोगों को ब्याज पर पैसे उधार देता था और अपने ऑटो व कार को किराए पर चलवाकर नियमित आय प्राप्त करता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मांगीलाल जरूरतमंदों को ऊंचे ब्याज पर पैसे देता था और समय पर रकम न चुकाने पर दबाव भी बनाता था। इसके बावजूद वह रोज़ाना सार्वजनिक स्थानों पर खुद को मजबूर दिखाकर भीख मांगता रहा।
🤔 लोगों की भावनाओं से खिलवाड़
इस मामले ने समाज में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। जिन लोगों ने मांगीलाल को गरीब समझकर वर्षों तक मदद की, उनके साथ भावनात्मक छल हुआ है। कई स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों ने बताया कि वे रोज़ उसे दान देते थे, क्योंकि वह विकलांग और बेसहारा प्रतीत होता था।
अब जब सच्चाई सामने आई है, तो लोगों में नाराज़गी और निराशा दोनों देखने को मिल रही हैं।
🚨 प्रशासन की कार्रवाई
लगातार मिल रही शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मांगीलाल को भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत रेस्क्यू कर लिया गया है। फिलहाल उसे पुनर्वास केंद्र में रखा गया है और उसकी पूरी संपत्ति व आय स्रोतों की विस्तृत जांच की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद शासन के निर्देशानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
📢 भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान का उद्देश्य
इंदौर प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान वास्तव में जरूरतमंद और असहाय लोगों को पुनर्वास देने के लिए है। इसका उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है, जो मजबूरी में भीख मांग रहे हैं, ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
लेकिन इस तरह के मामले यह भी दिखाते हैं कि कुछ लोग व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं और असली जरूरतमंदों का हक छीन रहे हैं।
🧠 समाज के लिए सबक
यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि दान करते समय विवेक और जागरूकता जरूरी है। साथ ही प्रशासन के लिए भी यह संकेत है कि भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी वास्तविकताओं को समझना और कड़ाई से जांच करना आवश्यक है।
A shocking incident from Indore, Madhya Pradesh has come to light during the anti-begging campaign, where a beggar from the Sarafa area was found to be a crorepati. The man owned multiple houses, vehicles, and earned income through money lending and rentals, raising serious questions about misuse of government welfare schemes and the effectiveness of anti-begging initiatives.






