आईपीएस अजय पाल शर्मा कौन हैं? बंगाल चुनाव में वायरल वीडियो से बढ़ी सियासी हलचल
AIN NEWS 1: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग से पहले एक वीडियो ने अचानक राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। इस वीडियो में उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक टीएमसी नेता के घर पहुंचकर सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर कौन हैं अजय पाल शर्मा, जिनका नाम पहले भी कई बार चर्चा में रहा है? और क्यों उनकी तैनाती को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है?
बंगाल चुनाव में क्या हुआ?
दरअसल, निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए बाहरी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है। इसी कड़ी में यूपी कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में जिम्मेदारी दी गई।
यह इलाका खासा राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और इसे अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र भी कहा जाता है। चुनाव से पहले लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ इलाकों में मतदाताओं पर दबाव डाला जा रहा है।
इन्हीं शिकायतों की जांच के दौरान अजय पाल शर्मा फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने टीएमसी से जुड़े नेता जहांगीर खान के घर जाकर सीधे तौर पर चेतावनी दी। वायरल वीडियो में वह साफ कहते सुनाई देते हैं कि अगर मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायत दोबारा मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उनके इस रुख के बाद इलाके में हलचल मच गई और राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
कौन हैं आईपीएस अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा साल 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर से आते हैं। उन्हें अपने तेज-तर्रार और कड़े प्रशासनिक रवैये के लिए जाना जाता है।
उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की रही है जो कानून-व्यवस्था के मामले में तुरंत और सख्त निर्णय लेने के लिए पहचाने जाते हैं। इसी वजह से उन्हें कई बार “सिंघम” और “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” जैसे नामों से भी संबोधित किया गया है।
शैक्षणिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
मूल रूप से पंजाब के लुधियाना से संबंध
पुलिस सेवा में आने से पहले डॉक्टर थे
बीडीएस (डेंटल साइंस) की पढ़ाई की
यह बात उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग बनाती है कि उन्होंने एक स्थिर मेडिकल करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा को चुना।
यूपी में उनका करियर और कार्यशैली
अजय पाल शर्मा ने उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में काम किया है, जिनमें शामिल हैं:
नोएडा
शामली
जौनपुर
रामपुर
वर्तमान में वे प्रयागराज में ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात हैं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े आपराधिक मामलों में कार्रवाई की और कई मुठभेड़ों का नेतृत्व भी किया। उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा पहलू है—“जीरो टॉलरेंस”।
अपराधियों के खिलाफ उनके सख्त रवैये के कारण उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बनी, जिससे अपराधी वर्ग दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझता है।
बंगाल में तैनाती क्यों अहम है?
पश्चिम बंगाल चुनाव हमेशा से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग बाहरी राज्यों के अधिकारियों को तैनात करता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
अजय पाल शर्मा की तैनाती दक्षिण 24 परगना जैसे क्षेत्र में करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। उनकी सख्त छवि को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही थी कि वे किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत नियंत्रित करेंगे—और वायरल वीडियो ने इस धारणा को और मजबूत कर दिया।
वायरल वीडियो पर सियासी घमासान
इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वीडियो को लेकर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है और कहा कि बीजेपी अपने “एजेंट” के रूप में अधिकारियों को भेज रही है।
हालांकि, इस बयान के जवाब में अब तक निर्वाचन आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या कहता है यह पूरा मामला?
यह घटना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
चुनावी निष्पक्षता का सवाल – क्या सख्त कार्रवाई जरूरी है या यह पक्षपात माना जाएगा?
अधिकारियों की भूमिका – चुनाव के दौरान प्रशासन कितना सक्रिय और आक्रामक हो सकता है?
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप – हर कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखने की प्रवृत्ति
अजय पाल शर्मा का तरीका भले ही कड़ा हो, लेकिन यह भी सच है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में प्रशासन को तेजी से निर्णय लेने पड़ते हैं।
आईपीएस अजय पाल शर्मा एक ऐसे अधिकारी हैं जिनकी पहचान उनके सख्त रवैये और तेज कार्रवाई से जुड़ी है। पश्चिम बंगाल चुनाव में उनकी तैनाती और उसके बाद सामने आया वीडियो इस बात का संकेत देता है कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया कि भारत की राजनीति में हर प्रशासनिक कदम तुरंत राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले पर चुनाव आयोग और अन्य राजनीतिक दल किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
IPS Ajay Pal Sharma, a 2011 batch Uttar Pradesh cadre officer, has come into the spotlight during the West Bengal Elections 2026 after a viral video showed him warning a TMC leader. Known for his strict law enforcement style and encounter specialist image, Sharma’s role as an election observer in South 24 Parganas has sparked political debate involving leaders like Abhishek Banerjee and Akhilesh Yadav, raising questions about neutrality and administrative action during elections.


















